Digital Payment: ग्रामीण महिलाओं का बढ़ता डिजिटल भुगतान, संभाल रही हैं घर की बचत, बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं तक बढ़ी पहुँच
Gaon Connection | Mar 06, 2026, 10:34 IST
भारत की ग्रामीण महिलाएं अब डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में काफी सक्रिय हो गई हैं। यूपीआई के माध्यम से वे न केवल लेन-देन कर रही हैं, बल्कि नए निवेश विकल्पों की ओर भी कदम बढ़ा रही हैं। बैंक खाते को खुद से संभालना हो या फिर घर के लिए जरूरी बचत हो, अधिकतर वित्तिय फैसलें महिलाएँ खुद से कर रही हैं।
वीमेन फाइनेंशियल इंडेक्स 2026 सर्वे
भारत में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच तेजी से बढ़ी है। गांवों और छोटे शहरों में भी महिलाएँ अब UPI से भुगतान कर रही हैं, बैंक खाते चला रही हैं और घर की बचत संभाल रही हैं। वीमेन फाइनेंशियल इंडेक्स 2026 सर्वे के अनुसार, भारत के ग्रामीण और कस्बों में 38% महिलाएँ हर हफ्ते कम से कम एक बार यूपीआई का इस्तेमाल कर रही हैं, जो डिजिटल भुगतान को अपनाने में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
यह सर्वे लगभग 10,000 महिला एजेंटों से मिली जानकारी पर आधारित है, जो ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाएं पहुंचाती हैं। इन महिला एजेंटों को डिजिटल दीदी के नाम से भी जाना जाता है। ये अपने समुदाय में बैंकिंग, स्वास्थ्य, बीमा, स्वच्छता और ऋण जैसी सेवाओं के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों तक इन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
सर्वे में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में करीब 85% महिलाएँ अपने घर की मुख्य बचतकर्ता हैं। यानी परिवार की आर्थिक व्यवस्था संभालने में महिलाओं की बड़ी भूमिका है। हालांकि, औपचारिक रूप से बैंक या वित्तीय संस्थानों में बचत करने वाली महिलाओं की संख्या अभी भी करीब 32% ही है।
महिलाएँ मुख्य रूप से बच्चों की पढ़ाई, बीमारी के समय की जरूरत और घरेलू सामान खरीदने के लिए पैसे बचाती हैं। वे छोटी-छोटी रकम अलग रखकर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखती हैं।
ग्रामीण महिलाएँ अब बचत के नए तरीकों को अपनाने के लिए भी तैयार हैं। करीब 98% महिलाओं ने ऐसी बचत योजनाओं में दिलचस्पी दिखाई है जिनमें छोटी रकम से निवेश किया जा सके और जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से निकाला जा सके। इस वजह से वे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) जैसे सुरक्षित विकल्पों को ज्यादा पसंद कर रही हैं।
सर्वे के अनुसार करीब 71% महिलाएं अब अपना बैंक खाता खुद ही संचालित करती हैं, जिनमें से अधिकतर की उम्र 18 से 40 साल के बीच है। यह महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और वित्तीय समझ को दर्शाता है। लेन-देन के मामले में करीब 78% महिलाएं महिला एजेंटों पर ज्यादा भरोसा करती हैं, क्योंकि उनके साथ वे ज्यादा सहज महसूस करती हैं।
निवेश के मामले में भी ग्रामीण महिलाओं की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। करीब 44% महिलाएं सोने से जुड़ी छोटी SIP योजनाओं में निवेश करने में रुचि दिखा रही हैं। इससे पता चलता है कि महिलाएं निवेश के बारे में सीखने के लिए तैयार हैं और सोने को एक सुरक्षित विकल्प मानती हैं। हालांकि, निवेश की जानकारी अभी सीमित है। सर्वे के मुताबिक करीब 98% महिलाएं FD और RD के बारे में जानती हैं, लेकिन केवल 10% महिलाओं को म्यूचुअल फंड के बारे में जानकारी है।
बीमा के मामले में अभी भी जागरूकता कम है और करीब 26% महिलाओं के पास ही स्वास्थ्य या जीवन बीमा है। वहीं कर्ज लेने के मामले में महिलाएं अब ज्यादा जागरूक हो रही हैं। लगभग 73% महिलाएं जरूरत पड़ने पर सरकारी या औपचारिक संस्थानों से लोन लेने के पक्ष में हैं, खासकर बच्चों की पढ़ाई, इलाज, खेती-बाड़ी, घर की मरम्मत या छोटे व्यवसाय के लिए।
भले ही डिजिटल लेन-देन बढ़ रहा है, लेकिन घरेलू खर्चों के लिए नकद का इस्तेमाल अभी भी जरूरी माना जाता है। सर्वे के अनुसार महिलाएं आमतौर पर 1,000 से 2,500 रुपये के बीच की राशि निकालती हैं। जैसे-जैसे महिलाएं बैंकिंग और डिजिटल साधनों के इस्तेमाल में सहज हो रही हैं, वैसे-वैसे वे बचत, निवेश और आर्थिक फैसलों में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने की ओर बढ़ रही हैं।
डिजिटल दीदी पहुँचा रही हैं सेवाएं
घर की मुख्य बचतकर्ता हैं महिलाएँ
Digital Payment के जरिए बचत
बच्चों की पढ़ाई और आपात जरूरतों के लिए बचत
एफडी और आरडी जैसे सुरक्षित विकल्प पसंद
बैंक खाते खुद संभाल रहीं महिलाएँ
UPI से बिल भर रही हैं महिलाएं