भारत में पहली बार एक्वेरियम में हुई दुर्लभ ‘बैंबू शार्क’ की सफल ब्रीडिंग, विशेष निगरानी में रखे गए अंडे, चेन्नई के वीजीपी मरीन किंगडम ने रचा इतिहास

Gaon Connection | May 11, 2026, 14:53 IST
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वीजीपी मरीन किंगडम ने समुद्री संरक्षण में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां पहली बार भारत में एक्वेरियम के अंदर दुर्लभ ब्राउनबैंडेड बैंबू शार्क की सफल ब्रीडिंग हुई है। यह देश में इस प्रजाति की शुरुआती कैप्टिव ब्रीडिंग में से एक है। यह सफलता समुद्री जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण है।
चेन्नई स्थित वीजीपी मरीन किंगडम ने समुद्री संरक्षण और एक्वेरियम विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां पहली बार भारत में एक्वेरियम के अंदर दुर्लभ “ब्राउनबैंडेड बैंबू शार्क” (Brownbanded Bamboo Shark) की सफल ब्रीडिंग दर्ज की गई है। इसे देश में इस प्रजाति की सबसे शुरुआती सफल कैप्टिव ब्रीडिंग (कैद में ब्रीडिंग) उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। समुद्री विशेषज्ञों के मुताबिक यह उपलब्धि भारत में समुद्री जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक रिसर्च के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वीजीपी मरीन किंगडम का कहना है कि यह सफलता वहां की उन्नत एक्वेरियम तकनीक, समुद्री जीवों की बेहतर देखभाल और विशेषज्ञ टीम की मेहनत का नतीजा है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की खास प्रजाति है बैंबू शार्क

ब्राउनबैंडेड बैंबू शार्क इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पाई जाने वाली एक शांत स्वभाव की समुद्री प्रजाति है। यह आमतौर पर समुद्र की तलहटी और उथले कोरल रीफ क्षेत्रों में रहती है। इसके बच्चे के शरीर पर गहरे भूरे रंग की धारियां होती हैं, जो बड़े होने के साथ धीरे-धीरे हल्की पड़ जाती हैं। यह शार्क समुद्र की सतह के बजाय तल पर रहने की आदी होती है और अपने शांत व्यवहार के कारण वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

विशेष निगरानी में रखे गए शार्क के अंडे

वीजीपी मरीन किंगडम के अधिकारियों ने बताया कि शार्क के अंडों को फिलहाल विशेष क्वारंटीन और इन्क्यूबेशन सिस्टम में सुरक्षित रखा गया है। समुद्री विशेषज्ञ लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं ताकि उनका विकास सुरक्षित तरीके से हो सके। एक्वेरियम आने वाले पर्यटक अब इस पूरी इन्क्यूबेशन प्रक्रिया को भी करीब से देख सकेंगे। इसके जरिए लोगों को शार्क प्रजातियों, समुद्री पारिस्थितिकी और समुद्री संरक्षण के बारे में जागरूक करने की योजना बनाई गई है।

समुद्री संरक्षण में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम समुद्री जीवों की जंगली आबादी पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं। इससे संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, वैज्ञानिक रिसर्च और भविष्य की संरक्षण रणनीतियों को मजबूती मिलती है। वीजीपी मरीन किंगडम के निदेशक वीजीपीआर प्रेमदास ने कहा कि यह उपलब्धि उनके संस्थान के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि इससे भारत में समुद्री ब्रीडिंग और संरक्षण के प्रयासों को नई पहचान मिलेगी।

भारत के बड़े समुद्री एक्वेरियम में शामिल है वीजीपी मरीन किंगडम

चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित वीजीपी मरीन किंगडम भारत के सबसे बड़े और आधुनिक वॉक-थ्रू एक्वेरियम में गिना जाता है। यहां दुनिया भर की कई दुर्लभ समुद्री प्रजातियों को अलग-अलग थीम वाले समुद्री जोन में प्रदर्शित किया गया है। यह एक्वेरियम समुद्री शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और जिम्मेदार समुद्री देखभाल को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में छात्र, शोधकर्ता और पर्यटक समुद्री दुनिया को करीब से देखने पहुंचते हैं।
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