Telangana Caste Survey: ‘जाति सर्वे’ के जारी हुए आँकड़े, शौचालय, जानिए बिजली और पानी पर गाँवों की हकीकत
Gaon Connection | Apr 16, 2026, 15:37 IST
तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण से पता चला की प्रदेश के कई क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के आभाव में जी रहे हैं, जहाँ शौचालय, बिजली और साफ पानी तक उपलब्ध नहीं हैं। विशेषकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों को इस असुविधा का सबसे अधिक सामना करना पड़ रहा है।
तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने जारी किए जातिगत सर्वे
तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण ने दिखाया है कि गाँवों में आज भी शौचालय, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, खासकर SC और ST समुदायों में। सरकारी ODF Plus दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं। यह रिपोर्ट ग्रामीण विकास में असमानता और सुधार की जरूरत को उजागर करती है।
तेलंगाना में 2024-25 के जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 13.3 प्रतिशत घरों में अब भी शौचालय नहीं है, जबकि करीब 5.8 प्रतिशत घरों में बिजली की सुविधा नहीं पहुंँच पाई है। वहीं, 21.2 प्रतिशत घर ऐसे हैं जहाँ नल से पानी की आपूर्ति नहीं होती। ये आंकड़े दिखाते हैं कि बुनियादी सुविधाओं के मामले में अभी भी बड़ी खाई मौजूद है।
हर दस में से एक से ज्यादा घर में शौचालय का न होना सिर्फ एक सुविधा की कमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। गांवों में खासकर महिलाओं और लड़कियों को इसका सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ता है। खुले में शौच की मजबूरी से उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा तीनों प्रभावित होते हैं।
बिजली के मामले में भी यही तस्वीर नजर आती है। ST के 11% और SC के 8.3% घरों में बिजली नहीं है जबकि सामान्य वर्ग में यह केवल 2.7% है। नल से पानी की पहुँच भी असमान है। कुल 21.2% घरों में पानी नहीं आता। SC, ST और BC वर्गों में यह समस्या ज्यादा है, जबकि सामान्य वर्ग अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि सामान्य वर्ग के परिवारों के पास कार होने की संभावना OBC परिवारों से तीन गुना और SC/ST परिवारों से करीब पांच गुना ज्यादा है। यह आर्थिक असमानता को भी साफ दर्शाता है।
यह सर्वे, जिसे आमतौर पर ‘जाति जनगणना’ कहा जा रहा है, राज्य के करीब 3.55 करोड़ लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सामने लाता है। इसमें हर व्यक्ति से जुड़ी 75 तरह की जानकारियां जुटाई गई हैं, जिससे समाज की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिलती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के तहत जुलाई 2024 तक तेलंगाना के 8,990 गाँवों को ODF Plus घोषित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि ये गाँव खुले में शौच से मुक्त हैं और वहाँ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी है। लेकिन दूसरी तरफ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अभी भी कई घरों में शौचालय नहीं हैं। यह सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करता है। अगर इन असमानताओं को दूर नहीं किया गया, तो विकास की रफ्तार भी असमान ही बनी रहेगी।
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रिपोर्ट में सामने आई बुनियादी सुविधाओं की कमी
स्वच्छता की कमी, महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती
जातिगत असमानता साफ दिखाई दी
- सर्वे में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि बुनियादी सुविधाओं में जातिगत असमानता गहरी है।
- अनुसूचित जनजाति (ST) के 32.5% और अनुसूचित जाति (SC) के 18.8% घरों में शौचालय नहीं हैं जबकि पिछड़ा वर्ग (BC) में यह आंकड़ा 10.8% और सामान्य वर्ग में सिर्फ 4.5% है
- यह अंतर दिखाता है कि समाज के कमजोर वर्ग अब भी बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं।
बिजली और पानी में भी असमानता
आर्थिक स्थिति में भी बड़ा अंतर
3.55 करोड़ लोगों की तस्वीर दिखाता है सर्वे
ODF Plus का दावा और जमीनी हकीकत
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