अब गाँवों की सड़कों पर भी तय होगी वाहनों की रफ़्तार, हादसे रोकने के लिए यूपी सरकार ला रही नई नीति
Gaon Connection | Jun 22, 2026, 16:35 IST
उत्तर प्रदेश सरकार सड़क हादसों को कम करने के लिए नई ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ लाने की तैयारी कर रही है। आईआईटी खड़गपुर और परिवहन विभाग द्वारा तैयार इस नीति के तहत पहली बार गाँवों, कस्बों, स्कूलों, बाज़ारों और आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा तय की जाएगी। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के सुझावों के बाद ड्राफ्ट में संशोधन कर इसे राज्य सरकार की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार का मानना है कि सड़क की प्रकृति और यातायात के अनुसार गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आएगी।
गाँवों में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई नीति
उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों में होती है। गाँवों को जोड़ने वाली सड़कों पर तेज़ रफ़्तार वाहन, स्कूलों के पास से गुजरती सड़कें, बाज़ारों में बढ़ता यातायात और सुरक्षा मानकों की कमी अक्सर दुर्घटनाओं की वजह बनती है। इन हादसों में हर साल सैकड़ों लोगों की जान जाती है और कई परिवार प्रभावित होते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार अब शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वाहनों की गति सीमा तय करने की तैयारी कर रही है।
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग और आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों ने मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस नीति के तहत पहली बार केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि गाँवों, कस्बों, स्थानीय बाज़ारों, स्कूलों और आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित की जाएगी।
हाल ही में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार मसौदे की समीक्षा की गई और कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए। इन सुझावों को शामिल करने के बाद संशोधित ड्राफ्ट राज्य सरकार को अंतिम मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर सड़क के किनारे घर, खेत, स्कूल, पशु और स्थानीय बाज़ार होते हैं। ऐसे में तेज़ रफ़्तार वाहन दुर्घटना का बड़ा कारण बनते हैं। कई गाँवों में सड़क पार करते समय बच्चे, बुज़ुर्ग और किसान सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। नई नीति के तहत सड़क की चौड़ाई, यातायात का दबाव, आबादी और सड़क के उपयोग के आधार पर अलग-अलग गति सीमा तय की जाएगी।
परिवहन विभाग ‘सेफ सिस्टम अप्रोच’ के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित वाहन, सुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता और दुर्घटना के बाद बेहतर उपचार व्यवस्था पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा स्पीड ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फ़िटनेस निरीक्षण और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से सड़क सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
सड़कों की प्रकृति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह नीति लोगों की जान बचाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग और आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों ने मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस नीति के तहत पहली बार केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि गाँवों, कस्बों, स्थानीय बाज़ारों, स्कूलों और आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित की जाएगी।
हाल ही में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार मसौदे की समीक्षा की गई और कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए। इन सुझावों को शामिल करने के बाद संशोधित ड्राफ्ट राज्य सरकार को अंतिम मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा।
ग्रामीण सड़कों पर क्यों ज़रूरी है गति सीमा?
सुरक्षित यातायात पर सरकार का ज़ोर
सड़कों की प्रकृति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह नीति लोगों की जान बचाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।