ड्रिप इरीगेशन से यूपी में गन्ने की पैदावार 25% बढ़ी, एथनॉल उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, सरकार का बड़ा दावा
Gaon Connection | Apr 28, 2026, 17:59 IST
उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती में ड्रिप इरीगेशन तकनीक से बड़ा बदलाव आया है। इस तकनीक से गन्ने की पैदावार करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। पानी और खाद की बचत से किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है। यह तकनीक कम बारिश और क्षारीय जमीन में भी खेती को संभव बना रही है।
यूपी में गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती में बदलाव की एक नई तस्वीर सामने आई है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के मुताबिक ड्रिप इरीगेशन तकनीक अपनाने से न सिर्फ पैदावार बढ़ी है, बल्कि किसानों की आय में भी साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभाग का कहना है कि यह तकनीक अब खेती को ज्यादा किफायती और टिकाऊ बना रही है।
गन्ना विभाग के अनुसार, “पिछले 9 वर्षों में 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में ड्रिप इरीगेशन संयंत्र स्थापित किए गए हैं और जहां-जहां इसका उपयोग हो रहा है, वहां उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।” विभाग ने बताया कि ड्रिप इरीगेशन में बूंद-बूंद पानी सीधे पौधों तक पहुंचता है, जिससे पानी की लगभग 50 प्रतिशत तक बचत होती है। साथ ही उर्वरकों को पानी में मिलाकर देने से उनकी भी करीब उतनी ही बचत हो रही है, जिससे लागत कम हुई है और किसानों की आय बढ़ी है।
गन्ना विभाग का कहना है, “ड्रिप इरीगेशन के जरिए क्षारयुक्त और कम बारिश वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हो पाई है।”
पिछले कुछ वर्षों में इसके फायदे देखने के बाद इसे अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे खेती के पारंपरिक तरीके बदलते नजर आ रहे हैं।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, “वर्ष 2017 तक प्रदेश में सिर्फ 37 चीनी मिलों में एथनॉल प्लांट थे, जिनकी क्षमता करीब 88 करोड़ लीटर थी, लेकिन उत्पादन केवल 42 करोड़ लीटर था।”
वहीं अब स्थिति बदल चुकी है। विभाग के अनुसार, “वर्तमान में 53 चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर करीब 258 करोड़ लीटर सालाना हो गई है और वास्तविक उत्पादन भी बढ़कर 137 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।”
गन्ना विभाग का मानना है कि ड्रिप इरीगेशन जैसी तकनीकों से खेती में पानी और उर्वरकों की बचत के साथ उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे किसानों की आय में सीधा फायदा हो रहा है। यह मॉडल प्रदेश में खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
73 हजार हेक्टेयर में ड्रिप सिस्टम, 25% तक बढ़ा उत्पादन
कम बारिश और क्षारीय जमीन में भी सफल खेती
पिछले कुछ वर्षों में इसके फायदे देखने के बाद इसे अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे खेती के पारंपरिक तरीके बदलते नजर आ रहे हैं।
एथनॉल उत्पादन में भी बड़ा उछाल
वहीं अब स्थिति बदल चुकी है। विभाग के अनुसार, “वर्तमान में 53 चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर करीब 258 करोड़ लीटर सालाना हो गई है और वास्तविक उत्पादन भी बढ़कर 137 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।”