Artificial Food Colours Side Effects: रंग-बिरंगे व्यंजन आपकी थाली की बढ़ा रहे हैं रौनक, लेकिन बच्चों को हो सकती हैं इनसे ये ख़तरनाक बीमारियाँ
Mansi | Aug 01, 2026, 13:05 IST
बाजार की रंगीन मिठाइयाँ और पेय पदार्थ आर्टिफिशियल रंगों से बनाए जाते हैं। ये रंग केवल आकर्षण बढ़ाते हैं, पोषण या स्वाद नहीं बढ़ाते हैं। अधिक मात्रा में आर्टिफिशियल रंगों का सेवन बच्चों में हाइपरएक्टिविटी बढ़ा सकता है। प्रोसेस्ड फूड में मौजूद रंग मोटापा और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाते हैं। घर का बना भोजन और प्राकृतिक रंग वाले फल अधिक पौष्टिक और सुरक्षित विकल्प हैं।
आकर्षक रंगों वाले प्रोसेस्ड व्यंजन सेहत पर डाल रहे हैं असर
बाज़ार में मिलने वाली रंग-बिरंगी मिठाइयाँ, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, बेकरी उत्पाद और पैकेज्ड स्नैक्स अपनी आकर्षक रंगत के कारण लोगों को आसानी से लुभा लेते हैं। चमकीले रंग इन खाद्य पदार्थों को ताज़ा, स्वादिष्ट और अधिक आकर्षक दिखाते हैं, जिससे उनकी बिक्री भी बढ़ती है। लेकिन क्या ये रंग केवल देखने में अच्छे लगते हैं या सेहत पर भी असर डालते हैं? चिकित्सकों का कहना है कि स्वीकृत आर्टिफिशियल फूड कलर निर्धारित मात्रा में सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इनका बार-बार और अधिक सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
स्टेट डॉ. बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अयोध्या की चिकित्सक डॉ. सौम्या बताती हैं कि आर्टिफिशियल फूड कलर केवल खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाने के लिए मिलाए जाते हैं। इनका उद्देश्य भोजन का स्वाद या पोषण बढ़ाना नहीं होता, बल्कि उसे देखने में अधिक लुभावना बनाना होता है। यही वजह है कि इनका इस्तेमाल मिठाइयों, सॉफ़्ट ड्रिंक, कैंडी, जेली, बिस्कुट, केक और कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में किया जाता है।
![डॉ. सौम्या]()
आर्टिफिशियल फूड कलर रासायनिक रूप से तैयार किए गए रंग होते हैं, जिन्हें खाद्य पदार्थों की रंगत और आकर्षण बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) कुछ आर्टिफिशियल रंगों के उपयोग की अनुमति देता है, लेकिन केवल निर्धारित मात्रा में। तय सीमा के भीतर इनका सेवन सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, जबकि अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
डॉ. सौम्या के अनुसार, कई अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक रंग वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन कुछ बच्चों में हाइपरएक्टिविटी (अधिक सक्रियता) और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। हालांकि यह प्रभाव हर बच्चे में नहीं देखा जाता, लेकिन संवेदनशील बच्चों में इसका जोखिम अधिक रहता है। कुछ लोगों में आर्टिफिशियल फूड कलर से त्वचा पर चकत्ते, खुजली, एलर्जी या अस्थमा जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सिरदर्द, पेट दर्द और पाचन संबंधी असहजता की शिकायत भी हो सकती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद बार-बार ऐसी परेशानी हो रही हो तो चिकित्सक से सलाह लेना ज़रूरी है।
डॉ. सौम्या का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता केवल आर्टिफिशियल रंग नहीं हैं, बल्कि यह है कि ये रंग अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को अधिक आकर्षक बना देते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों में अक्सर चीनी, नमक और अस्वस्थ वसा अधिक मात्रा में होती है। इनका नियमित सेवन मोटापा, डायबिटीज , उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।
पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय हमेशा उनका फ़ूड लेबल पढ़ें। यदि किसी उत्पाद में आर्टिफिशियल रंग, अधिक चीनी, अधिक सोडियम या ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़्यादा हो तो उसका सेवन सीमित करें। बच्चों के लिए खाद्य पदार्थ खरीदते समय यह सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है।
डॉ. सौम्या के अनुसार, सॉफ़्ट ड्रिंक और रंगीन पैकेज्ड पेय पदार्थों की जगह घर पर बने ताज़े फलों का रस, नींबू पानी या अन्य प्राकृतिक पेय बेहतर विकल्प हैं। इसी तरह घर का ताज़ा भोजन पैकेज्ड स्नैक्स की तुलना में अधिक पौष्टिक और सुरक्षित होता है। हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, चुकंदर, टमाटर, आम, पपीता, संतरा, अनार और अन्य मौसमी फल प्राकृतिक रंगों से भरपूर होते हैं। ये शरीर को विटामिन, खनिज, फ़ाइबर और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक रूप से रंग-बिरंगा भोजन सबसे स्वस्थ माना जाता है।
डॉ. सौम्या सलाह देती हैं कि रोज़मर्रा की डाइट में ताज़े फल, सब्ज़ियाँ, दालें और घर का बना भोजन शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड, रंगीन पेय पदार्थ और अत्यधिक पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। संतुलित आहार, फूड लेबल पढ़ने की आदत और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देकर आर्टिफिशियल फूड कलर से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है।
स्टेट डॉ. बृज किशोर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अयोध्या की चिकित्सक डॉ. सौम्या बताती हैं कि आर्टिफिशियल फूड कलर केवल खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाने के लिए मिलाए जाते हैं। इनका उद्देश्य भोजन का स्वाद या पोषण बढ़ाना नहीं होता, बल्कि उसे देखने में अधिक लुभावना बनाना होता है। यही वजह है कि इनका इस्तेमाल मिठाइयों, सॉफ़्ट ड्रिंक, कैंडी, जेली, बिस्कुट, केक और कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में किया जाता है।
डॉ. सौम्या