सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी मानसून की ताकत, लक्षद्वीप पर घने बादलों का डेरा, केरल में दस्तक पर अब भी सस्पेंस
Gaon Connection | May 30, 2026, 14:25 IST
देशभर में किसान मानसून का इंतजार कर रहे हैं। लक्षद्वीप के पास घने बादल बन गए हैं और बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी टलती दिख रही है। हवाओं की दिशा और मजबूती अभी अनुकूल नहीं है।
मानसून का काउंटडाउन शुरू
देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए एक तरफ अच्छी तो दूसरी तरफ चिंता बढ़ाने वाली खबर है। केरल तट के पास लक्षद्वीप क्षेत्र में घने बादलों का बड़ा समूह बन गया है और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी दोनों ओर गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसके बावजूद दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी टलती दिख रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादल तो मौजूद हैं, लेकिन मानसून के आगे बढ़ने के लिए जरूरी वायुमंडलीय परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं बनी हैं।
शनिवार दोपहर के सैटेलाइट तस्वीरों में लक्षद्वीप और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में घने और संगठित बादलों का बड़ा समूह दिखाई दिया। इन बादलों के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और बारिश की गतिविधियां भी दर्ज की गईं। मौसम विशेषज्ञ इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। हालांकि केवल बादलों का बनना ही मानसून के आगमन की गारंटी नहीं है। इसके लिए समुद्र से आने वाली हवाओं की दिशा और उनकी मजबूती भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र तल से करीब 4.5 किलोमीटर ऊंचाई पर चलने वाली हवाओं का दक्षिण-पश्चिमी दिशा में मुड़ना और मजबूत होना मानसून की दस्तक के लिए जरूरी है। फिलहाल ये हवाएं पूर्वी दिशा से चल रही हैं, जो मानसून के अनुकूल नहीं मानी जातीं। यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले तीन से चार दिनों में हवाओं की दिशा बदल सकती है। यदि ऐसा होता है तो 3 से 5 जून के बीच केरल में मानसून के प्रवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने लक्षद्वीप के पास दक्षिण-पूर्व अरब सागर में एक चक्रवाती परिसंचरण की मौजूदगी दर्ज की है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है। लेकिन IMD के संख्यात्मक मॉडल संकेत दे रहे हैं कि निचले स्तर की हवाएं 4-5 जून तक उत्तर-पश्चिमी बनी रह सकती हैं। यही कारण है कि मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मॉडलों के अनुमान में कुछ अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ मॉडल अब 9 जून के आसपास बेहतर परिस्थितियां बनने की संभावना जता रहे हैं।
मौसम प्रणाली को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में कई चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइनें सक्रिय हैं। आमतौर पर मानसून के मजबूत होने पर ऐसी प्रणालियां कमजोर पड़ने लगती हैं, लेकिन फिलहाल उनकी मौजूदगी मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर रही है।
देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की तैयारी शुरू हो चुकी है। धान, मक्का, सोयाबीन और दलहनी फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून की समय पर शुरुआत पर निर्भर करती है। ऐसे में मानसून की हर गतिविधि पर किसानों की नजर बनी हुई है। फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां सक्रिय हैं, लेकिन मानसून के औपचारिक आगमन के लिए जिस तरह की व्यापक वायुमंडलीय एकरूपता की जरूरत होती है, उसका इंतजार अभी बाकी है।