Shrimp Feed Price Hike: आंध्र प्रदेश में झींगा किसानों का बढ़ा खर्च, कच्चे माल 20 प्रतिशत हुए महंगे; मुख्यमंत्री ने की केंद्र से राहत की माँग

Preeti Nahar | May 17, 2026, 15:22 IST
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आंध्र प्रदेश के झींगा पालक चारे की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है क्योंकि कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि से चारा महंगा हो रहा है। किसान संगठनों ने मूल्य वृद्धि का विरोध किया है और राहत की मांग की है।
Shrimp farming
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आंध्र प्रदेश में झींगा पालन करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। झींगा चारे (श्रिंप फीड) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से किसान आर्थिक दबाव में हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan को पत्र लिखा है। राज्य सरकार का कहना है कि यदि चारे की कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर एक्वाकल्चर सेक्टर और हजारों किसानों की आय पर पड़ेगा।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan को पत्र लिखकर एक्वाकल्चर यानी जलीय कृषि से जुड़े किसानों के लिए राहत की मांग की है, साथ ही मछली भोजन (Fish Meal) के निर्यात को प्रोत्साहन देने और सोया आयात पर नियंत्रण जैसे उपाय सुझाए हैं।

समीक्षा बैठक में उठे किसानों के मुद्दे

यह फैसला सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर ने की। बैठक में झींगा पालन उद्योग पर बढ़ती फीड कीमतों के असर और किसानों के सामने आ रही आर्थिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

आंध्र प्रदेश के मत्स्य पालन आयुक्त रामा शंकर नाइक ने राज्य में एक्वाकल्चर की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने झींगा उत्पादन, फीड की खपत, मौजूदा कीमतों और कंपनियों द्वारा प्रस्तावित नई दरों का ब्यौरा अधिकारियों के सामने रखा।

क्यों बढ़ रही हैं झींगा चारे की कीमतें?

बैठक में Central Institute of Brackishwater Aquaculture (CIBA) के वैज्ञानिकों ने बताया कि जनवरी से मई 2026 के बीच झींगा चारे में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इन बढ़ती लागतों की वजह से चारा निर्माण लागत में औसतन ₹31.03 प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार:

  1. मछली भोजन (Fish Meal) की कीमत ₹1.5 लाख प्रति टन से बढ़कर ₹2.4 लाख प्रति टन हो गई
  2. मछली तेल (Fish Oil) ₹2.8 लाख से बढ़कर ₹4.4 लाख प्रति टन पहुँच गया
  3. सोया लेसिथिन की कीमत ₹68,000 से बढ़कर ₹1.1 लाख प्रति टन हो गई

कंपनियों ने मांगी फीड कीमत बढ़ाने की अनुमति

चारा निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कच्चे माल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। उनका दावा है कि हर टन फीड तैयार करने में करीब ₹25,000 का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसी कारण कंपनियां प्रति किलो झींगा चारे की कीमत में ₹25 से ₹31 तक बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं।

किसानों ने किया विरोध

हालांकि किसान संगठनों ने इस प्रस्तावित मूल्य वृद्धि का कड़ा विरोध किया। किसानों का कहना है कि जब कच्चे माल की कीमतें घटती हैं, तब कंपनियाँ उसका फायदा किसानों तक नहीं पहुँचातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि फीड निर्माता, प्रोसेसर और निर्यातक आपस में जुड़े व्यावसायिक समूहों की तरह काम कर रहे हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

किसानों ने सरकार से माँग की कि कम से कम गर्मी की फसल पूरी होने तक अगले दो महीनों तक मौजूदा फीड कीमतें स्थिर रखी जाएं। इसके अलावा उन्होंने लाइसेंस प्राप्त एक्वाकल्चर फार्मों के लिए ₹1.50 प्रति यूनिट की रियायती बिजली दर लागू करने की भी मांग उठाई।

अब हर महीने तय हो सकती हैं चारे की कीमतें

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पोल्ट्री फीड की तरह झींगा चारे के लिए भी मासिक मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू की जा सकती है। इसके तहत हर महीने कच्चे माल की कीमतों के आधार पर नई दरें तय होंगी। अधिकारियों ने यह सुझाव भी दिया कि हर 15 दिन में झींगा खरीद मूल्य तय करने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसान अफवाहों या गलत जानकारी के कारण नुकसान से बच सकें और सही समय पर अपनी फसल की कटाई कर सकें।
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