फूड पैकेजिंग में रीसायकिल प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल, क्या सेहत के लिए बन सकता है खतरा? सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
Preeti Nahar | May 19, 2026, 19:21 IST
FAO (Food and Agriculture Organization of United Nation)की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पैकेजिंग में उपयोग किए जा रहे रीसायकिल प्लास्टिक में जहरीले रसायन, भारी धातुएं और माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे भोजन में मिलकर स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बायो-प्लास्टिक को पूरी तरह सुरक्षित मानना गलत होगा, क्योंकि उनमें भी कई जोखिम हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने खाद्य पैकेजिंग के लिए वैश्विक सुरक्षा मानक बनाने और रीसायकिल प्लास्टिक की सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है।
खाद्य पैकेजिंग में रीसायकल प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल सेहत के लिए खतरनाक
दुनियाभर में प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए रीसायकिल प्लास्टिक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अब यही कोशिश स्वास्थ्य के लिए नई चिंता बनती दिख रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खाद्य पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला रीसायकिल प्लास्टिक कई हानिकारक रसायनों और माइक्रोप्लास्टिक का स्रोत बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसकी प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच सख्ती से नहीं हुई, तो यह खाने के जरिए इंसानी शरीर तक खतरनाक तत्व पहुंचा सकता है।
FAO की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले रीसायकिल प्लास्टिक में कई तरह के रसायन और प्रदूषक मौजूद हो सकते हैं। प्लास्टिक निर्माण के दौरान उपयोग किए जाने वाले रंग, कोटिंग, प्लास्टिसाइज़र और अन्य रासायनिक पदार्थ रीसायकिल प्रक्रिया के बाद भी सामग्री में बने रह सकते हैं। इसके अलावा गलत तरीके से छंटाई या प्रोसेसिंग होने पर बाहरी प्रदूषण भी प्लास्टिक में मिल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में रीसायकिल प्लास्टिक में धातुओं, फ्लेम रिटार्डेंट्स, फ्थैलेट्स और अन्य जहरीले तत्वों की मात्रा नए प्लास्टिक की तुलना में अधिक पाई गई है। ऐसे रसायन धीरे-धीरे भोजन में मिल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
रिपोर्ट में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक को लेकर भी चिंता जताई गई है। वैज्ञानिकों को मानव रक्त, फेफड़ों, प्लेसेंटा और स्तन दूध तक में प्लास्टिक के बेहद छोटे कण मिले हैं। हालांकि इनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे गंभीर चिंता का विषय मान रहे हैं। FAO का कहना है कि प्लास्टिक रीसायकिलिंग की कुछ प्रक्रियाएं खुद भी माइक्रोप्लास्टिक पैदा कर सकती हैं, जो बाद में खाद्य श्रृंखला में पहुंच सकते हैं।
पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर बायो-प्लास्टिक और पौधों से बने पैकेजिंग मटेरियल का उपयोग बढ़ रहा है। लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि “बायो-बेस्ड” होने का मतलब हमेशा सुरक्षित या पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होना नहीं होता। कुछ पैकेजिंग सामग्री में कीटनाशक अवशेष, भारी धातुएं या एलर्जी पैदा करने वाले तत्व मौजूद हो सकते हैं। कई नए पदार्थों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर अभी पर्याप्त रिसर्च भी नहीं हुई है।
FAO ने कहा है कि अलग-अलग देशों में खाद्य पैकेजिंग और रीसायकिल प्लास्टिक को लेकर नियम अलग-अलग हैं, जिससे सुरक्षा मानकों में असमानता पैदा होती है। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर एक समान और वैज्ञानिक नियम लागू करने की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रीसायकिल प्लास्टिक का उपयोग करना है, तो उसकी सफाई, परीक्षण और गुणवत्ता जांच बेहद सख्त होनी चाहिए। सही तरीके से प्रोसेस किए गए रीसायकिल प्लास्टिक को सुरक्षित बनाया जा सकता है, लेकिन बिना निगरानी के इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।
दुनिया प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या से जूझ रही है और रीसायकिलिंग को इसका बड़ा समाधान माना जा रहा है। लेकिन FAO ने साफ कहा है कि पर्यावरण बचाने की कोशिश में खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में आगे बढ़ते समय यह सुनिश्चित करना सबसे जरूरी होगा कि खाने के संपर्क में आने वाली सामग्री पूरी तरह सुरक्षित हो।
रीसायकिल प्लास्टिक में छिपे हो सकते हैं हानिकारक रसायन
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में रीसायकिल प्लास्टिक में धातुओं, फ्लेम रिटार्डेंट्स, फ्थैलेट्स और अन्य जहरीले तत्वों की मात्रा नए प्लास्टिक की तुलना में अधिक पाई गई है। ऐसे रसायन धीरे-धीरे भोजन में मिल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।