विलंबित मानसून में भी समय पर होगी धान रोपाई, कृषि विभाग ने किसानों को बताया तरीका, जानें क्या है चरणबद्ध धान नर्सरी?
Gaon Connection | Jun 04, 2026, 14:45 IST
बिहार के किसानों के लिए अच्छी खबर है। मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग ने चरणबद्ध धान नर्सरी प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। यह तकनीक किसानों को मौसम के जोखिम से बचाएगी और समय पर रोपाई सुनिश्चित करेगी। छोटे किसानों के लिए सामुदायिक मॉडल भी फायदेमंद होगा। सारण जिले में यह प्रयोग सफल रहा है।
धान रोपाई में देरी की चिंता खत्म
बिहार में मानसून के अनिश्चित रुख और बारिश में संभावित देरी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को चरणबद्ध धान नर्सरी (स्टैगर्ड नर्सरी) प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि यह तकनीक किसानों को मौसम संबंधी जोखिमों से बचाने के साथ-साथ समय पर रोपाई सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से सूखा, विलंबित मानसून और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में यह मॉडल काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार चरणबद्ध नर्सरी प्रणाली में धान की नर्सरी एक बार में तैयार करने के बजाय 1 से 2 सप्ताह के अंतराल पर दो या तीन चरणों में लगाई जाती है। इससे किसानों के पास अलग-अलग समय पर तैयार होने वाले पौधों का विकल्प उपलब्ध रहता है। यदि मौसम की वजह से रोपाई में देरी होती है तो भी 25 से 28 दिन आयु के स्वस्थ पौधे आसानी से मिल सकते हैं।
विभाग की सलाह के मुताबिक पहली नर्सरी जून के प्रथम पखवाड़े में लंबी अवधि (150 दिन से अधिक) वाली धान किस्मों के लिए तैयार की जानी चाहिए। दूसरी नर्सरी जून के अंतिम सप्ताह में मध्यम और अल्प अवधि (110-135 दिन) वाली किस्मों के लिए लगाई जा सकती है। वहीं तीसरी नर्सरी जुलाई के दूसरे सप्ताह में केवल अल्प अवधि (110-115 दिन) वाली किस्मों के लिए तैयार करने की सिफारिश की गई है।
कृषि विभाग का कहना है कि मानसून के देर से आने पर अक्सर किसानों को रोपाई टालनी पड़ती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। चरणबद्ध नर्सरी अपनाने से किसानों के पास हमेशा रोपाई योग्य पौधे उपलब्ध रहते हैं। यदि पहली नर्सरी किसी कारण से खराब हो जाए तो दूसरी या तीसरी नर्सरी सहारा बन सकती है। इससे दोबारा नर्सरी तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती और फसल नुकसान का जोखिम कम हो जाता है।
कृषि विभाग ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामुदायिक चरणबद्ध नर्सरी मॉडल को भी बढ़ावा देने की बात कही है। इस मॉडल में किसान समूह बनाकर सामूहिक रूप से नर्सरी तैयार करते हैं और सिंचाई, श्रम तथा अन्य संसाधनों का साझा उपयोग करते हैं। इससे लागत कम होती है और जरूरत पड़ने पर सभी किसानों को समय पर पौधे उपलब्ध हो जाते हैं।
विभाग के अनुसार सारण जिले के अपहर और दहियरा गांवों में निकरा परियोजना के तहत वर्ष 2011 से 2021 के बीच सामुदायिक चरणबद्ध नर्सरी मॉडल का सफल प्रयोग किया गया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी 15 दिन के अंतराल पर नर्सरी तैयार करने से किसानों को मौसम के अनुसार उपयुक्त पौधे मिले और रोपाई कार्य सुचारु रूप से जारी रहा।
कृषि विभाग का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की बढ़ती अनिश्चितता के बीच चरणबद्ध धान नर्सरी प्रणाली किसानों के लिए एक सुरक्षित, व्यावहारिक और जलवायु-अनुकूल खेती मॉडल बन सकती है। विभाग ने किसानों से इस तकनीक को अपनाने की अपील करते हुए कहा है कि इससे समय पर रोपाई, बेहतर फसल प्रबंधन और अधिक उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।
क्या है चरणबद्ध धान नर्सरी प्रणाली?
तीन चरणों में तैयार की जाती है नर्सरी
मौसम की मार से बचाव में मददगार
छोटे किसानों के लिए सामुदायिक मॉडल
सारण जिले में सफल रहा प्रयोग
मानसून के असामान्य रहने की स्थिति में किसानों को चरणबद्ध धान की नर्सरी तैयार करने का सुझाव/सलाह।
— Agriculture Department, Govt. of Bihar (@Agribih) June 4, 2026
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