यूपी में भुर्जी-भोजवाल और भड़भूजा समाज के लिए बड़ा प्लान, ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ बनाने पर विचार, जानें क्या होगा फायदा
Gaon Connection | Aug 20, 2026, 15:31 IST
उत्तर प्रदेश में पारंपरिक भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के अद्भुत हुनर को संजोने के लिए 'श्री अन्न कला बोर्ड' का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड कारीगरों को पेशेवर प्रशिक्षण और सुलभ ऋण मुहैया कराएगा। ओडीओपी योजना के तहत उत्पादों को बेहतर विपणन मिलेगा। साथ ही, सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अनाज भूनने वाले कारीगरों के लिए बड़ी पहल
उत्तर प्रदेश में पीढ़ियों से अनाज भूनने के पारंपरिक कारोबार से जुड़े भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के लोगों के लिए नई पहल की तैयारी हो रही है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की मासिक बैठक में इन समुदायों के पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और उसे आधुनिक रोज़गार व कारोबार से जोड़ने के लिए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। प्रस्ताव के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, आसान ऋण, सब्सिडी और उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की संभावना है।
लखनऊ स्थित आयोग के कार्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। बैठक में पिछड़े वर्गों से जुड़ी सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लोगों तक उनका लाभ पहुँचाने पर भी चर्चा हुई। ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ की परिकल्पना को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि पारंपरिक हुनर केवल रोज़गार का साधन न रहे, बल्कि उससे जुड़े उत्पादों को संगठित तरीके से बाज़ार भी मिल सके।
आयोग में एस.के. सिंघानिया की ओर से मिले पत्र पर विचार करते हुए भुर्जी, भोजवाल और भड़भूजा समाज के लोगों के लिए ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। प्रस्ताव का उद्देश्य पारंपरिक अनाज भूनने के काम से जुड़े कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने के साथ उसे बदलती तकनीक और बाज़ार की ज़रूरतों से जोड़ना है। इसके तहत खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास और आधुनिक तरीक़ों से काम करने के लिए प्रशिक्षण देने की संभावना पर विचार किया गया। इसके अलावा इस कारोबार से जुड़े लोगों को आसान ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा उनके उत्पादों के लिए बाज़ार तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
प्रस्तावित बोर्ड की परिकल्पना को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक काम करने वाले लोगों को सिर्फ़ संरक्षण देना नहीं, बल्कि उनके हुनर को टिकाऊ कारोबार में बदलने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। बैठक में इस पहल को ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी की अवधारणा से जोड़ने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पादों को पहचान और व्यापक बाज़ार मिलने की उम्मीद है।
बैठक में विश्वकर्मा एकीकरण अभियान संस्था की ओर से विश्वकर्मा समाज की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करने से संबंधित पत्र पर भी विचार किया गया। विश्वकर्मा कल्याण आयोग या विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के गठन से जुड़े प्रावधानों और व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से जानकारी मंगाई जाएगी। आयोग के सचिव को इन राज्यों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर आयोग के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में पिछड़े वर्गों के लिए चल रही विभिन्न विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। आयोग ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लाभार्थियों तक उनका लाभ पहुँचाने पर ज़ोर दिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि आयोग में अन्य पिछड़े वर्गों से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निस्तारण कराया जा रहा है। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी ज़ोर दिया, ताकि किसी पात्र व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित न रहना पड़े।
लखनऊ स्थित आयोग के कार्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। बैठक में पिछड़े वर्गों से जुड़ी सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र लोगों तक उनका लाभ पहुँचाने पर भी चर्चा हुई। ‘श्री अन्न कला बोर्ड’ की परिकल्पना को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि पारंपरिक हुनर केवल रोज़गार का साधन न रहे, बल्कि उससे जुड़े उत्पादों को संगठित तरीके से बाज़ार भी मिल सके।