उत्तर भारत में ज़ारी रहेगा ठंड का लंबा दौर, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
Gaon Connection | Jan 06, 2026, 16:04 IST
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के बड़े हिस्से में घना से बहुत घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने लोगों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जानिए इस दौरान क्या ज़रूरी काम करें।
उत्तर भारत में सर्दी का सबसे कठिन चरण जारी है और आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले पाँच से सात दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही कई राज्यों में शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति भी बन सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर तटीय और पूर्वी राज्यों तक अलग-अलग रूपों में देखने को मिलेगा।
पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति दर्ज की गई। कई शहरों में दृश्यता 50 मीटर से भी नीचे चली गई, जबकि कुछ स्थानों पर यह शून्य तक पहुंच गई। अमृतसर, ग्वालियर, जयपुर, फलोदी, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों में कोहरे ने सड़क, रेल और हवाई यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया। मौसम विभाग ने चेताया है कि कोहरे की यह स्थिति अगले कई दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे सुबह और रात के समय यात्रा जोखिमभरी हो सकती है।
IMD के अनुसार 6 और 7 जनवरी को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में शीत दिवस की स्थिति बनने की संभावना है। वहीं पश्चिमी राजस्थान और मध्य प्रदेश में 6 जनवरी को, जबकि पूर्वी राजस्थान, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 6 से 8 जनवरी के बीच शीत दिवस दर्ज किया जा सकता है। शीतलहर की बात करें तो 7 से 9 जनवरी के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और ओडिशा में, 8 से 11 जनवरी के बीच राजस्थान में और 6 से 8 जनवरी के दौरान विदर्भ, झारखंड और छत्तीसगढ़ में ठंडी हवाओं का प्रकोप बढ़ सकता है। इन स्थितियों में दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहने की आशंका है।
तापमान के आंकड़े इस सर्दी की गंभीरता को साफ दिखा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिशा में भी कई जगह न्यूनतम तापमान 5 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान पश्चिमी मध्य प्रदेश के राजगढ़ में 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में और 2–3 डिग्री की गिरावट हो सकती है, जबकि मध्य और पूर्वी भारत में भी ठंड बनी रहने के संकेत हैं।
मौसम प्रणालियों की बात करें तो दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के ऊपर बना कम दबाव क्षेत्र अगले 24 घंटों में और मजबूत होकर डिप्रेशन का रूप ले सकता है। इसके प्रभाव से दक्षिण भारत में मौसम बदलने के आसार हैं। 9 से 11 जनवरी के बीच तमिलनाडु, केरल और माहे में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि तमिलनाडु में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भी चेतावनी दी गई है। वहीं 6 जनवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बर्फबारी दर्ज की जा सकती है।
IMD ने घने कोहरे, शीत दिवस और शीतलहर के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी चेतावनी दी है। लंबे समय तक ठंड और प्रदूषित कोहरे के संपर्क में रहने से सांस की बीमारियों, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है। आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा बहुत घने कोहरे वाले इलाकों में बिजली लाइनों के ट्रिप होने और परिवहन सेवाओं में बाधा आने का खतरा भी रहता है।
मौसम विभाग के अनुसार शीतलहर, पाला और कम तापमान का सीधा असर खेती और पशुपालन पर पड़ सकता है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में किसानों को सलाह दी गई है कि वे खड़ी फसलों को ठंड से बचाने के लिए शाम के समय हल्की और नियमित सिंचाई करें, मल्चिंग अपनाएं और सब्ज़ियों की नर्सरी व छोटे पौधों को पुआल या पॉलीथीन शीट से ढकें। पशुपालकों को पशुओं को रात में शेड के अंदर रखने और मुर्गीपालन में अतिरिक्त गर्मी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, IMD की यह चेतावनी संकेत देती है कि देश के बड़े हिस्से में सर्दी का यह दौर अभी लंबा चल सकता है। घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर मिलकर जनजीवन, स्वास्थ्य, यातायात और खेती सभी को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में मौसम अपडेट पर नज़र रखना और आवश्यक सावधानियां अपनाना ही इस कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर तरीका है।
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मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर तटीय और पूर्वी राज्यों तक अलग-अलग रूपों में देखने को मिलेगा।
पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति दर्ज की गई। कई शहरों में दृश्यता 50 मीटर से भी नीचे चली गई, जबकि कुछ स्थानों पर यह शून्य तक पहुंच गई। अमृतसर, ग्वालियर, जयपुर, फलोदी, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों में कोहरे ने सड़क, रेल और हवाई यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया। मौसम विभाग ने चेताया है कि कोहरे की यह स्थिति अगले कई दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे सुबह और रात के समय यात्रा जोखिमभरी हो सकती है।
शीत दिवस और शीतलहर
तापमान सामान्य से काफी नीचे
पहाड़ों में बर्फबारी, दक्षिण और पूर्व में बारिश के संकेत
स्वास्थ्य और बुनियादी सेवाओं पर बढ़ता जोखिम
किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए अहम चेतावनी
सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय
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