मक्का छोड़ फिर सोयाबीन की ओर लौटे किसान! इस साल 5-7 प्रतिशत रक़बा बढ़ने की उम्मीद, जानें क्या है वजह

Umang | Jul 10, 2026, 11:52 IST
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बेहतर बाज़ार भाव और एमएसपी से अधिक कीमत मिलने के कारण इस खरीफ़ सीज़न किसानों का रुझान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिकांश लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। संगठन का मानना है कि यदि अगले तीन महीनों तक पर्याप्त बारिश होती रही, तो इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है।

सोयाबीन की बुवाई में तेज़ी की उम्मीद
सोयाबीन की बुवाई में तेज़ी की उम्मीद
देश में इस खरीफ़ सीज़न सोयाबीन की खेती को लेकर किसानों का रुझान एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बेहतर बाज़ार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक कीमत मिलने के कारण मध्य भारत के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में किसान इस तिलहनी फसल को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले वर्ष जिन किसानों ने मक्का की खेती अपनाई थी, उनमें से बड़ी संख्या इस बार फिर सोयाबीन की बुवाई की ओर लौट रही है।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (SOPA) का मानना है कि इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। हालाँकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की देर से शुरुआत के कारण बुवाई कुछ देर से शुरू हुई, लेकिन अब अधिकांश राज्यों में अच्छी बारिश होने से बुवाई तेज़ी से आगे बढ़ी है। संगठन के अनुसार, प्रमुख उत्पादक राज्यों में लक्ष्य का 80 से 90 प्रतिशत क्षेत्र पहले ही कवर किया जा चुका है।

सोपा का अनुमान: एमएसपी से ऊपर मिल रहे दाम, कई राज्यों में तेज़ हुई बुवाई

SOPA के अनुसार, पिछले वर्ष देश में लगभग 114 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती हुई थी। इस बार संगठन को उम्मीद है कि रक़बा 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन का बाज़ार भाव लगभग 6,700 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है, जबकि केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। बेहतर दाम मिलने के कारण किसान सोयाबीन की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।

SOPA के 8 जुलाई तक के आकलन के अनुसार, देश में सोयाबीन की बुवाई 100.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुँच चुकी है। यह आँकड़ा कृषि मंत्रालय के 57.92 लाख हेक्टेयर के आधिकारिक अनुमान से अधिक है। संगठन का कहना है कि सरकारी आँकड़ों में सामान्यतः 7 से 10 दिन की रिपोर्टिंग देरी होती है, इसलिए दोनों आँकड़ों में अंतर दिखाई देता है। मध्य प्रदेश में सोपा ने 44.25 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 40.25 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 7.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई का अनुमान लगाया है। ये सभी आँकड़े सरकारी अनुमान से अधिक हैं।

फसल की स्थिति संतोषजनक, आगे बारिश पर निर्भर करेगी पैदावार

SOPA के अनुसार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में लगभग 90 प्रतिशत लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि महाराष्ट्र में भी 80 से 90 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई पूरी होने का अनुमान है। कुछ इलाक़ों में असमान वर्षा के कारण लगभग 1 से 2 प्रतिशत क्षेत्र में बीजों का अंकुरण सही नहीं हुआ, जिसके चलते किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी। वर्तमान में प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल सामान्य से संतोषजनक स्थिति में है और पौधे वृद्धि की अवस्था में हैं। किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खरपतवार नियंत्रण के लिए शाकनाशियों के साथ-साथ पारंपरिक तरीक़ों का भी उपयोग कर रहे हैं।

SOPA का कहना है कि आने वाले तीन महीनों में समय पर और पर्याप्त वर्षा होती रही तो इस वर्ष सोयाबीन की पैदावार पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है। संगठन के अनुसार, अनुकूल मौसम की स्थिति बनी रही तो किसानों को उत्पादन और आय, दोनों के स्तर पर लाभ मिल सकता है।
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