कब बोना है बीज, कब करनी है सिंचाई? ये सिस्टम देगा बारिश का सटीक जवाब; पीलीभीत की 720 ग्राम पंचायतों में लगेंगे ऑटोमैटिक रेन गेज
Gaon Connection | Aug 12, 2026, 17:01 IST
पीलीभीत में अब हर गांव में बारिश का सटीक आंकड़ा पता चलेगा। ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशन से किसानों को खेती की योजना बनाने में मदद मिलेगी। यह डेटा फसल बीमा और अतिवृष्टि से हुए नुकसान के आकलन में भी उपयोगी होगा। भविष्य में मोबाइल एप और एसएमएस से किसानों को मौसम की जानकारी दी जाएगी। इससे कृषि लागत की बचत होगी और फसल को नुकसान कम होगा।
गाँव की बारिश का मिलेगा डिजिटल डेटा
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और बारिश के असमान वितरण का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। कहीं बारिश का इंतज़ार लंबा हो जाता है तो कहीं अचानक तेज़ बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा देती है। ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद अहम हो जाता है कि उनके गांव में वास्तव में कितनी बारिश हुई है। इसी जरूरत को देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने पीलीभीत में गांव स्तर पर बारिश का सटीक आंकड़ा जुटाने की पहल शुरू की है। जिले की सभी 720 ग्राम पंचायतों को ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) स्टेशन के नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। पहले चरण में 693 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, जिनमें 32 स्थानों पर स्टेशन स्थापित भी किए जा चुके हैं।
इन ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशनों के लगने के बाद बारिश की जानकारी के लिए बड़े क्षेत्र के औसत आंकड़ों पर निर्भरता कम होगी। सेंसर आधारित ये उपकरण बारिश शुरू होते ही वर्षा की मात्रा को अपने आप रिकॉर्ड करेंगे और डेटा डिजिटल माध्यम से सर्वर तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसी खास ग्राम पंचायत में कितनी बारिश हुई, इसका स्थानीय और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा। इसका फायदा केवल किसानों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि फसल बीमा, अतिवृष्टि से हुए नुकसान के आकलन, आपदा राहत और प्रशासनिक तैयारियों में भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आने वाले समय में मोबाइल एप और SMS के जरिए किसानों तक स्थानीय मौसम की जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने की भी योजना है।
ARG स्टेशन आधुनिक सेंसर से लैस होंगे, जो बारिश की मात्रा को स्वतः दर्ज करेंगे। इसके लिए किसी कर्मचारी को मौके पर मौजूद रहकर वर्षा मापने की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन से बारिश के साथ-साथ आर्द्रता, हवा की गति और अन्य मौसम संबंधी जानकारियां भी रिकॉर्ड की जा सकेंगी। अभी किसी बड़े इलाके के वर्षा आंकड़ों के आधार पर स्थानीय स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर स्टेशन लगने के बाद यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किसी विशेष गांव में कितनी बारिश हुई। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण मौसम की स्थानीय स्थिति का अधिक सटीक विश्लेषण भी किया जा सकेगा।
स्थानीय स्तर पर बारिश का सही आंकड़ा मिलने से किसानों को खेती की योजना बनाने में सुविधा होगी। बारिश के हिसाब से वे बुवाई का समय तय कर सकेंगे और जरूरत के मुताबिक सिंचाई की योजना बना पाएंगे। बारिश की संभावना होने पर अनावश्यक सिंचाई से बचा जा सकेगा, जबकि पर्याप्त बारिश नहीं होने पर समय रहते सिंचाई की व्यवस्था की जा सकेगी।
फसल में दवा या कीटनाशक के छिड़काव का समय तय करने में भी मौसम का स्थानीय डेटा उपयोगी हो सकता है। इससे पानी और कृषि लागत की बचत के साथ मौसम की वजह से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। कृषि विभाग के मुताबिक, स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध होने से किसानों को अधिक सटीक कृषि सलाह देना आसान होगा।
जिले की 720 ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। पहले चरण में 693 पंचायतों में स्टेशन लगाने का काम शुरू किया गया है और 32 स्थानों पर स्थापना पूरी हो चुकी है। पंचायतों में उपलब्ध जगह के अनुसार ये उपकरण पंचायत भवनों और परिषदीय विद्यालयों में लगाए जा रहे हैं।
सभी ग्राम पंचायतों के नेटवर्क से जुड़ने के बाद पीलीभीत में गांव स्तर पर मौसम की निगरानी का एक मजबूत तंत्र तैयार हो सकेगा। इससे मिलने वाले आंकड़े फसल बीमा के दावों, अतिवृष्टि से नुकसान के आकलन और आपदा राहत जैसे मामलों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। भविष्य में मोबाइल एप और SMS के जरिए स्थानीय मौसम की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित होने पर उन्हें अपने गांव के मौसम की स्थिति समय रहते जानने में और मदद मिलेगी।
इन ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशनों के लगने के बाद बारिश की जानकारी के लिए बड़े क्षेत्र के औसत आंकड़ों पर निर्भरता कम होगी। सेंसर आधारित ये उपकरण बारिश शुरू होते ही वर्षा की मात्रा को अपने आप रिकॉर्ड करेंगे और डेटा डिजिटल माध्यम से सर्वर तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसी खास ग्राम पंचायत में कितनी बारिश हुई, इसका स्थानीय और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा। इसका फायदा केवल किसानों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि फसल बीमा, अतिवृष्टि से हुए नुकसान के आकलन, आपदा राहत और प्रशासनिक तैयारियों में भी इस डेटा का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आने वाले समय में मोबाइल एप और SMS के जरिए किसानों तक स्थानीय मौसम की जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने की भी योजना है।
गांव में ही पता चलेगी कितनी बारिश हुई
किसानों को बुवाई और सिंचाई में मिलेगी मदद
फसल में दवा या कीटनाशक के छिड़काव का समय तय करने में भी मौसम का स्थानीय डेटा उपयोगी हो सकता है। इससे पानी और कृषि लागत की बचत के साथ मौसम की वजह से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। कृषि विभाग के मुताबिक, स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध होने से किसानों को अधिक सटीक कृषि सलाह देना आसान होगा।
पंचायत भवन और स्कूलों में लग रहे स्टेशन
सभी ग्राम पंचायतों के नेटवर्क से जुड़ने के बाद पीलीभीत में गांव स्तर पर मौसम की निगरानी का एक मजबूत तंत्र तैयार हो सकेगा। इससे मिलने वाले आंकड़े फसल बीमा के दावों, अतिवृष्टि से नुकसान के आकलन और आपदा राहत जैसे मामलों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। भविष्य में मोबाइल एप और SMS के जरिए स्थानीय मौसम की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित होने पर उन्हें अपने गांव के मौसम की स्थिति समय रहते जानने में और मदद मिलेगी।