किसानों के लिए ख़ुशख़बरी! बिहार में फिर शुरू होंगी रैयाम और सकरी चीनी मिलें, इन 2 ज़िलों के गाँवों को होगा फायदा

Gaon Connection | Jun 18, 2026, 13:11 IST
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बिहार में रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। इसके लिए मधुबनी और दरभंगा गाँवों को आरक्षित क्षेत्र में शामिल किया गया है। गन्ना उत्पादक किसानों की सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है जिनमें किसानों को सदस्य बनाया जाएगा। परियोजना के तहत गन्ना विपणन, कृषि आधारित गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी
बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी
बिहार के गन्ना किसानों के लिए अच्छी ख़बर है। राज्य में बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज़ हो गई है। दरभंगा और मधुबनी ज़िलों में सहकारी मॉडल के तहत इन चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी चल रही है। सहकारिता विभाग ने दोनों क्षेत्रों में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की अनुमति दे दी है। इन समितियों में क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों को सदस्य बनाया जाएगा, ताकि मिलों के संचालन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने हाल ही में इस परियोजना की समीक्षा की और अधिकारियों को सहकारी समितियों के निबंधन तथा अन्य प्रक्रियाएँ तेज़ी से पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि रैयाम चीनी मिल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ इसे सहकारिता विभाग को सौंप चुका है। अब विभाग रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

कितने गाँव किए गए आरक्षित

गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों प्रस्तावित चीनी मिलों के लिए क्षेत्र निर्धारण की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत कुल 2401 गाँवों को आरक्षित क्षेत्र में शामिल किया गया है।

रैयाम चीनी मिल

  • मधुबनी के 438 गाँव
  • दरभंगा के 580 गाँव
सकरी चीनी मिल

  • मधुबनी के 686 गाँव
  • दरभंगा के 697 गाँव
इन गाँवों के गन्ना उत्पादक किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से चीनी मिलों से जोड़ा जाएगा।

किसानों को क्या लाभ हो सकता है?

रैयाम और सकरी में चीनी मिलों की स्थापना होने पर क्षेत्र के किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा मिल सकती है। गन्ने की ख़रीद की व्यवस्था नज़दीक होने से किसानों को अपनी उपज दूर तक ले जाने की आवश्यकता कम हो सकती है, जिससे परिवहन लागत घटने की संभावना है। इसके अलावा गन्ना उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है और कृषि आधारित गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से क्षेत्र में रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी।

सदस्य बनने के लिए क्या हैं नियम?

सहकारी समिति का सदस्य बनने के लिए सामान्य श्रेणी के किसान के पास कम से कम 100 डिसमिल क्षेत्र में गन्ना उत्पादन होना चाहिए या वह गन्ना उत्पादन करने का इच्छुक हो। अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल निर्धारित की गई है।

इसके अलावा:

  • कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • प्रवेश शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
  • समिति के एक हिस्से (शेयर) का मूल्य 1000 रुपये रखा गया है।

सदस्यता के लिए बनेगा ऑनलाइन पोर्टल

किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने के लिए विभाग एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार कर रहा है। इसके माध्यम से किसान सदस्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे। साथ ही गाँव और पंचायत स्तर पर किसानों को योजना की जानकारी देने और जागरूक करने का अभियान भी चलाया जा रहा है।
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