भारत का चावल विदेशों में क्यों हो रहा है महंगा? जानिए सरकार के फैसले और मानसून का पूरा गणित

Gaon Connection | Jul 17, 2026, 13:51 IST
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भारत से चावल के निर्यात की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चावल का रिज़र्व मूल्य बढ़ाना और कमज़ोर मानसून के कारण धान की बुआई में आई गिरावट है। वहीं, बांग्लादेश में बाढ़ से फसल प्रभावित हुई है, जबकि थाईलैंड और वियतनाम में मांग सुस्त बनी हुई है। कारोबारियों को अल नीनो के संभावित असर से इस वर्ष के अंत में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

भारत के चावल की कीमतों में उछाल
भारत के चावल की कीमतों में उछाल
भारत से चावल के निर्यात की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह केंद्र सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत बेचे जाने वाले चावल का रिज़र्व मूल्य बढ़ाना और देश में कमज़ोर मानसून के कारण धान की बुआई प्रभावित होने की आशंका है। बिजनेस लाइन के अनुसार, बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस फ़ैसले से खुले बाज़ार में चावल की कीमतों को सीधा समर्थन मिला है, जबकि बारिश की कमी के चलते आगामी उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

दूसरी ओर, दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी चावल का बाज़ार दबाव में है। बांग्लादेश में बाढ़ से हज़ारों हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, वहीं थाईलैंड और वियतनाम में मांग कमज़ोर रहने से कारोबार सुस्त बना हुआ है। हालांकि, सूखे मौसम की फसल (ड्राई सीज़न हार्वेस्ट) बाज़ार में आने लगी है, जिससे आपूर्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके बावजूद कारोबारी इस वर्ष के अंत में अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को लेकर सतर्क हैं।

भारत में क्यों बढ़ीं चावल की कीमतें? बुआई घटी, सरकार ने बढ़ाया रिज़र्व मूल्य

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 5 प्रतिशत टूटे हुए उसना (Parboiled) चावल की निर्यात कीमत सप्ताह के दौरान बढ़कर 352 से 357 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि पिछले सप्ताह यह 348 से 352 डॉलर प्रति टन थी। वहीं, भारत के 5 प्रतिशत टूटे हुए सफ़ेद चावल की कीमत 353 से 357 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई। कोलकाता के एक व्यापारी ने बताया कि बाज़ार को उम्मीद थी कि सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चावल का रिज़र्व मूल्य कम करेगी, लेकिन इसके उलट रिज़र्व मूल्य बढ़ा दिया गया। इस फ़ैसले का सीधा असर खुले बाज़ार की कीमतों पर पड़ा और निर्यात दरों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।

इस बीच, देश में धान की बुआई भी पिछले वर्ष की तुलना में धीमी रही है। 10 जुलाई तक किसानों ने ग्रीष्मकालीन (खरीफ़) धान की बुआई 1.15 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आँकड़ा 1.26 करोड़ हेक्टेयर था। कमज़ोर मानसून के कारण बुआई में आई इस गिरावट ने उत्पादन को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं।

बांग्लादेश में बाढ़ से फसल को नुकसान, थाईलैंड-वियतनाम में मांग सुस्त

बांग्लादेश में आई बाढ़ ने 12 ज़िलों में कम से कम 28,610 हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रभावित किया है। सबसे अधिक नुकसान धान की फसल और धान की नर्सरी (सीडबेड) को हुआ है। कृषि विस्तार विभाग (Department of Agricultural Extension) के एक अधिकारी ने कहा कि अभी नुकसान का आकलन प्रारंभिक है और बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही फसल क्षति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

उधर, थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल की कीमत घटकर 445 से 450 डॉलर प्रति टन रह गई, जबकि पिछले सप्ताह यह लगभग 450 डॉलर प्रति टन थी। बैंकॉक के एक व्यापारी ने बताया कि खरीदार केवल ज़रूरी खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, फ़िलीपींस द्वारा थाईलैंड के 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल के आयात पर अस्थायी रोक लगाए जाने से भी मांग पर दबाव बना हुआ है।

वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल की कीमत 445 से 450 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर स्थिर बनी रही, जिसमें पिछले सप्ताह की तुलना में कोई बदलाव नहीं हुआ। हो ची मिन्ह सिटी के एक व्यापारी ने बताया कि खरीदार नई फसल की अधिक आपूर्ति का इंतज़ार कर रहे हैं, इसलिए कारोबार धीमा है।

वहीं, किसानों का कहना है कि ग्रीष्म से शरद (समर-टू-ऑटम) सीज़न की धान कटाई इस महीने के अंत से शुरू होकर अगस्त तक अपने चरम पर पहुँच जाएगी। दूसरी ओर, सूखे मौसम की फसल धीरे-धीरे बाज़ार में आने लगी है, जिससे आपूर्ति बढ़ रही है। इसके बावजूद कारोबारी इस वर्ष के अंत में अल नीनो के संभावित प्रभाव से उत्पादन पर पड़ने वाले असर को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
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