Smart Farming: कृषि विभाग ने दी जानकारी; कहा- मौसम के साथ बदलें खेती का तरीका, कम लागत में किसान कमाएं ज्यादा मुनाफा
Gaon Connection | Apr 26, 2026, 12:09 IST
उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि खेती का भविष्य अब स्मार्ट खेती में है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही बदलते मौसम के अनुसार फैसले लेना, सही सिंचाई और फसल प्रबंधन से नुकसान खेती में कम होगा। इसके साथ ही सब्जी, बागवानी, पशुपालन, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन में भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
कम लागत में किसान कमाएं ज्यादा मुनाफा
देश में खेती अब तेजी से बदल रही है। पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने वाले किसान कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। बदलते मौसम, बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और महंगे कृषि संसाधनों के बीच अब स्मार्ट खेती ही भविष्य का रास्ता मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान फसल प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और मौसम आधारित निर्णय लें, तो नुकसान कम कर आय बढ़ा सकते हैं।
खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। तापमान में अचानक वृद्धि, लू, तेज हवाएं, सूखा, बारिश या ओलावृष्टि जैसी घटनाएं फसल को प्रभावित करती हैं। ऐसे में किसानों को मौसम विभाग की जानकारी और पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए। यदि किसान मौसम अपडेट के अनुसार बुवाई, सिंचाई, दवा छिड़काव और कटाई करें, तो फसल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं, चना, मसूर जैसी रबी फसलों की समय पर कटाई बेहद जरूरी है। कटाई के बाद फसल को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए ताकि बारिश या नमी से नुकसान न हो। इसके अलावा खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाना अगली फसल के लिए लाभदायक माना जाता है। किसान मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुवाई कर अतिरिक्त आय भी ले सकते हैं।
गर्मी के मौसम में खेतों में नमी बनाए रखना जरूरी होता है। किसान सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करें ताकि पानी का कम नुकसान हो। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने से पानी की बचत होती है और फसल को सही मात्रा में नमी मिलती है। अधिक सिंचाई से फसल खराब होने और लागत बढ़ने का खतरा रहता है।
टमाटर, बैंगन, मिर्च जैसी सब्जियों में नियमित सिंचाई जरूरी है। तेज धूप से बचाने के लिए शेड नेट या मल्चिंग का उपयोग किया जा सकता है। आम के बागों में फल गिरने से रोकने के लिए समय पर सिंचाई और पोषण देना चाहिए। साथ ही कीट और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
गर्मी के मौसम में पशुओं पर हीट स्ट्रेस का असर पड़ता है। पशुओं को छायादार और ठंडी जगह पर रखें। दिन में तीन से चार बार साफ पानी पिलाएं और हरा चारा व संतुलित आहार दें। जरूरत पड़ने पर पशुओं पर पानी का छिड़काव करें, जिससे गर्मी का असर कम हो सके।
मुर्गी पालन करने वाले किसान पोल्ट्री शेड को हवादार रखें और साफ पानी की उपलब्धता बनाए रखें। भीड़भाड़ कम रखें और विटामिन व इलेक्ट्रोलाइट दें। वहीं मत्स्य पालन करने वाले किसान तालाब में जल स्तर बनाए रखें, सुबह-शाम मछलियों को आहार दें और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखें।
किसान जैविक खाद, हरी खाद, गोबर खाद और कम्पोस्ट का उपयोग बढ़ाएं। इससे रासायनिक खाद पर खर्च कम होगा और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक डालने से अनावश्यक खर्च रुकता है और उत्पादन बढ़ता है।
दोपहर की तेज धूप में खेतों में काम करने से बचें। लू से बचाव के लिए सिर ढककर रखें। मौसम बदलने की स्थिति में फसल की कटाई रोकें और समय-समय पर मौसम पूर्वानुमान देखते रहें। फसल बीमा और सुरक्षा उपाय भी अपनाना किसानों के लिए फायदेमंद रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही जानकारी और सही समय पर सही निर्णय से मिलती है। आधुनिक खेती, वैज्ञानिक तकनीक और मौसम आधारित प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं।
मौसम आधारित खेती क्यों है जरूरी?
आधुनिक खेती से मिल सकते हैं कम लागत में बेहतर परिणाम
फसल प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन
उचित सिंचाई से होगी पानी और पैसे की बचत
सिंचाई के समय पर ध्यान रखना जरूरी
सब्जी और बागवानी किसानों के लिए सलाह
पशुपालकों के लिए गर्मी में जरूरी प्रबंधन
बढ़ती गर्मी में पशुओं का रखें ख्याल
कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन में सावधानी
कम लागत खेती के लिए वैज्ञानिक उपाय
विशेष सावधानियाँ
तपती गर्मी में खेतों में काम करते समय खुद का बचाव करें