इलायची कारोबार पर बढ़ा संकट! बढ़ती क़ीमतों ने बिगाड़ा निर्यात का गणित, बड़े ऑर्डर देने से बच रहे विदेशी ख़रीदार
Gaon Connection | Aug 03, 2026, 13:18 IST
घरेलू बाज़ार में इलायची की बढ़ती क़ीमतों के कारण भारत के इलायची निर्यात की रफ़्तार धीमी पड़ गई है। विदेशी आयातक बड़े ऑर्डर देने के बजाय सीमित मात्रा में ख़रीदारी कर रहे हैं और नई फ़सल व मानसून की स्थिति का इंतज़ार कर रहे हैं। कमज़ोर मानसून से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे इस सीज़न में उत्पादन घट सकता है और निकट भविष्य में क़ीमतें मज़बूत बनी रह सकती हैं।
इलायची के बढ़ते दाम से निर्यात पर ब्रेक
देश में इलायची की बढ़ती क़ीमतों का असर अब इसके निर्यात पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है। घरेलू बाज़ार में दाम तेज़ होने के कारण विदेशी आयातक बड़ी मात्रा में ख़रीदारी करने से बच रहे हैं। वे फ़िलहाल छोटे-छोटे ऑर्डर दे रहे हैं और आगामी फ़सल तथा मानसून की स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। इससे निर्यात माँग में सुस्ती का माहौल बना हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय हरी इलायची की माँग लंबे समय से मज़बूत बनी हुई है।
आयातक यह आकलन करना चाहते हैं कि आने वाले दिनों में बेहतर वर्षा से उत्पादन में कितना सुधार होगा और क्या इससे क़ीमतों में कुछ नरमी आएगी। इसी वजह से बड़े ऑर्डर देने के बजाय वे सीमित मात्रा में ख़रीदारी कर रहे हैं। घरेलू बाज़ार में भी ऊँची क़ीमतों के कारण थोक ख़रीद प्रभावित हुई है और खुदरा उपभोक्ता भी अब छोटे पैक की ओर रुख़ कर रहे हैं।
वर्तमान में इलायची की औसत बाज़ार क़ीमत 3,000 से 3,300 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई है, जबकि पहले यह 2,700 से 2,900 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में थी। दाम बढ़ने के कारण विदेशी बाज़ारों से नए निर्यात ऑर्डरों में कमी आई है। आयातक तब तक बड़े सौदे करने से बच रहे हैं, जब तक नई फ़सल और बाज़ार की दिशा स्पष्ट नहीं हो जाती।
नई फ़सल की तुड़ाई शुरू हो चुकी है, लेकिन जून और जुलाई में कमज़ोर मानसून ने उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित किया है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से इलायची के पौधों पर दाने झड़ने और फल बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ा है। मौजूदा समय में उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है। हालाँकि पिछले दो दिनों में अच्छी बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन अगस्त के मध्य से फिर शुष्क मौसम और अधिक तापमान की आशंका बनी हुई है।
मिट्टी में लगने वाले कीटों, विशेषकर रूट ग्रब और नेमाटोड, की समस्या भी इलायची की फ़सल को नुकसान पहुँचा रही है। अब चालू सीज़न में उत्पादन लगभग 33 हज़ार टन रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह 40 हज़ार टन आँका गया था। पिछले सीज़न में कुल उत्पादन 37,733 टन रहा था।
अगस्त में देश के विभिन्न हिस्सों से माँग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन उत्पादन में गिरावट और मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण बाज़ार में क़ीमतें निकट भविष्य में मज़बूत बनी रह सकती हैं। हालाँकि ग्वाटेमाला में इलायची का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है, फिर भी वैश्विक बाज़ार में कुल आपूर्ति माँग से कम रहने की संभावना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क़ीमतों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
आयातक यह आकलन करना चाहते हैं कि आने वाले दिनों में बेहतर वर्षा से उत्पादन में कितना सुधार होगा और क्या इससे क़ीमतों में कुछ नरमी आएगी। इसी वजह से बड़े ऑर्डर देने के बजाय वे सीमित मात्रा में ख़रीदारी कर रहे हैं। घरेलू बाज़ार में भी ऊँची क़ीमतों के कारण थोक ख़रीद प्रभावित हुई है और खुदरा उपभोक्ता भी अब छोटे पैक की ओर रुख़ कर रहे हैं।