भारत और यूरोप के मौसम विभाग ने बताया जुलाई में कब तक बरसेंगे बादल, फिर किन राज्यों में कमज़ोर पड़ेगा मानसून

Gaon Connection | Jun 26, 2026, 12:22 IST
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दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी रफ़्तार से सक्रिय रहने की संभावना है, जिससे खरीफ़ फसलों की बुवाई को गति मिल सकती है। आईएमडी ने जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान जताया है। वहीं ईसीएमडब्ल्यूएफ के अनुसार, मध्य जुलाई के बाद राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में बारिश कमज़ोर पड़ सकती है।

मानसून पर बड़ा अपडेट!
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दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ सप्ताह तक देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी रफ़्तार बनाए रख सकता है, जिससे खरीफ़ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार, जून के आख़िरी सप्ताह से जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह तक देश के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इससे शुरुआती बारिश की कमी के कारण प्रभावित हुई खरीफ़ बुवाई में तेज़ी आने की उम्मीद है।

हालाँकि, जुलाई के मध्य के बाद मॉनसून की रफ़्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। यूरोपियन सेंटर फ़ॉर मीडियम-रेंज वेदर फ़ोरकास्ट्स (ईसीएमडब्ल्यूएफ) के ताज़ा अनुमान के मुताबिक, जुलाई के दूसरे पखवाड़े और अगस्त के शुरुआती दिनों में देश के पश्चिमी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है। इससे राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में वर्षा की कमी देखने को मिल सकती है।

जुलाई की शुरुआत में बारिश पकड़ सकती है रफ़्तार

आईएमडी के 25 जून से 1 जुलाई तक के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय हिस्सों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में इस दौरान सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। इसके बाद 2 से 8 जुलाई के बीच लगभग पूरे देश में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान है। आईएमडी ने इस अवधि के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बनने की भी संभावना जताई है, जिससे मुख्य भूमि पर मॉनसून और मज़बूत हो सकता है।

खरीफ़ बुवाई को मिल सकता है बड़ा सहारा

जून की शुरुआत में बारिश में देरी के कारण कई राज्यों में खरीफ़ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई थी। अब जून के अंतिम सप्ताह से शुरू होने वाला दो सप्ताह का अनुकूल मौसम बुवाई की रफ़्तार बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

29 जून से 6 जुलाई तक इन राज्यों में सक्रिय रहेगा मॉनसून

ईसीएमडब्ल्यूएफ के अनुसार, 29 जून से 6 जुलाई के दौरान मध्य भारत में ओडिशा, विदर्भ, उत्तर आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहेगा। पश्चिमी तट पर भी अच्छी बारिश जारी रहने का अनुमान है। कोंकण, मुंबई और गोवा में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं तटीय कर्नाटक और केरल में व्यापक लेकिन अपेक्षाकृत कम तीव्रता वाली वर्षा होने की संभावना है। दूसरी ओर, पूर्वी तमिलनाडु, उत्तर गुजरात, उत्तर-पश्चिम राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में इस दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

6 से 13 जुलाई के बीच उत्तर भारत में बढ़ सकती है बारिश

ईसीएमडब्ल्यूएफ के अनुसार, 6 से 13 जुलाई के दौरान दक्षिणी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इसी अवधि में पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी गुजरात और पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में भी सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। हालाँकि उत्तर राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-हरियाणा-चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है।

मध्य जुलाई के बाद कमज़ोर पड़ सकता है मॉनसून

ईसीएमडब्ल्यूएफ के ताज़ा अनुमान के अनुसार, जुलाई के मध्य के बाद मॉनसून की स्थिति कुछ कमज़ोर हो सकती है। जुलाई के दूसरे पखवाड़े और अगस्त के पहले दस दिनों में देश के पश्चिमी हिस्सों में वर्षा की कमी उभरने के संकेत हैं। इस अवधि में राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूरे पश्चिमी तट और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में सामान्य के आसपास वर्षा होने का अनुमान है।
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