छोटे प्याज़ से बढ़ेगी कमाई! ₹30-35 प्रति किलो मिलने का अनुमान; इस कृषि विश्वविद्यालय ने बुआई से पहले किसानों को दी अहम सलाह

Gaon Connection | Jul 20, 2026, 18:46 IST
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तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने आगामी छोटे प्याज़ (शलॉट) की फसल के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद का फ़ार्म-गेट मूल्य (खेत से बिक्री का भाव) ₹30-35 प्रति किलोग्राम रहने का अनुमान जताया है। विश्वविद्यालय ने किसानों को बुआई से पहले इस मूल्य पूर्वानुमान को ध्यान में रखने की सलाह दी है। तमिलनाडु देश के छोटे प्याज़ उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और श्रीलंका, बांग्लादेश, मलेशिया व नेपाल को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, इस सीज़न में निर्यात माँग मज़बूत बनी हुई है।

अगली फसल में छोटे प्याज़ के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद
अगली फसल में छोटे प्याज़ के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद
तमिलनाडु में छोटे प्याज़ (शलॉट) की खेती करने वाले किसानों के लिए आगामी सीज़न उम्मीदों से भरा हो सकता है। राज्य के कृषि विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि नई फसल की कटाई के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले छोटे प्याज़ का फ़ार्म-गेट मूल्य ₹30 से ₹35 प्रति किलोग्राम के बीच रह सकता है। यह अनुमान पिछले कई वर्षों के मूल्य रुझानों और मौजूदा बाज़ार स्थिति के विश्लेषण के आधार पर लगाया गया है। ऐसे में किसानों को बुआई से पहले संभावित बाज़ार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

देश में छोटे प्याज़ के उत्पादन और आपूर्ति में तमिलनाडु की अहम भूमिका है। घरेलू खपत के अलावा राज्य से बड़ी मात्रा में छोटे प्याज़ का निर्यात भी किया जाता है। हालाँकि इस समय विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों से नई फसल की आवक बढ़ रही है, लेकिन निर्यात बाज़ार में लगातार बनी माँग से क़ीमतों को सहारा मिलने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बाज़ार के संकेतों के अनुरूप फसल प्रबंधन करें तो उन्हें बेहतर आमदनी मिल सकती है।

TNAU ने ₹30-35 प्रति किलो फ़ार्म-गेट मूल्य का जताया अनुमान

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) ने आगामी कटाई सीज़न के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले छोटे प्याज़ के लिए ₹30 से ₹35 प्रति किलोग्राम फ़ार्म-गेट मूल्य का अनुमान जताया है। TNAU की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूर्वानुमान डिंडीगुल मंडी के पिछले 15 वर्षों के मूल्य आँकड़ों के विश्लेषण और कृषि एवं ग्रामीण विकास अध्ययन केंद्र (CARDS) के अंतर्गत DEMIC द्वारा किए गए बाज़ार सर्वेक्षण पर आधारित है। विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि वे आगामी सीज़न की बुआई करते समय इस संभावित मूल्य को ध्यान में रखें।

तमिलनाडु देश का प्रमुख छोटे प्याज़ उत्पादक और निर्यात केंद्र

भारत छोटे प्याज़ का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसकी खेती मुख्य रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में की जाती है। इनमें तमिलनाडु की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जहाँ छोटे प्याज़ राज्य के कुल प्याज़ उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत है। TNAU के अनुसार, वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य में लगभग 0.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में छोटे प्याज़ की खेती की गई, जिससे 5.28 लाख टन उत्पादन हुआ। औसत उत्पादकता 12 टन प्रति हेक्टेयर रही। डिंडीगुल, तिरुप्पुर, पेरंबलूर, तिरुचिरापल्ली, नमक्कल, थेनी और मदुरै राज्य के प्रमुख उत्पादक ज़िले हैं। विश्वविद्यालय ने बताया कि घरेलू माँग तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के उत्पादन से पूरी होती है, जबकि तमिलनाडु श्रीलंका, बांग्लादेश, मलेशिया और नेपाल जैसे देशों को छोटे प्याज़ निर्यात करने का भी प्रमुख केंद्र है।

निर्यात माँग मज़बूत, मंडियों में नई आवक बढ़ी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सीज़न में छोटे प्याज़ की निर्यात माँग लगातार मज़बूत बनी हुई है। कुल उत्पादन का अनुमानित 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा विदेशों को भेजा जा रहा है, जिससे घरेलू बाज़ार में क़ीमतों को समर्थन मिल रहा है। वहीं, पेरंबलूर, धारापुरम, पल्लादम, उदुमलपेट और कर्नाटक के कुछ हिस्सों से छोटे प्याज़ की नई आवक तिरुचिरापल्ली और डिंडीगुल की प्रमुख थोक मंडियों में तेज़ी से पहुँच रही है।

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने अपने मूल्य पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को सलाह दी है कि वे आगामी बुआई का फ़ैसला करते समय संभावित कटाई मूल्य को ध्यान में रखें, ताकि बदलती बाज़ार परिस्थितियों में बेहतर आर्थिक लाभ हासिल किया जा सके।
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