अच्छी बारिश से बढ़ी खरीफ बुवाई की रफ़्तार, धान की कमी लगभग खत्म लेकिन दलहन-तिलहन अब भी पीछे, जानें फसलवार रकबा

Umang | Jul 21, 2026, 12:06 IST
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देश में खरीफ फसलों की बुवाई में जुलाई के पहले पखवाड़े में हुई अच्छी बारिश के बाद तेज़ सुधार दर्ज किया गया है। 17 जुलाई तक कुल बुवाई 531.25 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई, जिससे पिछले वर्ष के मुकाबले कमी घटकर 6 प्रतिशत रह गई। धान की रोपाई लगभग पिछले साल के स्तर पर पहुँच गई है, जबकि दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की बुवाई अभी भी कम है। सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 176.16 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

17 जुलाई तक 531 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई
17 जुलाई तक 531 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ़्तार तेज़ होने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश मिलने से किसानों ने बड़े पैमाने पर खेतों में बुवाई का काम तेज़ किया, जिसके चलते शुरुआती दिनों में दिख रहा बड़ा अंतर काफ़ी हद तक कम हो गया है। हालांकि, बुवाई की रफ़्तार बढ़ने के बावजूद कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। धान की रोपाई लगभग पिछले साल के स्तर पर पहुँच गई है, लेकिन दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की बुवाई अब भी पीछे चल रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की बुवाई 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आँकड़ा 632.69 लाख हेक्टेयर था। यानी कुल बुवाई क्षेत्र अभी भी लगभग 6 प्रतिशत कम है। राहत की बात यह है कि जुलाई के पहले दस दिनों में सामान्य से 31 प्रतिशत अधिक वर्षा होने के कारण बुवाई का अंतर तेज़ी से घटा है और कई प्रमुख फसलों में स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

एक सप्ताह में तेज़ी से बढ़ी बुवाई, धान का रकबा लगभग बराबरी पर पहुँचा

11 से 17 जुलाई के बीच किसानों ने 126.94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 67.78 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी वजह से 5 जुलाई तक जहाँ कुल बुवाई में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी, वह 10 जुलाई तक घटकर 16 प्रतिशत और 17 जुलाई तक केवल 6 प्रतिशत रह गई।

धान की रोपाई में सबसे अधिक सुधार देखने को मिला है। 17 जुलाई तक धान की रोपाई 166.41 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 167.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी थी। यानी धान का रकबा अब पिछले वर्ष से एक प्रतिशत से भी कम पीछे है। केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के लिए धान उत्पादन का लक्ष्य 123.15 मिलियन टन निर्धारित किया है।

खरीफ बुवाई 2026: प्रमुख फसलों का रकबा (17 जुलाई तक)

फसल2026 (लाख हेक्टेयर)2025 (लाख हेक्टेयर)बदलाव
धान166.41167.83-1% (लगभग)
अरहर24.8030.17-18%
मूँग23.9826.94-11%
उड़द13.5114.36-6%
कुल दलहन69.2381.52-15%
सोयाबीन106.02111.05-5%
मूँगफली34.5237.69-8%
कुल तिलहन147.09155.72-6%
ज्वार8.749.99-13%
बाजरा39.9849.05-18%
रागी1.061.46-27%
मक्का67.8971.50-5%
कुल मोटे/पोषक अनाज119.03134.09-11%
कपास92.5398.40-6%
गन्ना57.5856.72+2%
जूट एवं मेस्टा6.326.19+2%
कुल खरीफ बुवाई531.25632.69-6%

दलहन और तिलहन की बुवाई में सुधार, फिर भी पिछले साल से कम क्षेत्र

बारिश में सुधार के बाद दलहन और तिलहन की बुवाई में भी तेज़ी आई है, लेकिन दोनों श्रेणियों का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष से कम बना हुआ है।

  • दलहन की बुवाई 69.23 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 81.52 लाख हेक्टेयर थी। अरहर का रकबा 24.80 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 30.17 लाख हेक्टेयर से कम है। मूँग की बुवाई 23.98 लाख हेक्टेयर और उड़द की 13.51 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है।
  • तिलहन फसलों का कुल रकबा 147.09 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि एक वर्ष पहले यह 155.72 लाख हेक्टेयर था। सोयाबीन की बुवाई 106.02 लाख हेक्टेयर और मूँगफली की 34.52 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के स्तर से नीचे है। सरकार ने मौजूदा खरीफ सीज़न में कुल 28.92 मिलियन टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिसमें सोयाबीन का लक्ष्य 14.85 मिलियन टन और मूँगफली का 11.35 मिलियन टन है।
  • कपास की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम होकर 92.53 लाख हेक्टेयर रही। वहीं गन्ने की बुवाई पूरी हो चुकी है और इसका रकबा 57.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के 56.72 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है। जूट और मेस्टा की बुवाई भी पूरी हो चुकी है और इनका क्षेत्रफल 6.32 लाख हेक्टेयर रहा।

मोटे अनाज का रकबा 11% घटा, बेहतर बारिश से उत्पादन लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद

मोटे एवं पोषक अनाजों की बुवाई अब भी सबसे अधिक प्रभावित श्रेणियों में बनी हुई है। इन फसलों का कुल रकबा 119.03 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 134.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी। ज्वार की बुवाई 8.74 लाख हेक्टेयर, बाजरा 39.98 लाख हेक्टेयर, रागी 1.06 लाख हेक्टेयर और मक्का 67.89 लाख हेक्टेयर में हुई है। चारों प्रमुख फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है।

इस बीच भारतीय मौसम विभाग के आँकड़ों के अनुसार जून में मानसून की वर्षा में 37 प्रतिशत की कमी थी, जो 20 जुलाई तक घटकर 23 प्रतिशत रह गई। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से बुवाई को गति मिली, हालांकि बीच में कुछ दिनों के ब्रेक के कारण वर्षा में कमी बढ़ी थी। 20 जुलाई के बाद मानसून फिर सक्रिय हुआ है, जिससे आगे बुवाई और फसलों की बढ़वार के लिए बेहतर परिस्थितियाँ बनने की उम्मीद है। सरकार ने खरीफ 2026 सीज़न के लिए कुल 176.16 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 8.4 मिलियन टन दलहन, 31.04 मिलियन टन मक्का और 13.56 मिलियन टन मोटे एवं पोषक अनाज का उत्पादन शामिल है।
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