अनाज आपूर्ति पर संकट के संकेत! तीन साल के उच्च स्तर पर पहुँची फसलों की क़ीमतें, जानें दुनिया भर में क्यों बढ़ रही है खाद्य महँगाई
Umang | Jul 25, 2026, 10:59 IST
यूरोप में भीषण गर्मी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कृषि जिंसों की क़ीमतें तीन साल के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई हैं। ब्लूमबर्ग एग्रीकल्चर स्पॉट इंडेक्स लगातार सातवें सप्ताह बढ़ा है। रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते हमलों से गेहूँ की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जबकि यूरोप की गर्मी और अल नीनो की वापसी से मक्का, कॉफ़ी और कोको जैसी फसलों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो रोटी, खाद्य तेल, मांस और डेयरी उत्पादों सहित कई खाद्य वस्तुओं की क़ीमतों पर असर पड़ सकता है।
फसलों की क़ीमतें बढ़ीं
वैश्विक स्तर पर कृषि जिंसों की क़ीमतों में एक बार फिर तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है। यूरोप में भीषण गर्मी, रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते हमले और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अनाज की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर वैश्विक कृषि बाज़ार पर साफ़ दिखाई दे रहा है और फसलों की क़ीमतें तीन वर्षों के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई हैं। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है, तो रोटी, खाद्य तेल, मांस और डेयरी उत्पाद जैसे रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थ महँगे हो सकते हैं।
10 प्रमुख कृषि उत्पादों की क़ीमतों पर नज़र रखने वाला ब्लूमबर्ग एग्रीकल्चर स्पॉट इंडेक्स जुलाई 2023 के बाद अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। यह लगातार सातवें सप्ताह बढ़त दर्ज कर रहा है। इससे पहले मई में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण उर्वरक और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने से क़ीमतों में उछाल आया था। बाद में स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन अब युद्ध और मौसम से जुड़े नए जोखिमों ने कृषि जिंसों की क़ीमतों को फिर ऊपर पहुँचा दिया है।
रूस और यूक्रेन के बीच एक-दूसरे के निर्यात गलियारों पर हमले तेज़ हो गए हैं। इससे ऐसे समय में गेहूँ की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जब दोनों देशों में फसल की कटाई जारी है। शिकागो गेहूँ वायदा बाज़ार में क़ीमतें दो वर्ष के उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूँ निर्यात का एक-चौथाई से अधिक हिस्सा रखते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर पड़ सकता है।
रूस की ओर से ओडेसा बंदरगाह पर हमले जारी हैं, जबकि रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर रात के समय जहाज़ों की आवाजाही पर अनौपचारिक रोक लगा दी गई है। वहीं, यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच कुछ बंदरगाहों पर जहाज़ों के लंगर डालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
यूरोप में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी भी फसलों के उत्पादन के लिए चुनौती बन गई है। विशेष रूप से मक्का की फसल पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यूरोपीय संघ के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देश फ़्रांस में मई के अंत से अब तक तीन बार लू जैसी परिस्थितियाँ बन चुकी हैं, जिससे फसलों के विकास पर दबाव बढ़ा है।
इसके साथ ही अल नीनो मौसमीय प्रभाव की वापसी ने भी कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम अफ़्रीका जैसे प्रमुख कोको उत्पादक क्षेत्रों में गर्म और शुष्क मौसम की आशंका के बीच कॉफ़ी और कोको की क़ीमतों में भी जुलाई के दौरान तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की क़ीमतें भी हाल के सप्ताहों के उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं। इससे जैव ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले मक्का और वनस्पति तेल की माँग बढ़ी है। शिकागो में सोयाबीन वायदा क़ीमतें दो साल के उच्च स्तर पर पहुँच गई हैं, जबकि कुआलालंपुर में पाम ऑयल वायदा में भी 2.1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। हाल के दिनों में पाम ऑयल की क़ीमत गैस ऑयल की तुलना में कम होने से ईंधन उत्पादन में इसकी माँग बढ़ी है।
यदि कृषि जिंसों की क़ीमतों में यह बढ़त बनी रहती है, तो इसका असर पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इससे रोटी, खाद्य तेल, मांस और डेयरी उत्पादों जैसी आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। हालाँकि, हाल के वर्षों में अच्छी पैदावार के कारण वैश्विक स्तर पर अनाज का भंडार अपेक्षाकृत पर्याप्त बना हुआ है, लेकिन युद्ध, मौसम संबंधी चुनौतियाँ और आपूर्ति में संभावित व्यवधान आने वाले समय में कृषि जिंसों के बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
10 प्रमुख कृषि उत्पादों की क़ीमतों पर नज़र रखने वाला ब्लूमबर्ग एग्रीकल्चर स्पॉट इंडेक्स जुलाई 2023 के बाद अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। यह लगातार सातवें सप्ताह बढ़त दर्ज कर रहा है। इससे पहले मई में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण उर्वरक और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने से क़ीमतों में उछाल आया था। बाद में स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन अब युद्ध और मौसम से जुड़े नए जोखिमों ने कृषि जिंसों की क़ीमतों को फिर ऊपर पहुँचा दिया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष से गेहूँ की आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
रूस की ओर से ओडेसा बंदरगाह पर हमले जारी हैं, जबकि रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर रात के समय जहाज़ों की आवाजाही पर अनौपचारिक रोक लगा दी गई है। वहीं, यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच कुछ बंदरगाहों पर जहाज़ों के लंगर डालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
यूरोप की भीषण गर्मी और अल नीनो से बढ़ी फसलों की चिंता
इसके साथ ही अल नीनो मौसमीय प्रभाव की वापसी ने भी कृषि उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम अफ़्रीका जैसे प्रमुख कोको उत्पादक क्षेत्रों में गर्म और शुष्क मौसम की आशंका के बीच कॉफ़ी और कोको की क़ीमतों में भी जुलाई के दौरान तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।