राजस्थान और तेलंगाना के किसानों के लिए बड़ी खबर, कृषि योजनाओं के तहत ₹605 करोड़ से ज्यादा की मंज़ूरी
Mansi | Aug 13, 2026, 16:34 IST
केंद्र सरकार ने किसानों के उत्थान के लिए राजस्थान और तेलंगाना को ₹605.71 करोड़ की सहायता देने का निर्णय लिया है। यह वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं कृषोन्नति योजना के तहत प्रदान की जाएगी। राजस्थान को ₹340.59 करोड़, जो पहले ही कुछ योजनाओं पर खर्च किया जा चुका है, जबकि तेलंगाना को ₹265.12 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जिसमें योजनाओं की निगरानी जरूरी है।
राजस्थान और तेलंगाना के लिए कृषि योजनाओं के तहत ₹605.71 करोड़ की मंज़ूरी।
राजस्थान और तेलंगाना के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों के लिए ₹605.71 करोड़ की वित्तीय मंज़ूरी दी है। यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत जारी की जाएगी। सरकार का कहना है कि इसका मक़सद कृषि योजनाओं को ज़मीन पर तेज़ी से लागू करना और किसानों तक उनका लाभ बेहतर तरीके़ से पहुँचाना है।
यह मंज़ूरी दोनों राज्यों में पहले से स्वीकृत कार्ययोजनाओं, जारी राशि के इस्तेमाल और अब तक हुए ख़र्च की समीक्षा के बाद दी गई है। बैठक में कृषि उत्पादन बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को मज़बूत करने और किसानों को ज़रूरी सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। यानी सरकार का फोकस केवल राशि जारी करने पर नहीं, बल्कि उसके सही और समयबद्ध इस्तेमाल पर भी है।
राजस्थान के लिए कुल ₹340.59 करोड़ की मंज़ूरी दी गई है। इसमें RKVY मद में ₹216.12 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹124.47 करोड़ शामिल हैं। राज्य के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में केंद्र के हिस्से के तौर पर ₹509.62 करोड़ निर्धारित किए गए थे। इससे पहले मई में ₹216.13 करोड़ की पहली राशि जारी की गई थी। राज्य अब तक इस पहली मंज़ूरी की राशि का करीब 76% खर्च कर चुका है। केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान में कृषि के समग्र विकास के लिए काम तेज़ करने के साथ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा है। इसका मक़सद किसानों को समय पर और आसानी से कृषि ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
तेलंगाना के लिए केंद्र ने कुल ₹265.12 करोड़ मंज़ूर किए हैं। इसमें RKVY के तहत ₹157.66 करोड़ और KY मद में ₹107.46 करोड़ शामिल हैं। तेलंगाना के लिए 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना ₹651.06 करोड़ की थी, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹390.63 करोड़ निर्धारित किया गया था। राज्य को मई में ₹157.65 करोड़ की पहली मदर सैंक्शन जारी की गई थी और अब तक उसका करीब 60.93% खर्च किया जा चुका है।
बैठक में तेलंगाना के फॉर्मर आईडी और उर्वरक वितरण के नए मॉडल की भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्था किसानों तक सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके़ से पहुँचाने में मदद कर सकती है। हालाँकि, तिलहन और दलहन से जुड़े मिशनों में तेलंगाना का ख़र्च अपेक्षाकृत कम रहने पर निगरानी बढ़ाने की ज़रूरत भी बताई गई। राज्य को इन योजनाओं के क्रियान्वयन और ख़र्च की प्रगति पर नियमित ध्यान देने को कहा गया है।
इन वित्तीय स्वीकृतियों का सीधा उद्देश्य कृषि योजनाओं को बेहतर तरीके़ से लागू करना है। राशि का इस्तेमाल कृषि अवसंरचना, उत्पादन बढ़ाने, इनपुट सहायता और किसान कल्याण से जुड़ी गतिविधियों में किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि योजनाओं के लिए उपलब्ध पैसा समय पर इस्तेमाल हो और उसका लाभ वास्तविक रूप से किसानों तक पहुँचे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीकी सहायता और योजनाओं की निगरानी पर ज़ोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर किसान हित में संसाधन और तकनीकी सहायता को मज़बूत कर रही है। अब इन मंज़ूरियों के बाद दोनों राज्यों में कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आने की उम्मीद है।
यह मंज़ूरी दोनों राज्यों में पहले से स्वीकृत कार्ययोजनाओं, जारी राशि के इस्तेमाल और अब तक हुए ख़र्च की समीक्षा के बाद दी गई है। बैठक में कृषि उत्पादन बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को मज़बूत करने और किसानों को ज़रूरी सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। यानी सरकार का फोकस केवल राशि जारी करने पर नहीं, बल्कि उसके सही और समयबद्ध इस्तेमाल पर भी है।
राजस्थान को मिले ₹340.59 करोड़
तेलंगाना को ₹265.12 करोड़ की मंज़ूरी
फॉर्मर आईडी और खाद वितरण मॉडल की हुई तारीफ़
किसानों को क्या फ़ायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर किसान हित में संसाधन और तकनीकी सहायता को मज़बूत कर रही है। अब इन मंज़ूरियों के बाद दोनों राज्यों में कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आने की उम्मीद है।