पनीर असली है या एनालॉग? चाप में प्रोटीन है या स्टार्च? क्या खा रहे हैं आप, डॉक्टर से जानिए कितना है सेहत के लिए सही
Mansi | Aug 20, 2026, 13:59 IST
आपके रोजमर्रा के भोजन में पैकेज्ड फूड के लेबल का अध्ययन करना अत्यावश्यक है। प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों का उपयोग सीमित रखें। एनालॉग पनीर और सोया चाप जैसे रासायनिक उत्पादों की सामग्री को ध्यान से जांचना नियम बनाएं। कृत्रिम रंगों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन केवल आवश्यक मात्रा में करें। लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी से स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सकता है।
एनालॉग पनीर से सोया चाप तक, पैकेज्ड फूड खरीदने से पहले लेबल पढ़ना जरूरी है
पनीर, सोया चाप, चीज़, रंगीन मिठाइयाँ, चिप्स और पैकेज्ड ड्रिंक्स आज हमारी रोज़मर्रा की डाइट का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके खाने में वास्तव में क्या इस्तेमाल हुआ है? आकर्षक पैकेट और स्वाद के पीछे मौजूद इंग्रीडिएंट्स आपकी सेहत के बारे में बहुत कुछ बताते हैं। खासकर एनालॉग पनीर, प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और आर्टिफ़िशियल कलर को लेकर सावधानी बरतना ज़रूरी है।
डॉ. प्रोफ़ेसर मृदुल मेहरोत्रा ने बताया कि किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदते समय सिर्फ़ उसकी शक्ल या पैकेट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। लेबल पर दी गई जानकारी पढ़ना और यह समझना ज़रूरी है कि उसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मिनरल्स और दूसरे एडिटिव्स कितनी मात्रा में हैं। डॉक्टर ने प्रोसेस्ड फूड, एनालॉग पनीर, सोया चाप और आर्टिफ़िशियल कलर को लेकर किन बातों का ध्यान रखने की सलाह दी, आइए जानते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक़, किसी खाद्य पदार्थ की शेल्फ़ लाइफ़ बढ़ाने के लिए उसे उबालना, पीसना, सुखाना या दूसरी प्रक्रिया से गुज़ारना प्रोसेसिंग कहलाता है। कई बार इसमें एडिटिव सब्सटेंस भी मिलाए जाते हैं, ताकि खाद्य पदार्थ को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। जब यही प्रक्रिया इंडस्ट्रियल लेवल पर कई चरणों में होती है और अलग-अलग तरह के पदार्थों को मिलाकर खाद्य उत्पाद तैयार किया जाता है, तो वह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड हो सकता है। डॉक्टर ने ऐसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करने से बचने और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही।
डॉक्टर ने एनालॉग पनीर को समझाते हुए बताया कि सामान्य पनीर दूध से बनता है। इसमें गाय, भैंस या बकरी के दूध का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं एनालॉग पनीर को अलग तरीके से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट की जगह दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर दूध के प्रोटीन की जगह सोया प्रोटीन और दूध की फैट की जगह वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कैल्शियम और दूसरे घटकों को भी अलग स्रोतों से जोड़ा जा सकता है।
डॉक्टर के मुताबिक़, ऐसे उत्पादों में प्रोटीन की मात्रा कम, फैट और स्टार्च की मात्रा अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि अगर किसी उत्पाद में इनकी मात्रा तय मानकों से ज़्यादा है, तो वह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए एनालॉग पनीर या ऐसे किसी भी प्रोडक्ट को खरीदते समय उसकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी देखना ज़रूरी है।
सोया चाप को आम तौर पर प्रोटीन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन डॉक्टर के मुताबिक़ हर सोया चाप में प्रोटीन की मात्रा एक जैसी नहीं होती। कुछ कंपनियों के उत्पादों में प्रोटीन की मात्रा कम और स्टार्च या मैदा की मात्रा अधिक हो सकती है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि सोया चाप को फ्राई और री-फ्राई करके खाने से इसमें इस्तेमाल होने वाली वसा की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए इसे खाते समय उसके लेबल के साथ-साथ उसे पकाने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए।
रंगीन मिठाइयों, ड्रिंक्स और दूसरे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफ़िशियल कलर को लेकर भी डॉक्टर ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक़, इनका इस्तेमाल तय मात्रा में किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें नियमित रूप से और ज़्यादा मात्रा में लेना सही है। डॉक्टर ने सलाह दी कि आर्टिफ़िशियल कलर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कभी-कभार तक सीमित रखना बेहतर है। उनकी राय में प्राकृतिक रंगों वाले फल और सब्ज़ियाँ डाइट में बेहतर विकल्प हैं।
डॉक्टर के मुताबिक़, बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से डाइट में शुगर, नमक, फैट और दूसरे घटकों की मात्रा बढ़ सकती है। उनका कहना है कि लंबे समय तक ऐसी डाइट से इंसुलिन रेज़िस्टेंस, मोटापा और मेटाबॉलिक से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने बच्चों के खान-पान को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। ज़्यादा मीठे, तले और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में बढ़ते मोटापे और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ सकता है।
डॉक्टर ने सबसे ज़्यादा ज़ोर फ़ूड लेबल देखने पर दिया। उनका कहना है कि केवल सुंदर पैकेट देखकर कोई प्रोडक्ट नहीं खरीदना चाहिए। सबसे पहले देखें कि उसमें कौन-कौन से इंग्रीडिएंट्स हैं और उनकी मात्रा कितनी है। लेबल पर प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, कार्बोहाइड्रेट, एडेड शुगर, फैट और नमक जैसी चीज़ों की जानकारी देखें। अगर शुगर या नमक इंग्रीडिएंट लिस्ट में ऊपर है, तो इसका मतलब है कि उसकी मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसलिए अगली बार पनीर, सोया चाप, चीज़, मिठाई या कोई पैकेज्ड फूड खरीदें तो सिर्फ़ स्वाद और पैकेजिंग पर भरोसा न करें। लेबल पढ़ें, उसमें इस्तेमाल सामग्री समझें और प्रोसेस्ड फूड को अपनी डाइट में नियमित आदत बनाने से बचें।
डॉ. प्रोफ़ेसर मृदुल मेहरोत्रा ने बताया कि किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदते समय सिर्फ़ उसकी शक्ल या पैकेट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। लेबल पर दी गई जानकारी पढ़ना और यह समझना ज़रूरी है कि उसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मिनरल्स और दूसरे एडिटिव्स कितनी मात्रा में हैं। डॉक्टर ने प्रोसेस्ड फूड, एनालॉग पनीर, सोया चाप और आर्टिफ़िशियल कलर को लेकर किन बातों का ध्यान रखने की सलाह दी, आइए जानते हैं।
डॉ. प्रोफ़ेसर मृदुल मेहरोत्रा
पहले समझिए प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड
क्या होता है एनालॉग पनीर?
डॉक्टर के मुताबिक़, ऐसे उत्पादों में प्रोटीन की मात्रा कम, फैट और स्टार्च की मात्रा अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि अगर किसी उत्पाद में इनकी मात्रा तय मानकों से ज़्यादा है, तो वह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए एनालॉग पनीर या ऐसे किसी भी प्रोडक्ट को खरीदते समय उसकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी देखना ज़रूरी है।
सोया चाप में भी सिर्फ़ नाम देखकर भरोसा न करें
रंगीन मिठाइयों, ड्रिंक्स और दूसरे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफ़िशियल कलर को लेकर भी डॉक्टर ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक़, इनका इस्तेमाल तय मात्रा में किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें नियमित रूप से और ज़्यादा मात्रा में लेना सही है। डॉक्टर ने सलाह दी कि आर्टिफ़िशियल कलर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कभी-कभार तक सीमित रखना बेहतर है। उनकी राय में प्राकृतिक रंगों वाले फल और सब्ज़ियाँ डाइट में बेहतर विकल्प हैं।