यूपी में स्वामित्व योजना को बड़ी सफलता, 90573 गाँवों का ड्रोन सर्वे पूरा; 1 करोड़ से ज़्यादा प्रॉपर्टी कार्ड वितरित
Gaon Connection | Jul 21, 2026, 18:52 IST
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत सभी 90,573 योजना में शामिल गाँवों का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। अब तक करीब 67 हज़ार गाँवों में 1.01 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 75 हज़ार गाँवों के लिए 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार हो चुके हैं। सरकार ने योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है, ताकि शेष गाँवों में भी काम पूरा किया जा सके।
सितंबर 2026 तक पूरा होगा स्वामित्व योजना का काम
उत्तर प्रदेश में स्वामित्व (SVAMITVA) योजना ने बड़ा पड़ाव हासिल किया है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) ने बताया है कि राज्य के सभी 90,573 योजना में शामिल गाँवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इसके साथ ही करीब 67 हज़ार गाँवों में 1.01 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड ग्रामीणों को सौंपे जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस योजना से गाँवों में संपत्तियों का पक्का रिकॉर्ड तैयार हो रहा है, जिससे ज़मीन और मकान से जुड़े विवाद कम होंगे और लोगों को अपनी संपत्ति का आधिकारिक दस्तावेज़ मिलेगा।
मंत्रालय के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के करीब 75 हज़ार गाँवों के लिए 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। यह योजना में शामिल कुल गाँवों का लगभग 83 प्रतिशत है। वहीं, बाकी गाँवों में काम पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने स्वामित्व योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है। इसके लिए ड्रोन सर्वे और कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से मकानों और दूसरी संपत्तियों की सटीक मैपिंग और सीमांकन किया जाता है। सरकार का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का प्रमाण मिलेगा और भविष्य में ज़मीन व मकान से जुड़े विवादों में कमी आएगी। इससे संपत्ति के रिकॉर्ड को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी।
योजना के तहत केवल ड्रोन सर्वे ही नहीं किया जाता, बल्कि सर्वे पूरा होने के बाद ज़मीनी स्तर पर सत्यापन भी कराया जाता है। यदि किसी संपत्ति को लेकर कोई आपत्ति या विवाद सामने आता है, तो उसका निपटारा राज्य सरकार के सक्षम अधिकारियों द्वारा किया जाता है। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति के नाम प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाता है। सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य संपत्तियों का सही सीमांकन सुनिश्चित करना और सही व्यक्ति को ही स्वामित्व का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ओर से यह जानकारी केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत सभी 90,573 योजना में शामिल गाँवों का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड दिए जा चुके हैं और शेष काम सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्रालय के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के करीब 75 हज़ार गाँवों के लिए 1.20 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। यह योजना में शामिल कुल गाँवों का लगभग 83 प्रतिशत है। वहीं, बाकी गाँवों में काम पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने स्वामित्व योजना की अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है।