गुजरात के गिर जंगल में संक्रमण का खतरा बढ़ा, 4 शावकों की मौत के बाद आइसोलेशन में रखे गए 17 शेर, CM ने बुलाई हाई लेवल बैठक
Gaon Connection | May 28, 2026, 10:59 IST
गिर जंगल में चार शेर शावकों की मौत से वन विभाग अलर्ट हो गया है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए 17 वयस्क शेरों को आइसोलेशन में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र के शेरों पर नजर रखी जा रही है। अमरेली और भावनगर में भी निगरानी बढ़ाई गई है।
गिर जंगल में शेर शावकों की मौत से बढ़ी चिंता
गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में संदिग्ध संक्रमण के कारण चार शेर शावकों की मौत के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए 17 वयस्क शेरों को आइसोलेशन में रखकर उनकी निगरानी और इलाज शुरू कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव विनोद राव ने मुख्यमंत्री को बताया कि गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र के 10 किलोमीटर दायरे में मौजूद सभी शेरों पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल अन्य शेरों में संक्रमण जैसे कोई गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
वन विभाग अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्रों में मौजूद शेरों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। विभाग की ओर से रोजाना रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके। गर्मियों की शुरुआत में फैलने वाली मौसमी बीमारियों को देखते हुए गिर क्षेत्र में 350 से अधिक शेरों के लिए डी-टिकिंग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत शेरों के शरीर से परजीवी कीड़ों को हटाने और संक्रमण रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
वन विभाग ने जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भी इस अभियान में शामिल किया है। डॉक्टरों की टीम शेरों के स्वास्थ्य की लगातार जांच कर रही है और संक्रमण के संभावित कारणों का पता लगाने में जुटी है। वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को बताया था कि दो शेर शावकों की मौत संदिग्ध बेबेसिया वायरस संक्रमण के कारण हुई है, जबकि तीन अन्य शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष की वजह से हुई थी। हालांकि उन्होंने गिर जंगल में किसी बड़े महामारी जैसे हालात से इनकार किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बेबेसिया वायरस टिक यानी परजीवी कीड़ों के जरिए फैलता है। संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक से स्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसी वजह से वन विभाग डी-टिकिंग अभियान पर विशेष जोर दे रहा है।
गुजरात में इससे पहले वर्ष 2018 में भी एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी। उस समय मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और प्रोटोजोअल संक्रमण का संयुक्त असर माना गया था। हालांकि इसके बाद वन विभाग ने निगरानी और स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया। वर्ष 2025 तक गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 तक पहुंच चुकी है।
गुजरात का गिर नेशनल पार्क वर्ष 1965 में स्थापित किया गया था। यह दुनिया में एशियाई शेरों का आखिरी प्राकृतिक आवास माना जाता है। यही वजह है कि यहां किसी भी संक्रमण या बीमारी की घटना को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद गंभीर माना जाता है।