"अब हर जिले के कृषि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय, शिवराज ने लागू किया 'वन टीम-वन टास्क' फॉर्मूला"

Preeti Nahar | Jun 04, 2026, 19:46 IST
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किसानों के लिए एक नई पहल "वन टीम, वन टास्क" मिशन शुरू हुआ है। इसका लक्ष्य कृषि विकास को तेज करना और वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है। यह मिशन खेत और प्रयोगशाला के बीच की दूरी को कम करेगा। मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे किसानों को नई जानकारी और बेहतर तकनीकें मिलेंगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में "वन टीम-वन टास्क" फॉर्मूला लागू किया
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में "वन टीम-वन टास्क" फॉर्मूला लागू किया
देश में कृषि क्षेत्र को अधिक परिणाम आधारित और किसान-केंद्रित बनाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "वन टीम-वन टास्क" फॉर्मूला लागू किया है। इस पहल का उद्देश्य कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य कृषि विभागों और जिला स्तर के अधिकारियों को एक साझा लक्ष्य के तहत जोड़ना है, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके।

क्या है 'वन टीम-वन टास्क' मॉडल?

शिवराज सिंह चौहान का मानना है कि कृषि क्षेत्र में अलग-अलग संस्थान अपने स्तर पर काम तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम के लिए सभी को एक टीम की तरह काम करना होगा। इसी सोच के तहत "वन टीम-वन टास्क" मॉडल लाया गया है। इसके तहत वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र किसी एक साझा लक्ष्य पर मिलकर काम करेंगे और उसकी नियमित समीक्षा भी की जाएगी।

अब सिर्फ योजनाएं नहीं, परिणाम भी देखे जाएंगे

नई व्यवस्था में जिला और ब्लॉक स्तर के कृषि अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जा रही हैं। किस जिले में मिट्टी परीक्षण कितना हुआ, किसानों तक नई तकनीक कितनी पहुंची, फसल उत्पादकता में कितना सुधार आया और योजनाओं का कितना लाभ मिला, इन सभी बिंदुओं पर निगरानी रखी जाएगी। सरकार का फोकस अब केवल योजनाएं शुरू करने पर नहीं बल्कि उनके जमीनी परिणामों पर रहेगा।

गाँवों में जाएंगे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ

इस मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेंगे। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को गांवों में जाकर किसानों से सीधे संवाद करने, उनकी समस्याओं को समझने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान सुझाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। पहले भी केंद्र सरकार "विकसित कृषि संकल्प अभियान" के तहत हजारों वैज्ञानिकों को गांवों में भेज चुकी है, जिससे शोध और खेत के बीच की दूरी कम करने की कोशिश की गई थी।

'खेत बचाओ अभियान' से भी जुड़ रहा मिशन

एक जून से शुरू हुए देशव्यापी "खेत बचाओ अभियान" को भी इस मिशन से जोड़कर देखा जा रहा है। इस अभियान में मिट्टी की सेहत, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा।

किसानों को क्या होगा फायदा?

इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों तक नई तकनीक और वैज्ञानिक सलाह तेजी से पहुंचेगी। किसानों को फसल चयन, बीज, उर्वरक प्रबंधन, मौसम आधारित सलाह, रोग नियंत्रण और बाजार संबंधी जानकारी समय पर मिल सकेगी। इससे उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और आय में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

कृषि में तकनीक और जवाबदेही पर जोर

शिवराज सिंह चौहान लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भविष्य की खेती तकनीक आधारित होगी। किसान आईडी, डिजिटल कृषि सेवाएं, मिट्टी परीक्षण, मौसम आधारित सलाह और एकीकृत कृषि मॉडल जैसे प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। "वन टीम-वन टास्क" को इसी व्यापक कृषि सुधार अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

कृषि क्रांति की नई तैयारी?

देश में जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और बाजार की चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र को नए मॉडल की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में "वन टीम-वन टास्क" फॉर्मूला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाने की कोशिश माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और कृषि विकास की रफ्तार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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