Soybean Sowing: जुलाई की बारिश से बढ़ा रकबा, कई राज्यों में किसानों ने बढ़ाई बुवाई, जानिए क्या है वजह
Mansi | Aug 01, 2026, 18:30 IST
खरीफ 2026 सीजन में सोयाबीन की बुवाई का स्तर पिछले वर्ष के समान रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश और गुजरात में बुवाई में वृद्धि हो रही है, जबकि महाराष्ट्र में कुछ कमी देखने को मिली है। जुलाई में हुई वर्षा ने किसानों को समर्थन दिया और बुवाई में तेजी आई है। अधिकांश क्षेत्रों में फसल की स्थिति सामान्य से बेहतर है, जिससे उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं हैं।
कई राज्यों में किसानों ने बढ़ाई सोयाबीन की बुवाई
देश में खरीफ 2026 सीजन के दौरान सोयाबीन की बुवाई ने जुलाई में रफ्तार पकड़ी है। मानसून की धीमी शुरुआत के बाद हुई अच्छी बारिश से किसानों को राहत मिली और कई राज्यों में सोयाबीन की खेती का रकबा पिछले वर्ष के स्तर के करीब पहुंच गया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बुवाई बढ़ने से कुल रकबे में सुधार दर्ज किया गया है।
हालांकि महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार सोयाबीन का रकबा पिछले साल की तुलना में कुछ कम है। इसके बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में फसल की स्थिति सामान्य से बेहतर बनी हुई है और यदि मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय के 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार देश में 117.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 118.52 लाख हेक्टेयर की तुलना में केवल 0.70 प्रतिशत कम है। वहीं सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के क्षेत्रीय सर्वेक्षण में भी सोयाबीन का रकबा लगभग 117.13 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
इस वर्ष मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में 52.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 2% अधिक है। गुजरात में भी अच्छी बारिश के चलते सोयाबीन का रकबा करीब 10 % बढ़कर 2.79 लाख हेक्टेयर हो गया है। तेलंगाना में भी बुवाई बढ़ी है, जबकि उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले वर्ष की तुलना में सोयाबीन का रकबा लगभग दोगुना दर्ज किया गया है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में सोयाबीन की बुवाई पिछले वर्ष से कम रही है। महाराष्ट्र में 46.56 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 9.17 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती हुई है। मौसम की शुरुआत में बारिश की कमी और क्षेत्रीय परिस्थितियों को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के किसान विठ्ठल ने बताया ‘इस बार शुरुआत में बारिश कम होने से कई किसानों ने सायाबीन की बुवाई देर से की या रकबा घटा दिया। हालांकि जुलाई में अच्छी बारिश के बाद फसल की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। अब मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन में ज्य़ादा नुकसान नहीं होगा।’
जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने सोयाबीन की बुवाई को गति दी। जिन क्षेत्रों में जून के दौरान नमी की कमी थी, वहाँ बारिश के बाद किसानों ने तेजी से बुवाई पूरी की। यही कारण है कि कुल रकबा अब पिछले वर्ष के लगभग बराबर पहुँच गया है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक के अनुसार जून में बोई गई अधिकांश सोयाबीन की फसल अब फूल आने की अवस्था में पहुँच चुकी है। फिलहाल फसल की बढ़वार सामान्य से बेहतर दिखाई दे रही है और अधिकांश खेतों में पौधों का विकास संतोषजनक है।
क्षेत्रीय निरीक्षण में पाया गया है कि अधिकांश किसानों ने समय पर खरपतवार नियंत्रण किया है, जिससे खेत काफी हद तक खरपतवार मुक्त हैं। इसका सकारात्मक असर पौधों की बढ़वार पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक के निरीक्षण में किसी बड़े कीट या रोग के प्रकोप की सूचना नहीं मिली है। किसान नियमित रूप से खेतों की निगरानी करते रहें और मौसम के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें, ताकि फसल स्वस्थ बनी रहे।
आने वाले सप्ताह सोयाबीन की फसल के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि अगस्त और सितंबर में मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। वहीं अत्यधिक वर्षा या लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनने पर फसल प्रभावित हो सकती है।
हालांकि महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार सोयाबीन का रकबा पिछले साल की तुलना में कुछ कम है। इसके बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में फसल की स्थिति सामान्य से बेहतर बनी हुई है और यदि मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
पिछले साल के करीब पहुंचा सोयाबीन का रकबा
किन राज्यों में बढ़ी सोयाबीन की खेती?
महाराष्ट्र और राजस्थान में क्यों घटा रकबा?
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के किसान विठ्ठल ने बताया ‘इस बार शुरुआत में बारिश कम होने से कई किसानों ने सायाबीन की बुवाई देर से की या रकबा घटा दिया। हालांकि जुलाई में अच्छी बारिश के बाद फसल की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। अब मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन में ज्य़ादा नुकसान नहीं होगा।’
जुलाई की बारिश से मिली राहत
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक के अनुसार जून में बोई गई अधिकांश सोयाबीन की फसल अब फूल आने की अवस्था में पहुँच चुकी है। फिलहाल फसल की बढ़वार सामान्य से बेहतर दिखाई दे रही है और अधिकांश खेतों में पौधों का विकास संतोषजनक है।
खरपतवार नियंत्रण और फसल की स्थिति बेहतर
आने वाले सप्ताह सोयाबीन की फसल के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि अगस्त और सितंबर में मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। वहीं अत्यधिक वर्षा या लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनने पर फसल प्रभावित हो सकती है।