Poshan Tracker: बच्चों की लंबाई, वज़न और पोषण की जानकारी अब होगी ऑनलाइन दर्ज, जानिए आंगनवाड़ी सेवाओं पर कैसे रखी जाएगी नज़र
Mansi | Aug 06, 2026, 14:33 IST
बच्चों और महिलाओं के लिए पोषण सेवाओं की पहुँच को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जा रहा है। 'पोषण ट्रैकर' एप्लिकेशन का उपयोग कुपोषण की स्थिति और आंगनवाड़ी सेवाओं की नियमित निगरानी करने के लिए किया जा रहा है। यह ऐप बच्चों की वृद्धि और पोषण योजना की प्रगति को फॉलो करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
पोषण ट्रैकर से आंगनवाड़ी सेवाओं और बच्चों के पोषण की डिजिटल निगरानी हुई और अधिक प्रभावी
देश में बच्चों और महिलाओं तक पोषण सेवाएँ प्रभावी ढंग से पहुँच रही हैं या नहीं, इसकी निगरानी अब डिजिटल माध्यम से की जा रही है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत विकसित 'पोषण ट्रैकर' एप्लिकेशन के माध्यम से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण, कम वज़न, बौनापन (स्टंटिंग) और क्षीणता (वेस्टिंग) जैसे संकेतकों के साथ-साथ आंगनवाड़ी सेवाओं की भी नियमित निगरानी की जा रही है।
देशभर में लाखों बच्चे और गर्भवती एवं धात्री महिलाएँ आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ लेती हैं। ऐसे में यह जानना भी ज़रूरी है कि इन सेवाओं की निगरानी कैसै होती है और कैसे सुनिश्चित किया जाता है कि लाभ सही लोगों तक समय पर पहुँचे। इसी उद्देश्य से विकसित पोषण ट्रैकर अब आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी, बच्चों की वृद्धी माप और पोषण कार्यक्रमों की प्रगति पर नज़र रखने का एक अहम डिजिटल माध्यम बन गया है।
पोषण ट्रैकर एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं का रिकॉर्ड तैयार करना और उनकी निगरानी करना है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
इस एप्लिकेशन के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), बच्चों की लंबाई और वज़न की नियमित माप, गर्म पका हुआ भोजन तथा टेक-होम राशन (टीएचआर) के वितरण जैसी सेवाओं का डेटा लगभग रियल टाइम में दर्ज किया जाता है। इससे प्रशासन को यह समझने में आसानी होती है कि किस क्षेत्र में किस तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
मंत्रालय ने बताया कि पोषण ट्रैकर में 'सपोर्टिव सुपरविज़न' मॉड्यूल भी जोड़ा गया है। यह सुपरवाइज़र, सीडीपीओ और डीपीओ जैसे अधिकारियों को वास्तविक समय में निगरानी करने और दर्ज किए गए आँकड़ों की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करता है। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पिछले पाँच वर्षों में 1,29,415 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है। इन केंद्रों में बच्चों की बेहतर देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को मज़बूत किया जा रहा है।
योजना के तहत सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की लंबाई और वज़न मापने के लिए आवश्यक वृद्धि निगरानी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें शिशुओं के लिए इन्फैंटोमीटर, बड़े बच्चों के लिए स्टैडियोमीटर, शिशु वज़न मशीन और माता एवं बच्चे के लिए वज़न मशीन शामिल हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्मार्टफ़ोन के माध्यम से इन सभी मापों का डेटा सीधे पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में दर्ज करती हैं। इसके लिए उन्हें डेटा रिचार्ज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जबकि उपकरणों की खरीद के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार लागत-साझेदारी के आधार पर सहायता देती है।
पोषण ट्रैकर का उद्देश्य केवल आँकड़े जुटाना नहीं, बल्कि बच्चों और महिलाओं तक पोषण सेवाओं की पहुँच को अधिक प्रभावी बनाना है। डिजिटल निगरानी से कमियों की पहचान जल्दी हो सकती है और ज़रूरतमंद क्षेत्रों में समय पर कार्रवाई संभव हो सकती है। साथ ही, इससे आंगनवाड़ी सेवाओं के क्रियान्वयन और पोषण कार्यक्रमों की समीक्षा भी अधिक व्यवस्थित ढंग से की जा सकती है।
देशभर में लाखों बच्चे और गर्भवती एवं धात्री महिलाएँ आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ लेती हैं। ऐसे में यह जानना भी ज़रूरी है कि इन सेवाओं की निगरानी कैसै होती है और कैसे सुनिश्चित किया जाता है कि लाभ सही लोगों तक समय पर पहुँचे। इसी उद्देश्य से विकसित पोषण ट्रैकर अब आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी, बच्चों की वृद्धी माप और पोषण कार्यक्रमों की प्रगति पर नज़र रखने का एक अहम डिजिटल माध्यम बन गया है।