आयातित यूरिया पर सब्सिडी 128% बढ़ी, 47956 करोड़ रुपये पहुँचा सरकार का खर्च; आरटीआई में सामने आया बड़ा आंकड़ा

Gaon Connection | Aug 08, 2026, 13:32 IST
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वित्त वर्ष 2025-26 में आयातित यूरिया पर सरकारी सब्सिडी दोगुनी से अधिक बढ़कर 47,956 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि रुपये की कमजोरी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण हुई है। इसी अवधि में घरेलू यूरिया पर सब्सिडी में 8.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कुल यूरिया सब्सिडी में सालाना आधार पर लगभग 14.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

यूरिया सब्सिडी पर बढ़ा सरकार का खर्च
यूरिया सब्सिडी पर बढ़ा सरकार का खर्च
भारत में आयातित यूरिया पर सरकार की सब्सिडी का बोझ वित्त वर्ष 2025-26 में दोगुने से भी ज़्यादा बढ़ गया। एक आरटीआई के हवाले से इंडिया टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में आयातित यूरिया पर सरकार ने 47,956.24 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी, जबकि 2024-25 में यह राशि 21,000 करोड़ रुपये थी। यानी एक साल में आयातित यूरिया की सब्सिडी में 128.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक उर्वरक बाज़ार में भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, कृषि विशेषज्ञ विजय सरदाना ने इस तेज़ बढ़ोतरी के पीछे रुपये की अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर स्थिति और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को प्रमुख वजहों में बताया है। यूरिया भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला उर्वरक है। किसानों को 45 किलोग्राम की बोरी सरकार द्वारा तय सब्सिडी वाली क़ीमत पर मिलती है। किसानों के लिए यूरिया की क़ीमत को नियंत्रित रखने के कारण इसकी वास्तविक उत्पादन या आयात लागत और खुदरा क़ीमत के बीच का अंतर सरकार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी के रूप में देती है।

आयातित यूरिया पर सब्सिडी कितनी बढ़ी?

आरटीआई के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में आयातित यूरिया पर 21,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 47,956.24 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह एक ही वित्त वर्ष में आयातित यूरिया पर सरकारी सब्सिडी 128.4 प्रतिशत बढ़ गई।

घरेलू यूरिया पर सब्सिडी में आई कमी

आयातित यूरिया पर सब्सिडी बढ़ने के उलट घरेलू स्तर पर उत्पादित यूरिया की सब्सिडी में कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू यूरिया पर सब्सिडी 2024-25 में 1,03,319.50 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में घटकर 94,219.50 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें 8.8 प्रतिशत की गिरावट आई।

आयातित और घरेलू दोनों तरह के यूरिया को मिलाकर सरकार की कुल यूरिया सब्सिडी 2024-25 में 1,24,319.50 करोड़ रुपये थी। 2025-26 में यह बढ़कर 1,42,175.74 करोड़ रुपये हो गई। यानी कुल यूरिया सब्सिडी में सालाना आधार पर करीब 14.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

चालू वित्त वर्ष में भी जारी हुआ बड़ा खर्च

रिपोर्ट में दिए गए आरटीआई आँकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 23 जुलाई 2026 के बीच सरकार आयातित यूरिया पर 27,722.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी कर चुकी थी। इसी अवधि में घरेलू स्तर पर उत्पादित यूरिया के लिए 32,746.51 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई।

उर्वरक विभाग ने बताया कि वह महीने के हिसाब से यूरिया सब्सिडी का डेटा अलग से नहीं रखता। विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान अभी तैयार नहीं किए गए हैं।

महँगा आयात होने पर सरकार पर बढ़ता है बोझ

यूरिया किसानों को सरकार द्वारा तय सब्सिडी वाली क़ीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आयातित यूरिया महँगा होता है, तो उसकी अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा सरकार को वहन करना पड़ता है। आरटीआई के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक संघर्ष, रुपये की कमज़ोर स्थिति और आयातित उर्वरकों पर भारत की निर्भरता ऐसे प्रमुख कारक हैं, जिनसे सरकार पर यूरिया सब्सिडी का वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।
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