टमाटर-प्याज़-आलू ने जुलाई में बढ़ाई वेज थाली की क़ीमत, चिकन ने दी नॉन-वेज खाने वालों को राहत, जानें दोनों थालियों के दाम
Umang | Aug 10, 2026, 11:56 IST
जुलाई में टमाटर, प्याज़ और आलू की बढ़ती क़ीमतों से वेज थाली 4% महंगी होकर ₹28.1 पहुंच गई। हालांकि, पिछले साल की तुलना में वेज थाली 14% और नॉन-वेज थाली करीब 13% सस्ती रही। टमाटर की क़ीमत महीने में 31% बढ़ी, जबकि इसकी आवक 27% घटी। दाल और चावल सस्ते हुए, लेकिन तेल और एलपीजी महंगे रहे। ब्रॉयलर चिकन सस्ता होने से नॉन-वेज थाली की क़ीमत में राहत मिली।
वेज थाली का खर्च बढ़ा, नॉन-वेज का घटा;
जुलाई में टमाटर, प्याज़ और आलू की क़ीमतों में बढ़ोतरी का असर घर में बनने वाली शाकाहारी थाली पर पड़ा है। क्रिसिल की ताज़ा रोटी राइस रेट रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में वेज थाली की औसत क़ीमत जून के ₹27.1 से 4 प्रतिशत बढ़कर ₹28.1 हो गई। इसके उलट, नॉन-वेज थाली की औसत क़ीमत जून के ₹54.8 से 2 प्रतिशत घटकर ₹53.5 रह गई। यह इंडेक्स उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में घर पर थाली तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों की क़ीमतों के आधार पर तैयार किया जाता है।
हालांकि जुलाई में वेज थाली महीने-दर-महीने महंगी हुई, लेकिन पिछले साल के मुक़ाबले तस्वीर अलग है। जुलाई में वेज थाली की क़ीमत पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 14 प्रतिशत कम रही। वहीं, नॉन-वेज थाली भी सालाना आधार पर क़रीब 13 प्रतिशत सस्ती रही। सब्ज़ियों की क़ीमतों में सालाना गिरावट और ब्रॉयलर चिकन के सस्ता होने से दोनों तरह की थालियों की कुल क़ीमत पिछले साल की तुलना में कम बनी हुई है। हालांकि जुलाई में टमाटर की क़ीमत बढ़ने से मानसून के दौरान घरेलू खाद्य बजट पर दबाव बढ़ा है।
जुलाई में वेज थाली की क़ीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह टमाटर रहा। इसकी क़ीमत में महीने-दर-महीने 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि मंडियों में टमाटर की आवक 27 प्रतिशत घट गई। मानसून के दौरान आपूर्ति में मौसमी कमी का असर इसकी क़ीमत पर पड़ा। इसके अलावा जुलाई में आलू की क़ीमत 2 प्रतिशत और प्याज़ की क़ीमत 5 प्रतिशत बढ़ी। इन तीनों प्रमुख सब्ज़ियों की बढ़ी क़ीमत ने घर की वेज थाली को महंगा किया।
महीने-दर-महीने क़ीमत बढ़ने के बावजूद प्रमुख सब्ज़ियाँ पिछले साल की तुलना में अब भी सस्ती हैं। जुलाई में टमाटर की क़ीमत सालाना आधार पर 36 प्रतिशत घटकर ₹42 प्रति किलो रही, जबकि पिछले साल जुलाई में यह ₹66 प्रति किलो थी। इसी तरह आलू की क़ीमत 30 प्रतिशत और प्याज़ की क़ीमत 36 प्रतिशत कम रही। पिछले साल आलू की क़ीमत ब्लाइट संक्रमण और ख़राब मौसम के कारण फ़सल को हुए नुकसान से बढ़ गई थी। इस साल प्याज़ का उत्पादन अधिक रहने से आपूर्ति बेहतर हुई और इसकी क़ीमत में कमी आई।
वेज थाली की सालाना क़ीमत कम रहने में दाल और चावल की क़ीमतों में आई गिरावट का भी योगदान रहा। दालों की क़ीमत सालाना आधार पर 14 प्रतिशत कम हुई। बेहतर उत्पादन और पर्याप्त स्टॉक को इसकी वजह बताया गया है। चावल की क़ीमत भी 4 प्रतिशत घटी। हालांकि सभी चीज़ें सस्ती नहीं हुईं। वनस्पति तेल की क़ीमत सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़ी, जबकि एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इन बढ़ोतरी की वजह से वेज थाली की क़ीमत में और बड़ी गिरावट नहीं आ सकी।
नॉन-वेज थाली की औसत क़ीमत जुलाई में 2 प्रतिशत घटकर ₹53.5 हो गई, जो जून में ₹54.8 थी। इसमें ब्रॉयलर चिकन की क़ीमत में आई गिरावट का बड़ा योगदान रहा। ब्रॉयलर चिकन नॉन-वेज थाली की कुल क़ीमत का क़रीब आधा हिस्सा है। ब्रॉयलर चिकन की क़ीमत सालाना आधार पर अनुमानित 12 प्रतिशत और महीने-दर-महीने 9 प्रतिशत घटी। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून के दौरान कमज़ोर मांग और श्रावण के समय कई लोगों द्वारा परंपरागत रूप से मांसाहार से परहेज़ करने को इसकी वजह बताया गया है।
हालांकि जुलाई में वेज थाली महीने-दर-महीने महंगी हुई, लेकिन पिछले साल के मुक़ाबले तस्वीर अलग है। जुलाई में वेज थाली की क़ीमत पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 14 प्रतिशत कम रही। वहीं, नॉन-वेज थाली भी सालाना आधार पर क़रीब 13 प्रतिशत सस्ती रही। सब्ज़ियों की क़ीमतों में सालाना गिरावट और ब्रॉयलर चिकन के सस्ता होने से दोनों तरह की थालियों की कुल क़ीमत पिछले साल की तुलना में कम बनी हुई है। हालांकि जुलाई में टमाटर की क़ीमत बढ़ने से मानसून के दौरान घरेलू खाद्य बजट पर दबाव बढ़ा है।