UGC SWAYAM Course:जलवायु परिवर्तन से कचरा प्रबंधन तक, 31 अगस्त तक करें रजिस्ट्रेशन,जानिए कोर्स में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा
Mansi | Aug 12, 2026, 18:39 IST
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विद्यार्थियों के लिए एक विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम की घोषणा की गई है। यह पाठ्यक्रम 21 अगस्त 2026 से शुरू होकर विद्यार्थियों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की दिशा में मार्गदर्शन करेगा। इसमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का समावेश होगा। पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
यूजीसी स्वयम् का कोर्स छात्रों को टिकाऊ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण की सीख देगा
आज पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ केवल वैज्ञानिकों या सरकारों तक सीमित नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, जैव विविधता में कमी और संसाधनों की तेज़ी से होती खपत का असर आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर भी पड़ रहा है। ऐसे में हमारी छोटी-छोटी आदतें और जीवनशैली में किए गए बदलाव भी पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विद्यार्थियों के लिए एक विशेष ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के स्वयम् मंच पर ‘मिशन लाइफ़- पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ नाम से यह पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें टिकाऊ और ज़िम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए तैयार करना है। पाठ्यक्रम की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होगी और इसकी अवधि 10 सप्ताह रखी गई है। इसमें स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए 2 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं।
इस पाठ्यक्रम को केवल किताबों और सिद्धांतों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि पर्यावरण से जुड़े बड़े मुद्दों का हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से क्या संबंध है। पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाएँ, तथा टिकाऊ उपभोग और व्यवहार में बदलाव जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को ऊर्जा, पानी और कचरे के आकलन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और ई-कचरा प्रबंधन, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। यानी पाठ्यक्रम का फोकस केवल पर्यावरणीय समस्याओं को समझने पर नहीं, बल्कि उनके समाधान में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर योगदान देने की समझ विकसित करने पर भी है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी आज के विद्यार्थियों के लिए कई स्तरों पर उपयोगी हो सकती है। बढ़ते जलवायु संकट के बीच टिकाऊ उपभोग, पानी और ऊर्जा की बचत, कचरे का सही प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसी बातें भविष्य की जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। पाठ्यक्रम में पर्यावरणीय कार्रवाई के लिए सामुदायिक भागीदारी पर भी ध्यान दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल व्यक्तिगत प्रयास नहीं है, बल्कि समाज और समुदाय की भागीदारी से इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। पाठ्यक्रम में बताए गए विषय विद्यार्थियों को अपने आसपास की पर्यावरणीय समस्याओं को पहचानने और उनके प्रति ज़िम्मेदार व्यवहार विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है। इसकी शुरुआत 21 अगस्त से होगी और यह 10 सप्ताह तक चलेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की निगरानी में आयोजित परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने वाले विद्यार्थियों को स्वयम् प्रमाणपत्र दिया जाएगा। विद्यार्थियों के पास पर्यावरण और टिकाऊ जीवनशैली से जुड़े विषयों को समझने के साथ-साथ एक प्रमाणपत्र हासिल करने का भी अवसर है। अगर आप स्नातक स्तर के विद्यार्थी हैं और जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता, कचरा प्रबंधन या टिकाऊ जीवनशैली जैसे विषयों में रुचि रखते हैं, तो यह पाठ्यक्रम आपके लिए उपयोगी हो सकता है। जानिए, सीखिए और अपनी रोज़मर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करके पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान दीजिए।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के स्वयम् मंच पर ‘मिशन लाइफ़- पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ नाम से यह पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें टिकाऊ और ज़िम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए तैयार करना है। पाठ्यक्रम की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होगी और इसकी अवधि 10 सप्ताह रखी गई है। इसमें स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए 2 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक विद्यार्थी 31 अगस्त 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं।