47 साल पुराना नर्मदा विवाद खत्म! चार राज्यों के बीच वन-टाइम सेटलमेंट; गुजरात को 550 करोड़ रुपये देगा राजस्थान

Umang | Jul 08, 2026, 14:55 IST
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सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ा करीब 47 साल पुराना भुगतान विवाद समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत राजस्थान गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये देगा। इससे लंबित वित्तीय दावों का निपटारा होगा और नर्मदा जल के बेहतर उपयोग, पेयजल, सिंचाई तथा पश्चिमी राजस्थान के जल प्रबंधन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अमित शाह की मौजूदगी में एमपी, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच हुआ समझौता
अमित शाह की मौजूदगी में एमपी, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच हुआ समझौता
सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ा करीब 47 साल पुराना भुगतान विवाद आखिरकार सुलझ गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने लंबित भुगतान के निपटारे के लिए वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ नर्मदा अवार्ड के तहत वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का रास्ता साफ हो गया है। नई दिल्ली में हुई बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

यह विवाद वर्ष 1979 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड के बाद शुरू हुआ था। न्यायाधिकरण ने नर्मदा नदी के जल बँटवारे के साथ-साथ सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य खर्चों में राज्यों की हिस्सेदारी भी तय की थी। समय के साथ परियोजना की लागत बढ़ती गई और भुगतान को लेकर राज्यों के बीच मतभेद गहराते गए। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान ने एक-दूसरे पर हज़ारों करोड़ रुपये के दावे किए, जिससे मामला दशकों तक लंबित रहा। अब वन-टाइम सेटलमेंट के ज़रिये इन दावों का अंतिम निपटारा कर लिया गया है।

गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये देगा राजस्थान, वर्षों पुराने दावों का हुआ निपटारा

समझौते के तहत राजस्थान सरदार सरोवर परियोजना में अपनी लागत हिस्सेदारी के एवज़ में गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। जानकारी के मुताबिक, गुजरात ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान पर कुल 7,974.86 करोड़ रुपये का दावा किया था, जिसमें राजस्थान की देनदारी करीब 574.52 करोड़ रुपये बताई गई थी। दूसरी ओर मध्य प्रदेश ने गुजरात पर लगभग 7,669 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र ने करीब 3,000 करोड़ रुपये के दावे किए थे। लंबी बातचीत और आपसी सहमति के बाद सभी राज्यों ने अपने-अपने दावों का वन-टाइम सेटलमेंट के माध्यम से निपटारा कर लिया।

यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत साझा करने और लंबित देयों के अंतिम भुगतान से जुड़े विवाद को समाप्त करने के लिए किया गया है। इसके साथ ही चारों राज्यों के बीच वर्षों से चली आ रही वित्तीय अनिश्चितता भी खत्म हो गई है। सरकार का मानना है कि इससे नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का रास्ता भी साफ होगा।


अमित शाह बोले- संवाद से सुलझे विवाद, किसानों और जल प्रबंधन को होगा फायदा

समझौते के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा अवार्ड के लंबित भुगतान का विवाद लंबे समय से चला आ रहा था, जिसका अब समाधान निकल गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मज़बूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

अमित शाह ने कहा कि कई राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने से राज्यों के बीच आपसी समझ बढ़ी है और राजनीतिक मतभेद कम हुए हैं, जिससे वर्षों पुराने विवाद तेज़ी से सुलझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को बड़ा लाभ मिला है। बाँध पूरा होने के बाद इन राज्यों में पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में नर्मदा का पानी पहुँचने से किसानों की आय बढ़ी है, खेती को मज़बूती मिली है और जिन इलाक़ों तक यह पानी पहुँचा है, वहाँ ज़मीन का मूल्य भी बढ़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के नेतृत्व में देशभर में जल बँटवारे और जल विवादों को चरणबद्ध तरीके से सुलझाया जा रहा है। हाल ही में हरियाणा और राजस्थान के बीच जल विवाद का समाधान हुआ था। इसके अलावा किशाऊ बाँध परियोजना और अब नर्मदा समझौता भी सहकारी संघवाद के उदाहरण हैं। उनका कहना था कि पानी चाहे देश के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल हो, उसका लाभ अंततः देश के लोगों और विशेष रूप से किसानों को ही मिलता है। इसलिए राज्यों के बीच विवादों से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रखते हुए उनका समाधान समय पर होना ज़रूरी है।

जालोर-बाड़मेर को मिल सकता है लाभ, अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण की तैयारी

समझौते के बाद राजस्थान सरकार का कहना है कि इससे नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार के अनुसार, वर्ष 1979 के अवार्ड के क्लॉज IV(5) के तहत मानसून के दौरान उपलब्ध अधिशेष नर्मदा जल का उपयोग संबंधित राज्य अपने क्षेत्र में कर सकता है और यह पानी उसके निर्धारित हिस्से में नहीं जोड़ा जाएगा।

इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण की योजना की घोषणा की है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे जालोर, बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों में भविष्य में पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते को सहकारी संघवाद की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि हाल के यमुना जल समझौते और एमपीकेसी परियोजना के बाद यह जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता प्रदेश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा, सिंचाई और आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
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