अल नीनो की चुनौती से निपटने को लेकर सरकार अलर्ट, जानें खरीफ फसलों को बचाने के लिए क्या प्लान हो रहा तैयार
Gaon Connection | May 28, 2026, 15:11 IST
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल नीनो के संभावित असर से खरीफ फसलों को बचाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है। जिन जिलों में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, वहां के लिए अलग से कंटिजेंसी प्लान तैयार किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर फसलों में बदलाव भी किया जाएगा।
क्या है अल नीनो
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल नीनो के संभावित असर से खरीफ फसलों को बचाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि चिंता करने के बजाय पहले से तैयारी करना ज्यादा जरूरी है और इसी दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन जिलों में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, वहां के लिए अलग से कंटिजेंसी प्लान तैयार किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर फसलों में बदलाव भी किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ऐसे जिलों की पहचान करने में जुटा है, जहां अल नीनो का असर पड़ सकता है। इसके साथ ही वैकल्पिक फसलों के लिए बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि मौसम की मार का असर किसानों पर कम से कम पड़े और समय रहते जरूरी तैयारी पूरी कर ली जाए।
अल नीनो एक मौसम संबंधी स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से के समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इसका असर भारत समेत कई देशों के मौसम पर पड़ता है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में कम बारिश और ज्यादा गर्मी देखने को मिलती है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अप्रैल में जारी अपने पहले पूर्वानुमान में 2026 के लिए सामान्य से कम मानसून की संभावना जताई थी। विभाग के मुताबिक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत का करीब 92 प्रतिशत रह सकता है। वहीं विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और अमेरिकी एजेंसी एनओएए ने भी मई-जून के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने और साल के आखिर तक बने रहने की आशंका जताई है।
देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की शुरुआती तैयारी शुरू हो चुकी है। जिन इलाकों में प्री-मानसून बारिश हुई है, वहां किसान दलहन, मोटे अनाज और कपास जैसी कम अवधि वाली फसलों की शुरुआती बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। आमतौर पर खरीफ फसलों की मुख्य बुवाई जून में शुरू होती है और मानसून के आगे बढ़ने के साथ जून-जुलाई में तेजी पकड़ती है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून से पहले किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाए जाएं। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने और फार्मर आईडी जारी करने की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया है। उन्होंने नकली बीज, खाद और कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
शिवराज सिंह चौहान ने “टीम एग्रीकल्चर- वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम” की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि खेती को लेकर राज्यों को भी गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि अगर कृषि मंत्री ऐसे सम्मेलनों में शामिल नहीं होंगे तो वह खुद मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे। सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों, आईसीएआर, कृषि संस्थानों और अन्य हितधारकों ने खरीफ सीजन की तैयारियों और कृषि रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
वैकल्पिक फसलों और बीज उपलब्धता पर सरकार का फोकस
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अप्रैल में जारी अपने पहले पूर्वानुमान में 2026 के लिए सामान्य से कम मानसून की संभावना जताई थी। विभाग के मुताबिक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत का करीब 92 प्रतिशत रह सकता है। वहीं विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और अमेरिकी एजेंसी एनओएए ने भी मई-जून के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने और साल के आखिर तक बने रहने की आशंका जताई है।