भारत की फूड प्रोसेसिंग क्रांति से सीख सकता है दक्षिण एशिया, लाखों रोज़गार की संभावना: विश्व बैंक
Gaon Connection | Jun 10, 2026, 15:04 IST
विश्व बैंक समूह ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन पर जोर देकर दक्षिण एशिया लाखों रोजगार और अरबों डॉलर के निवेश के अवसर पैदा कर सकता है। अहमदाबाद में आयोजित सैपलिंग नीति संवाद में विशेषज्ञों ने खाद्य हानि कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने पर बल दिया।
भारत बना फूड प्रोसेसिंग का मॉडल
दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास का बड़ा इंजन बन सकती है। विश्व बैंक समूह का मानना है कि कृषि उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय यदि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, विपणन और मूल्यवर्धन पर ध्यान दिया जाए, तो क्षेत्र में लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं और अरबों डॉलर के निवेश को आकर्षित किया जा सकता है। यह बात विश्व बैंक समूह ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित सैपलिंग (South Asia Policy Leadership for Improved Nutrition and Growth) उच्च स्तरीय नीति संवाद में कही। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) और विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली सैपलिंग पहल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय संवाद में दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों से नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और विकास भागीदार शामिल हुए।
विश्व बैंक समूह ने कहा कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक का है और क्षेत्र के करीब 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है। इसके बावजूद कृषि का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान केवल 16 प्रतिशत के आसपास है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दक्षिण एशिया में उत्पादित खाद्य पदार्थों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हर वर्ष बर्बाद हो जाता है, जबकि यह भोजन लगभग 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।
विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और बाजार संपर्क को मजबूत कर कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि इससे न केवल खाद्य हानि कम होगी, बल्कि किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे।
विश्व बैंक समूह ने भारत को कृषि मूल्य श्रृंखला परिवर्तन का सफल उदाहरण बताया। भारत में खाद्यान्न उत्पादन 1950-51 के 51 मिलियन टन से बढ़कर 330 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही पिछले दशक में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात 4.9 अरब डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत के विनिर्माण मूल्यवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत का योगदान देता है।
विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण (PMFME) योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना जैसी पहलों को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण बताया। इन योजनाओं ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, उद्यमों के आधुनिकीकरण, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
विश्व बैंक समूह ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा अब भी बिना प्रसंस्करण के बाजार तक पहुंचता है। यदि कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बाजार संपर्क को मजबूत किया जाए, तो मूल्य सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
विश्व बैंक समूह ने बताया कि वह एग्रीकनेक्ट (AgriConnect) और सैपलिंग के माध्यम से खाद्य प्रणाली परिवर्तन को गति दे रहा है। एग्रीकनेक्ट का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 3 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है। यह मंच बुनियादी ढांचे में निवेश, नीतिगत सुधार और निजी पूंजी जुटाने पर काम कर रहा है। वहीं सैपलिंग सरकारों, निवेशकों, विकास भागीदारों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाकर क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
संवाद में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, प्रोसेसिंग क्लस्टर और कृषि-औद्योगिक पार्कों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने डिजिटल तकनीकों के उपयोग, गुणवत्ता आश्वासन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और कौशल विकास को भी खाद्य प्रणाली परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। नीति निर्माताओं से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों को बढ़ावा देने, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे में सुधार, खाद्य सुरक्षा मानकों को सरल बनाने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने का आग्रह किया गया।
विश्व बैंक समूह का मानना है कि दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था का भविष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कृषि से बाजार तक पूरी खाद्य प्रणाली को आधुनिक और दक्ष बनाकर यह क्षेत्र लाखों रोजगार पैदा कर सकता है, खाद्य हानि कम कर सकता है, पोषण में सुधार ला सकता है, निर्यात बढ़ा सकता है और आने वाले दशकों में समावेशी आर्थिक विकास को नई गति दे सकता है।