National Mission on Edible Oils: तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की बड़ी तैयारी, 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य, जानिए पूरी योजना

Mansi | Aug 04, 2026, 19:06 IST
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सरकार खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए तिलहन उत्पादन बढ़ा रही है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत किसानों को बेहतर बीज और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्लस्टर आधारित मॉडल से देशभर में उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। बीज उत्पादन और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पाम तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऑयल पाम मिशन भी लागू है।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार का बड़ा अभियान
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार का बड़ा अभियान
देश में खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (National Mission on Edible Oils-Oilseeds: NMEO-OS) के तहत कई कदम उठा रही है। सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को इस मिशन को मंज़ूरी दी थी। इसका लक्ष्य वर्ष 2022-23 के 39 मिलियन टन तिलहन उत्पादन को बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि मिशन के तहत किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक खेती की तकनीक, प्रशिक्षण और कटाई के बाद की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना और देश को आत्मनिर्भर बनाना है।

क्लस्टर आधारित मॉडल से बढ़ेगा उत्पादन

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन का क्रियान्वयन क्लस्टर आधारित मॉडल के ज़रिए किया जा रहा है। इसके तहत देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टरों की पहचान की गई है, जिनका संचालन किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियाँ और अन्य एजेंसियाँ कर रही हैं। इन क्लस्टरों में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक उत्पादन देने वाले बीज निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें उन्नत कृषि पद्धतियों, फसल प्रबंधन और आधुनिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मिशन के तहत कटाई के बाद की अवसंरचना, जैसे तेल मिलों की स्थापना और उन्नयन को भी सहायता दी जा रही है, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

बीज उत्पादन और भंडारण पर विशेष फ़ोकस

मिशन के तहत प्रजनक बीजों की खरीद पर 100 % सहायता दी जा रही है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र में बीज उत्पादन और भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नए सीड हब तथा विशेष बीज भंडारण इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। इससे भविष्य में तिलहन की उन्नत किस्में किसानों तक तेज़ी से पहुँच सकेंगी।

प्रदर्शन कार्यक्रमों के ज़रिए किसानों को प्रशिक्षण

किसानों तक नई तकनीक पहुँचाने के लिए मिशन के तहत Frontline Demonstration (FLD), Cluster Frontline Demonstration (CFLD) और Block Level Demonstration (BLD) आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई किस्मों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना है, जिनसे प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़े और खेती अधिक लाभकारी बन सके।

लक्ष्य से अधिक क्षेत्र में बाँटे गए मुफ़्त बीज

सरकार के अनुसार, तिलहन उत्पादन वर्ष 2023-24 के 39.67 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 (तीसरे अग्रिम अनुमान) में 43.06 मिलियन टन हो गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान मिशन के तहत वैल्यू चेन क्लस्टरों में 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मुफ़्त बीज वितरित किए गए, जबकि वार्षिक लक्ष्य 10 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा नई किस्मों के बीज उत्पादन के लिए 60 सीड हब तथा 50 विशेष बीज भंडारण इकाइयों को मंज़ूरी दी गई है।

खाद्य तेल आयात में पाम तेल की सबसे बड़ी हिस्सेदारी

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, भारत ने वर्ष 2024-25 में 160.72 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया। इनमें 75.17 लाख टन पाम तेल था, जो कुल खाद्य तेल आयात का 46.77 प्रतिशत है। इसी आयात निर्भरता को कम करने के लिए सरकार घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। सरकार ने अगस्त 2021 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (National Mission on Edible Oils-Oil Palm: NMEO-OP) शुरू किया था, जिसे 15 राज्यों में लागू किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे, अंतरवर्ती फसल, सिंचाई, कृषि यंत्र और चार वर्षीय शुरुआती अवधि के दौरान रखरखाव के लिए सहायता दी जाती है। पूर्वोत्तर राज्यों में ऑयल पाम प्रसंस्करण मिलों की स्थापना के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 2.73 लाख हेक्टेयर नया क्षेत्र ऑयल पाम की खेती के अंतर्गत लाया गया, जिससे कुल क्षेत्रफल बढ़कर 6.40 लाख हेक्टेयर हो गया। इस अवधि में 114.66 लाख टन फ़्रेश फ़्रूट बंच (FFB) का उत्पादन हुआ, जिससे 20.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल (CPO) प्राप्त हुआ। वर्तमान में देशभर में 27 ऑयल पाम प्रसंस्करण मिलें संचालित हैं। वहीं व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP) योजना के तहत गोवा, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, असम और मिज़ोरम के 9,244 ऑयल पाम किसानों को अब तक 18.90 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
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