उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायतें, लेकिन निवारण में भी अव्वल, 13 लाख से अधिक शिकायतों का हुआ समाधान

Gaon Connection | Feb 06, 2026, 14:09 IST
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देश में जन शिकायतों के निवारण के लिए चल रही केन्द्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली यानी सीपीजीआरएएमएस के जरिए पिछले पांच सालों में करोड़ों लोगों की समस्याओं का समाधान हुआ है। सरकार द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 से 2025 के बीच देशभर में कुल 36.50 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 43.40 लाख शिकायतों का निवारण किया गया। इनमें से उत्तर प्रदेश अकेले सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है जहां सबसे अधिक शिकायतें आईं और साथ ही सबसे अधिक शिकायतों का समाधान भी हुआ।
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उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल 12.83 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं और 13.47 लाख शिकायतों का निवारण किया गया। यह देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक है। हालांकि, शिकायतों की संख्या ज्यादा होने के साथ-साथ यहां के नागरिकों ने 1.22 लाख चेतावनी पत्र भी दिए, जो दर्शाता है कि कई मामलों में लोग शिकायत के समाधान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। फिर भी, समग्र रूप से देखें तो प्रदेश में शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा जहां 2.07 लाख शिकायतें मिलीं और 3.16 लाख का निवारण हुआ। यहां नागरिकों ने 73,614 चेतावनी पत्र दिए। गुजरात तीसरे नंबर पर है जहां 2.78 लाख शिकायतें आईं और 2.84 लाख का समाधान हुआ, लेकिन यहां चेतावनी पत्रों की संख्या काफी अधिक रही - 77,588। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान है जहां 1.87 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं और 2.97 लाख का निवारण किया गया, वहीं 48,347 चेतावनी पत्र मिले।

बिहार में 1.63 लाख शिकायतें आईं और 2.32 लाख का समाधान हुआ, जबकि 44,080 चेतावनी पत्र दिए गए।

हरियाणा में 1.62 लाख शिकायतें दर्ज हुईं और 1.79 लाख का निवारण हुआ, लेकिन यहां चेतावनी पत्रों की संख्या भी काफी ज्यादा रही - 75,034। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1.50 लाख शिकायतें आईं और 1.60 लाख का समाधान हुआ, वहीं 46,780 चेतावनी पत्र दर्ज किए गए। राजस्थान में 1.51 लाख शिकायतें मिलीं और 1.64 लाख का निवारण हुआ, जबकि 29,509 चेतावनी पत्र आए।

असम में 1.31 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं और 1.63 लाख का समाधान किया गया, यहां केवल 9,223 चेतावनी पत्र दिए गए जो दर्शाता है कि अधिकतर नागरिक समाधान से संतुष्ट रहे। तमिलनाडु में 1.08 लाख शिकायतें आईं और 1.32 लाख का निवारण हुआ, वहीं 48,235 चेतावनी पत्र मिले। पंजाब में 1.07 लाख शिकायतें दर्ज हुईं और 1.28 लाख का समाधान किया गया, यहां 19,545 चेतावनी पत्र आए। झारखंड में 99,163 शिकायतें मिलीं और 1.13 लाख का निवारण हुआ, जबकि 33,362 चेतावनी पत्र दर्ज किए गए।

छोटे राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की बात करें तो सिक्किम में केवल 1,225 शिकायतें आईं और 1,933 का निवारण हुआ, यहां 262 चेतावनी पत्र मिले। लद्दाख में 1,056 शिकायतें प्राप्त हुईं और 1,040 का समाधान किया गया, वहीं 185 चेतावनी पत्र दिए गए। लक्षद्वीप में सबसे कम 1,101 शिकायतें आईं और 1,083 का निवारण हुआ, यहां 146 चेतावनी पत्र दर्ज हुए। मिजोरम में 1,781 शिकायतें मिलीं और 2,317 का समाधान किया गया, लेकिन यहां चेतावनी पत्रों की संख्या 1,512 रही जो शिकायतों की तुलना में काफी अधिक है।

सीपीजीआरएएमएस दरअसल एक 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला ऑनलाइन मंच है जो आम नागरिकों के लिए बनाया गया है। इस पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और उसकी प्रगति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है। यह प्रणाली शिकायतों को दर्ज करने, संबंधित विभागों तक पहुंचाने, उन पर नजर रखने और समीक्षा करने की पूरी सुविधा देती है। इस तंत्र के तहत शिकायत का समाधान करने की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों, विभागों और राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारों की होती है।

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अगर किसी शिकायत का समाधान नहीं होता है या गुमराह करने वाला जवाब दिया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों से जुड़ी शिकायतों के लिए सीपीजीआरएएमएस पर अपील का भी प्रावधान है। यदि कोई नागरिक अपनी शिकायत के समाधान से संतुष्ट नहीं है तो वह चेतावनी पत्र दे सकता है और मामले को आगे बढ़ा सकता है।

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सरकार ने शिकायत निवारण की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने और लंबित शिकायतों को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सीपीजीआरएएमएस के तहत 10-चरणीय सुधार लागू किए गए हैं जो शिकायत निवारण की दक्षता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। अगस्त 2024 में सार्वजनिक शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इन दिशानिर्देशों के तहत शिकायत निपटाने की समय-सीमा को पहले के 30 दिनों से घटाकर मात्र 21 दिन कर दिया गया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि नागरिकों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान हो।

नए दिशानिर्देशों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि हर विभाग में समर्पित शिकायत प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएं। इसके अलावा, शिकायतों के मूल कारणों का विश्लेषण करने पर जोर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा न उत्पन्न हों। नागरिकों की प्रतिक्रिया पर कार्रवाई करना और शिकायत वृद्धि तंत्र को मजबूत बनाना भी इन सुधारों का हिस्सा है। सीपीजीआरएएमएस में एक समर्पित समीक्षा बैठक मॉड्यूल भी शुरू किया गया है जो वरिष्ठ स्तर पर शिकायतों की समीक्षा करने में मदद करता है।

शिकायत निवारण तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। सेवोत्तम योजना के तहत प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों को वित्तीय सहायता दी जाती है ताकि वे अधिकारियों को प्रशिक्षण दे सकें। पिछले चार वर्षों में ऐसे 1,010 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के 33,775 शिकायत निवारण अधिकारियों को लाभ हुआ है। इन प्रशिक्षणों में अधिकारियों को शिकायतों को संवेदनशीलता से निपटाना, तकनीकी मंच का सही उपयोग करना और समय पर समाधान सुनिश्चित करना सिखाया जाता है।

इसके साथ ही, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग यानी डीएआरपीजी सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों के साथ मासिक समीक्षा बैठकें भी आयोजित करता है। इन बैठकों में शिकायतों के समय पर निपटान को सुनिश्चित करने के लिए चर्चा की जाती है, लंबित शिकायतों की समीक्षा होती है और समस्याओं के समाधान के लिए रणनीति बनाई जाती है। यह नियमित समीक्षा तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि राज्य सरकारें और विभाग अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें।

कुल मिलाकर देखें तो सीपीजीआरएएमएस देश में जन शिकायत निवारण का एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनकर उभरा है। आंकड़े बताते हैं कि प्राप्त शिकायतों से अधिक शिकायतों का निवारण हुआ है, जिसका मतलब है कि पिछले सालों की लंबित शिकायतों को भी निपटाया जा रहा है। हालांकि, करीब 8 लाख चेतावनी पत्रों की संख्या यह भी दर्शाती है कि अभी भी सुधार की गुंजाइश है और नागरिकों की संतुष्टि के स्तर को बढ़ाने की जरूरत है।

केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि सरकार जन शिकायतों को गंभीरता से लेती है और इस दिशा में लगातार सुधार के प्रयास जारी हैं। सीपीजीआरएएमएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने आम नागरिक और सरकारी तंत्र के बीच की दूरी को कम किया है और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया है।
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