गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का बढ़ा रहा ख़तरा, विभाग ने जारी किया अलर्ट; जानिए क्या हैं बचाव के उपाय?

Preeti Nahar | May 05, 2026, 14:18 IST
Share
उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर कीटों का खतरा बढ़ गया है। गर्मी के साथ चूसक कीटों की संख्या में इजाफा हो रहा है। काला चिकटा और थ्रिप्स जैसे कीट फसल की वृद्धि में रुकावट डाल रहे हैं, जबकि सैनिक कीट भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। गन्ना शोध परिषद ने किसानों को बताया कि किसान अपने खेतों नियमित सिंचाई और सफाई करें।
अधिक तापमान से बढ़ा कीटों का खतरा<br>
अधिक तापमान से बढ़ा कीटों का खतरा
Ganna Fasal Par Chusak Keet Ka Khatra: उत्तर प्रदेश में बढ़ते तापमान के बीच गन्ना किसानों के लिए नई चिंता सामने आई है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने गन्ने की फसल पर चूसक कीटों के बढ़ते प्रकोप को लेकर अलर्ट जारी किया है। शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद विभाग के अपर गन्ना आयुक्त वीके शुक्ला ने बताया कि इस समय प्रदेश में गन्ने की पौध और पेड़ी फसल पर कई तरह के कीटों का हमला देखा जा रहा है, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने किसानों के लिए जरूरी सलाह और बचाव के उपाय जारी किए हैं।

Headline:
रिकॉर्ड खरीद, डिजिटल खेती और नई योजनाओं से बदलेगी किसानों की तस्वीर: CM मोहन यादव
भोपाल, 5 मई:
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में किसानों के लिए बड़े फैसलों का साल बनाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रिकॉर्ड फसल खरीद, आधुनिक भंडारण व्यवस्था और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से खेती को लाभ का सौदा बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार चाहती है कि किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और तकनीकदाता भी बनें।
गेहूं स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ी
किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीद की स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है। इससे वे किसान भी अपनी उपज बेच सकेंगे जो पहले स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेश में 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।
चना और मसूर की खरीद 28 मई तक
सरकार ने चना और मसूर उत्पादक किसानों को भी राहत दी है। प्राइस सपोर्ट स्कीम 2026 के तहत करीब 600 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। चना और मसूर की खरीद 30 मार्च से 28 मई 2026 तक जारी रहेगी। सरकार ने चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन और मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है। वहीं तुअर खरीद के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
किसानों को समय पर मिलेगा भुगतान
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
भंडारण क्षमता में बड़ा विस्तार
फसलों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता तैयार की गई है। इसके अलावा 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 11 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है।
डिजिटल खेती को बढ़ावा
राज्य सरकार खेती को स्मार्ट बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। ई-विकास और ई-किसान प्रणाली के जरिए किसानों को मोबाइल पर योजनाओं की जानकारी, मंडी भाव, मौसम अपडेट और तकनीकी सलाह दी जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से यह व्यवस्था सभी जिलों में लागू हो चुकी है।
हर खेत की होगी डिजिटल पहचान
सरकार हर किसान को यूनिक आईडी दे रही है, जिसमें उसकी जमीन और फसल का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में होगा। खेतों की जियो-टैगिंग की जा रही है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन के जरिए दवा छिड़काव जैसे काम आसान होंगे।
प्राकृतिक खेती और ड्रोन तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और 6 हजार से ज्यादा क्लस्टर बनाए गए हैं। इसके साथ ही 1 हजार से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटर तैयार किए गए हैं, जो आधुनिक खेती को बढ़ावा देंगे।
खेती को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष’ सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि खेती की दिशा बदलने की बड़ी पहल है। सरकार का लक्ष्य है कि नई तकनीक और बेहतर योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जाए और खेती को आत्मनिर्भर बनाया जाए।


अधिक तापमान से बढ़ा कीटों का खतरा

शोध परिषद के मुताबिक प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और शुष्क मौसम के कारण गन्ने की फसल में चूसक कीट तेजी से फैल रहे हैं। इन कीटों के कारण पौधों की वृद्धि रुक सकती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। खासतौर पर पेड़ी फसल में इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है।

काला चिकटा कीट कैसे पहुँचाता है नुकसान?

काला चिकटा एक चूसक कीट है, जिसका रंग काला होता है। इसका प्रकोप आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच अधिक तापमान और शुष्क मौसम में बढ़ जाता है। यह कीट पेड़ी फसल में ज्यादा और बावक फसल में कम दिखाई देता है। इसके प्रकोप से गन्ने की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। इसके शिशु पत्रकंचुक और गन्ने के गोंफ के बीच पाए जाते हैं। शिशु और प्रौढ़ दोनों ही पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है।

थ्रिप्स कीट भी बन रहा परेशानी

थ्रिप्स बहुत छोटे आकार का कीट होता है, जिसकी लंबाई करीब 2 से 3 मिलीमीटर होती है। मादा कीट गहरे भूरे रंग की होती है, जबकि नर हल्के रंग का होता है। यह कीट गर्म और शुष्क मौसम में तेजी से फैलता है। थ्रिप्स पत्तियों की ऊपरी सतह के अंदर अंडे देता है और निकलने वाले निम्फ पत्तियों का रस चूसते हैं। इससे पत्तियों का अगला हिस्सा मुड़कर नुकीला हो जाता है और पत्तियां ऊपर से नीचे तक सफेद या पीली दिखाई देने लगती हैं। हालांकि बारिश शुरू होने के बाद इनकी संख्या कम होने लगती है।

सैनिक कीट भी पहुँचा रहा नुकसान

सैनिक कीट गन्ने की पत्तियों को कुतरकर नुकसान पहुँचाता है। इसकी सूंडी अवस्था सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। मादा कीट पत्तियों में एक समूह में अंडे देती है और पेड़ी फसल में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है।

कैसे करें बचाव?

शोध वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों की नियमित सिंचाई करते रहें ताकि नमी बनी रहे। खेतों को खरपतवार और गन्ने की सूखी पत्तियों से साफ रखें। संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करें। कीट नियंत्रण के लिए सुबह या शाम के समय प्रोफेनोफॉस 40 प्रतिशत + साइपरमेन्थिन 4 प्रतिशत ईसी 750 मिली (संयुक्त उत्पाद) या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 200 मिली दवा को प्रति हेक्टेयर 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान समय रहते कीटों की पहचान करें और तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं। लापरवाही करने पर फसल की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है।
Tags:
  • Sugarcane pest alert
  • Sucking pests in sugarcane
  • चूसक कीटों का प्रकोप
  • गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का बढ़ा खतरा
  • ganna fasal par chusak keet ka khatra
  • up sugarcane farmers news
  • sugarcane crop pest control tips
  • black bug in sugarcane crop
  • thrips attack on sugarcane
  • sugarcane army worm alert