Pre-Monsoon: पूर्वी भारत में तेज़ हुई प्री-मानसून गतिविधि, यूपी समेत उत्तर भारत को मिलेगी राहत

Preeti Nahar | May 01, 2026, 09:48 IST
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देश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज़ हो चुकी हैं, खासकर पूर्वी भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। इसका असर अब उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत में भी दिखने लगेगा, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, मानसून 2026 के सामान्य से कम रहने के संकेत चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में किसानों और आम लोगों को बदलते मौसम के साथ सतर्क रहने की जरूरत है।
पूर्वी भारत में भारी बारिश का दौर<br>
पूर्वी भारत में भारी बारिश का दौर
Pre-Monsoon Activity: देश में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने करवट लेना शुरू कर दिया है। प्राइवेट मौसम एजेंसी Skymet Weather के अनुसार प्री-मानसून गतिविधियां तेज़ हो रही हैं, खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में। इस बदलाव का असर धीरे-धीरे उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश में भी दिखाई देने लगेगा, जिससे लू और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

पूर्वी भारत में भारी बारिश का दौर

पिछले कुछ दिनों में बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इन क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज़ हवाओं और भारी बारिश की स्थिति बन रही है। यह गतिविधि बंगाल की खाड़ी से उठ रही नमी और हवा के दबाव के कारण बढ़ रही है। इसके चलते पूर्वोत्तर भारत में कई जगहों पर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है, जो आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है।

उत्तर भारत और यूपी में क्या होगा असर

पूर्वी भारत में सक्रिय यह सिस्टम धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ेगा। इसके कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। हाल ही में दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश और आंधी ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई, जो प्री-मानसून की शुरुआत का संकेत है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों में

  1. तेज़ हवाएं
  2. गरज-चमक
  3. हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है। इससे गर्मी और लू से राहत मिल सकती है।

गर्मी और हीटवेव के बीच राहत की उम्मीद

अभी देश के कई हिस्सों, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में प्री-मानसून बारिश किसानों और आम लोगों दोनों के लिए राहत लेकर आएगी। हालांकि, यह राहत अस्थायी हो सकती है क्योंकि मई के महीने में फिर से तापमान बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

मानसून 2026 को लेकर बड़ा संकेत

प्री-मानसून गतिविधियों के बीच मानसून 2026 को लेकर चिंता भी बनी हुई है। Skymet के अनुसार इस साल मानसून सामान्य से कम रह सकता है और लगभग 94% LPA तक सीमित रहने का अनुमान है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण एल नीनो (El Niño) को माना जा रहा है, जो बारिश को प्रभावित कर सकता है और कई क्षेत्रों में कम वर्षा की स्थिति पैदा कर सकता है।

किसानों के लिए क्या मायने हैं

प्री-मानसून बारिश खेती के लिए महत्वपूर्ण होती है, खासकर खरीफ फसलों की तैयारी के समय।

  1. खेतों में नमी बढ़ेगी
  2. जुताई और बुवाई की तैयारी आसान होगी
  3. पशुपालन और चारा उपलब्धता बेहतर होगी, लेकिन अगर बारिश असमान रही, तो कुछ इलाकों में सूखा और कुछ में जलभराव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

आने वाले दिनों का ट्रेंड

मौसम विभाग और निजी एजेंसियों के अनुसार:

  1. पूर्वी भारत में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा
  2. उत्तर भारत में धीरे-धीरे इसका असर दिखेगा
  3. मई के पहले सप्ताह में मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा
  4. कहीं बारिश तो कहीं गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा
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