CAG REPORT: ऑटो, एंबुलेंस और लग्ज़री कैब से ढोया गया धान! CAG रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की खरीद व्यवस्था पर गंभीर सवाल
Mansi | Aug 07, 2026, 14:42 IST
पश्चिम बंगाल की सरकारी धान खरीद में समाचारों के अनुसार गंभीर अनियमितताएंँ उजागर हुई हैं। जाँच रिपोर्ट में बताया गया कि एंबुलेंस और यात्री वाहनों का इस्तेमाल धान के परिवहन के लिए किया गया। इसके अलावा, एक ही नाम पर बार-बार खरीददारी के मामले भी देखे गए हैं। ये सभी विसंगतियांँ खरीद प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े कर रही हैं।
CAG रिपोर्ट में धान खरीद के रिकॉर्ड में संदिग्ध वाहन और दोहराई गई प्रविष्टियाँ सामने आने से सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं
पश्चिम बंगाल में सरकारी धान खरीद व्यवस्था को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच धान खरीद की जाँच में ऐसे मामलों का पता चला, जिनमें रिकॉर्ड के अनुसार धान का परिवहन एंबुलेंस, यात्री ऑटो, बस और लग्जरी कैब जैसे वाहनों से दिखाया गया। इसके अलावा, कई जगहों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर बार-बार खरीद दर्ज होने और संदिग्ध प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मामलों से सरकारी खरीद प्रक्रिया की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, संबंधित एजेंसियों ने इनमें से कुछ मामलों को डेटा एंट्री में हुई त्रुटियों से जोड़कर भी देखा है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, CAG की जाँच में सामने आया कि 2020-21 खरीफ़ विपणन सत्र के दौरान 4,211.89 क्विंटल धान ऐसे 19 वाहनों से परिवहन होता दिखाया गया, जिनका माल ढुलाई के लिए पंजीकरण नहीं था या जिनका पंजीकरण सत्यापित नहीं हो सका। रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 6 यात्री तीन-पहिया वाहनों से 1,159.03 क्विंटल धान की ढुलाई दिखाई गई।
एक बस और एक लग्जरी कैब से 138.39 क्विंटल धान परिवहन दर्शाया गया। 9 अन्य वाहनों के पंजीकरण विवरण भी सरकारी पोर्टल पर सत्यापित नहीं किए जा सके, जबकि उनसे 1,149.86 क्विंटल धान ढुलाई दर्ज थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि हुगली जिले के एक केंद्रीय खरीद केंद्र में 2018-19 के दौरान सरकारी दिशा-निर्देशों के विपरीत एक ही व्यक्ति के नाम पर बार-बार खरीद दर्ज की गई। CAG के अनुसार, 10 व्यक्तियों के नाम पर 59 दोहराई गई प्रविष्टियों के जरिए 2,568.13 क्विंटल धान खरीदा गया, जिसकी कीमत लगभग 44.94 लाख रुपये थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सहायक जिला नियंत्रक (खाद्य एवं आपूर्ति), आरामबाग की जांच में पाया गया कि जिन 10 व्यक्तियों के नाम पर खरीद दर्ज हुई, उनमें दो राइस मिलों के मालिक, उनके परिजन और सहयोगी शामिल थे। इनमें कुछ लोग अन्य ब्लॉकों और जिलों से भी जुड़े थे। आगे की जांच में 21 अन्य व्यक्तियों के नाम पर 97 अतिरिक्त प्रविष्टियां मिलीं, जिनके माध्यम से 3,893.71 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कई लोगों ने केवल अपने बैंक खाते और दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, जबकि उन्होंने स्वयं धान की बिक्री नहीं की थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित एजेंसी बेनफेड (BENFED) ने कुछ विसंगतियों को ऑनलाइन खरीद पोर्टल पर वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करते समय हुई अनजानी त्रुटियों का परिणाम बताया है। हालांकि, CAG ने इन मामलों को रिकॉर्ड और खरीद प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता से जोड़ते हुए चिन्हित किया है।
धान खरीद व्यवस्था किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बिक्री का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में खरीद रिकॉर्ड में अनियमितताएँ सामने आने से पारदर्शिता, भुगतान प्रक्रिया और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। रिपोर्ट इस बात की आवश्यकता भी रेखांकित करती है कि खरीद प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड का बेहतर सत्यापन, वाहन पंजीकरण की जांच और लाभार्थियों का प्रमाणीकरण मजबूत किया जाए, ताकि वास्तविक किसानों तक योजना का लाभ बिना किसी गड़बड़ी के पहुँच सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मामलों से सरकारी खरीद प्रक्रिया की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, संबंधित एजेंसियों ने इनमें से कुछ मामलों को डेटा एंट्री में हुई त्रुटियों से जोड़कर भी देखा है।