बारिश पर टिकी महंगाई की चाल, महंगी होने वाली है आपकी थाली? RBI ने मानसून व अल नीनो को लेकर दी बड़ी चेतावनी
Umang | Jun 05, 2026, 17:05 IST
RBI ने चेतावनी दी है कि सामान्य से कम मानसून और अल नीनो का खतरा आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ा सकता है। कमजोर बारिश से फसलों की पैदावार और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस वर्ष अर्थव्यवस्था और महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
RBI ने मानसून को लेकर दी चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आगाह किया है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।यदि बारिश सामान्य से कम रहती है या अल नीनो का असर बढ़ता है तो इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि खुदरा महंगाई फिलहाल केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, लेकिन खाद्य महंगाई को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। उन्होंने कहा कि सामान्य से कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका आने वाले महीनों में महंगाई के मोर्चे पर चुनौती पैदा कर सकती है।
RBI गवर्नर के मुताबिक यदि मानसून कमजोर रहता है तो वर्षा आधारित खेती प्रभावित हो सकती है। इससे दालों, अनाज, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की पैदावार पर असर पड़ सकता है जिसके चलते बाजार में आपूर्ति घटने और कीमतें बढ़ने की संभावना रहेगी। उन्होंने कहा कि खाद्य महंगाई का भविष्य काफी हद तक मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा। कमजोर बारिश कृषि क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ा सकती है, जबकि अच्छी वर्षा मूल्य स्थिरता बनाए रखने और ग्रामीण आय को मजबूत करने में मदद करेगी।
केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है और अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ (Neutral) बनाए रखा है। हालांकि RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान को इसके प्रमुख कारणों में गिनाया है।
RBI की चिंता ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को दीर्घकालिक औसत (LPA) का 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने इसे "सामान्य से कम" श्रेणी में रखा है। इसके साथ ही अल नीनो के विकसित होने की संभावना भी जताई गई है। ऐतिहासिक रूप से अल नीनो का संबंध भारत में कमजोर मानसून से रहा है जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
देश में खुदरा महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.84 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मार्च में 3.4 प्रतिशत थी। यह लगातार चौथा महीना है जब महंगाई दर में वृद्धि दर्ज की गई है। यदि कमजोर मानसून, महंगे ऊर्जा उत्पाद और रुपये पर दबाव जैसी स्थितियां एक साथ बनती हैं तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है। ऐसे में मानसून की स्थिति सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित करती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि बारिश किन कृषि क्षेत्रों में और कितनी होती है।यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी बना रहता है, खाद्यान्न भंडार संतोषजनक रहता है और प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सामान्य वर्षा होती है, तो कमजोर मानसून के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि 5 जून तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है जो बाहरी झटकों से निपटने के लिए देश को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है। फिलहाल अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन इस साल महंगाई और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय करने में मानसून सबसे अहम कारकों में से एक रहेगा।