आम की फसल बर्बाद होने से बचाएं! कीट लगते ही करें ये स्प्रे, कृषि विभाग ने बताई सही दवा और मात्रा
Gaon Connection | Apr 06, 2026, 11:40 IST
बिहार कृषि विभाग ने आम की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। मंजर के समय तीन चरणों में छिड़काव करने और तय मात्रा में दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। सही समय पर इमिडाक्लोप्रिड, सल्फर और अन्य दवाओं का प्रयोग करने से फसल सुरक्षित रह सकती है और उत्पादन बेहतर होगा।
आम की फसल
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने आम उत्पादक किसानों को आगाह करते हुए कहा है कि मंजर आने के समय फसल पर कीट और रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। विभाग के अनुसार, “मंजरों पर मधुआ कीट, दहिया कीट और पाउडरी मिल्ड्यू व एन्थ्रेक्नोज जैसे रोगों का प्रकोप अधिक होता है, इसलिए समय पर नियंत्रण जरूरी है।” विभाग ने किसानों को तीन चरणों में छिड़काव करने की सलाह दी है, ताकि फसल को सुरक्षित रखा जा सके और उत्पादन प्रभावित न हो।
कृषि विभाग के मुताबिक, “पहला छिड़काव मंजर आने से पहले पूरे पेड़ पर करना चाहिए।” इसके बाद दूसरा छिड़काव तब करें जब मंजर में दाने बनने लगें और तीसरा छिड़काव तब किया जाए जब टिकोले मटर के आकार के हो जाएं। विभाग का कहना है कि इन तीन चरणों में नियमित छिड़काव करने से कीट और रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
बिहार कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि “कीटनाशी और फफूंदनाशी दवाओं का उपयोग निर्धारित मात्रा में ही करें।” विभाग के अनुसार इमिडाक्लोप्रिड, डायमिथोएट, थायोमेथोक्साम जैसे कीटनाशकों और सल्फर, कॉपर ऑक्सी क्लोराइड, कार्बेन्डाजिम व हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों का प्रयोग लाभकारी होता है। सही मात्रा और समय पर इनका उपयोग करने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
बिहार कृषि विभाग के अनुसार, “इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी, डायमिथोएट 30% ईसी 1 मिली प्रति 1 लीटर पानी और थायोमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।”
वहीं फफूंदनाशी के लिए विभाग ने कहा है, “सल्फर 80% डब्ल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी, कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 50% डब्ल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी, कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी और हेक्साकोनाजोल 5% एससी 2 मिली प्रति लीटर पानी का उपयोग करें।”
इसके अलावा, “अल्फा नेफ्थाइल एसेटिक एसिड 4.5% एसएल 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।”
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि “कीटनाशी घोल तैयार करते समय स्टिकर का उपयोग अवश्य करें, ताकि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक सके।” साथ ही, अगर छिड़काव के बाद बारिश हो जाए तो दोबारा छिड़काव करना जरूरी है। किसानों को यह भी कहा गया है कि वे अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारियों से संपर्क करें।
तीन चरणों में करें छिड़काव
#आम के कीट/व्याधि से सुरक्षा के उपाय।@ramkripalmp @AgriGoI @HorticultureBih @BametiBihar @IPRDBihar pic.twitter.com/vZ0cIq8t4R
— Agriculture Department, Govt. of Bihar (@Agribih) April 5, 2026
दवाओं का सही उपयोग जरूरी
आम के मंजर
बिहार कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि “कीटनाशी और फफूंदनाशी दवाओं का उपयोग निर्धारित मात्रा में ही करें।” विभाग के अनुसार इमिडाक्लोप्रिड, डायमिथोएट, थायोमेथोक्साम जैसे कीटनाशकों और सल्फर, कॉपर ऑक्सी क्लोराइड, कार्बेन्डाजिम व हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों का प्रयोग लाभकारी होता है। सही मात्रा और समय पर इनका उपयोग करने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
बिहार कृषि विभाग के अनुसार, “इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी, डायमिथोएट 30% ईसी 1 मिली प्रति 1 लीटर पानी और थायोमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।”
वहीं फफूंदनाशी के लिए विभाग ने कहा है, “सल्फर 80% डब्ल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी, कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 50% डब्ल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी, कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी और हेक्साकोनाजोल 5% एससी 2 मिली प्रति लीटर पानी का उपयोग करें।”
इसके अलावा, “अल्फा नेफ्थाइल एसेटिक एसिड 4.5% एसएल 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।”
| 🔹 दवा का नाम | 📌 मात्रा |
|---|---|
| इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL | 1 मिली / 3 लीटर पानी |
| डायमिथोएट 30% EC | 1 मिली / 1 लीटर पानी |
| थायोमेथोक्साम 25% WG | 1 ग्राम / 10 लीटर पानी |
| सल्फर 80% WP | 3 ग्राम / 1 लीटर पानी |
| कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 50% WP | 3 ग्राम / 1 लीटर पानी |
| कार्बेन्डाजिम 50% WP | 1 ग्राम / 1 लीटर पानी |
| हेक्साकोनाजोल 5% SC | 2 मिली / 1 लीटर पानी |
| अल्फा नेफ्थाइल एसेटिक एसिड 4.5% SL | 4 मिली / 10 लीटर पानी |