खरीफ़ सीज़न में खाद की कमी नहीं होगी, सरकार के पास 163.65 लाख टन भंडार; उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक
Gaon Connection | Jul 07, 2026, 12:30 IST
केंद्र सरकार ने कहा है कि खरीफ़ सीज़न में उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी। 2 जुलाई तक देश में 163.65 लाख टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है, जो अनुमानित आवश्यकता का 43 प्रतिशत है। पहली तिमाही में यूरिया और डीएपी का उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहा है। प्राकृतिक गैस आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता से चल रहे हैं। सरकार ने आयात और भंडारण व्यवस्था भी मज़बूत की है।
खाद की नहीं होगी कमी
खरीफ़ सीज़न के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने पर्याप्त भंडारण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने का दावा किया है। सरकार के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में खरीफ़ सीज़न के लिए देश में 383.9 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान है। इसके मुकाबले 2 जुलाई तक देश में 163.65 लाख टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है, जो कुल अनुमानित आवश्यकता का लगभग 43 प्रतिशत है। सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन लगातार बढ़ने के कारण जुलाई से सितंबर के दौरान भी माँग पूरी करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।
सरकार के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में यूरिया और डीएपी का उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान प्रभावित हुई प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अब पूरी तरह सामान्य हो गई है, जिससे देश के सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पर्याप्त भंडारण, घरेलू उत्पादन और आयात की बेहतर व्यवस्था के चलते किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
2 जुलाई तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, देश में यूरिया का भंडार 69.08 लाख टन, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का 16.64 लाख टन, म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) का 8.90 लाख टन, कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का 45.64 लाख टन और सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का 23.09 लाख टन था। इस प्रकार कुल उपलब्ध उर्वरक भंडार 163.65 लाख टन पर पहुँच गया।
सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूरिया का घरेलू उत्पादन 71.55 लाख टन रहा, जबकि लक्ष्य 67.86 लाख टन था। इसी तरह डीएपी का उत्पादन 9.84 लाख टन दर्ज किया गया, जो 8.61 लाख टन के लक्ष्य से अधिक है। वहीं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का उत्पादन 20.77 लाख टन और एसएसपी का उत्पादन 13.50 लाख टन रहा।
सरकार ने यह भी बताया कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रभावित होने से यूरिया संयंत्रों को गैस की उपलब्धता घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई थी। अब गैस आपूर्ति पूरी तरह बहाल होकर 100 प्रतिशत हो गई है, जिससे सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता पर संचालित हो रहे हैं।
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, आयातित उर्वरकों और कच्चे माल की आपूर्ति भी सामान्य हो रही है। उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले 20 जहाज़ों में से 15 सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और तय समय के अनुसार भारतीय बंदरगाहों तक पहुँचने वाले हैं। इनमें आठ जहाज़ 3.32 लाख टन यूरिया, चार जहाज़ 2.57 लाख टन डीएपी और तीन जहाज़ 1.11 लाख टन सल्फर लेकर आ रहे हैं।
इसके अलावा पाँच अन्य जहाज़ भी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हैं। इनमें एक जहाज़ 0.25 लाख टन अमोनिया और दूसरा 0.45 लाख टन यूरिया लेकर आ रहा है। वहीं दो अतिरिक्त यूरिया जहाज़ों और एक सल्फर जहाज़ पर लोडिंग का काम भी जारी है।
सरकार ने बताया कि समय रहते योजना बनाने, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और लगातार निगरानी के कारण उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई। साथ ही नए आयात स्रोत भी विकसित किए गए। यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फ़िनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड से सुनिश्चित की गई है। वहीं डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खेप रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के माध्यम से मँगाई जा रही है।
केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिससे उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं और आपूर्ति में अधिक समय लगने लगा। इसके बावजूद सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात स्रोतों में विविधता लाने और पर्याप्त भंडारण बनाए रखने के कारण देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक बनाए रखी है।
सरकार के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में यूरिया और डीएपी का उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान प्रभावित हुई प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अब पूरी तरह सामान्य हो गई है, जिससे देश के सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पर्याप्त भंडारण, घरेलू उत्पादन और आयात की बेहतर व्यवस्था के चलते किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
यूरिया और डीएपी का उत्पादन लक्ष्य से अधिक, सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से चालू
सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूरिया का घरेलू उत्पादन 71.55 लाख टन रहा, जबकि लक्ष्य 67.86 लाख टन था। इसी तरह डीएपी का उत्पादन 9.84 लाख टन दर्ज किया गया, जो 8.61 लाख टन के लक्ष्य से अधिक है। वहीं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का उत्पादन 20.77 लाख टन और एसएसपी का उत्पादन 13.50 लाख टन रहा।
सरकार ने यह भी बताया कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रभावित होने से यूरिया संयंत्रों को गैस की उपलब्धता घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई थी। अब गैस आपूर्ति पूरी तरह बहाल होकर 100 प्रतिशत हो गई है, जिससे सभी यूरिया संयंत्र पूर्ण क्षमता पर संचालित हो रहे हैं।
कई देशों से मँगाए गए उर्वरक, सरकार ने समय पर उपलब्धता का भरोसा जताया
इसके अलावा पाँच अन्य जहाज़ भी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हैं। इनमें एक जहाज़ 0.25 लाख टन अमोनिया और दूसरा 0.45 लाख टन यूरिया लेकर आ रहा है। वहीं दो अतिरिक्त यूरिया जहाज़ों और एक सल्फर जहाज़ पर लोडिंग का काम भी जारी है।
सरकार ने बताया कि समय रहते योजना बनाने, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और लगातार निगरानी के कारण उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई। साथ ही नए आयात स्रोत भी विकसित किए गए। यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फ़िनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड से सुनिश्चित की गई है। वहीं डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खेप रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के माध्यम से मँगाई जा रही है।
केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिससे उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं और आपूर्ति में अधिक समय लगने लगा। इसके बावजूद सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात स्रोतों में विविधता लाने और पर्याप्त भंडारण बनाए रखने के कारण देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक बनाए रखी है।