यूपी की महिलाओं की ‘विदुर हर्बल टी’ बनी ग्लोबल ब्रांड, विदेशों से मिल रहे ऑर्डर, एक लाख के लोन से शुरू हुआ सफर
Umang | Jul 14, 2026, 19:17 IST
उत्तर प्रदेश के बिजनौर की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही ‘विदुर हर्बल टी’ अब अमेरिका और यूरोप तक पहचान बना रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ यह उद्यम आज 10 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुका है। जड़ी-बूटियों से तैयार इस ऑर्गेनिक हर्बल टी की मांग कई राज्यों में बढ़ रही है और विदेशों में फ्रेंचाइज़ी खोलने की तैयारी चल रही है।
अमेरिका और यूरोप के बाज़ार तक पहुँची ‘विदुर हर्बल टी’
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ अब अपने स्थानीय उत्पादों के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहचान बना रही हैं। बिजनौर की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही ‘विदुर हर्बल टी’ की माँग अब देश की सीमाओं से निकलकर अमेरिका और यूरोप तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित योजनाओं से मिले सहयोग के बाद यह पहल ग्रामीण महिला उद्यमिता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है।
जड़ी-बूटियों से तैयार की जाने वाली इस ऑर्गेनिक हर्बल टी की माँग जहाँ दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लगातार बढ़ रही है, वहीं इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस में इसकी फ्रेंचाइज़ी शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आय के नए अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।
बिजनौर के ब्लॉक कोतवाली स्थित टांडा मैदास लखी वाला गाँव की बबिता रानी के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह ने एक लाख रुपये का लोन लेकर ‘विदुर हर्बल टी’ का उत्पादन शुरू किया था। आज समूह की 10 महिलाएँ मिलकर पूरी तरह ऑर्गेनिक हर्बल टी तैयार कर रही हैं और इस उद्यम से नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इस पहल के माध्यम से समूह की कई महिलाएँ लखपति बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बिजनौर एवं वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने इन महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, आज ये महिलाएँ अपने परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ स्वयं निभाने में सक्षम हैं। विदुर हर्बल टी का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। बिजनौर में इसके 35 आउटलेट और कैफे संचालित हो रहे हैं। मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो विदुर हर्बल टी केंद्र चलाए जा रहे हैं। हाल ही में सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास नया केंद्र शुरू किया गया है और शहर में पाँच नए कैफे खोलने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस से फ्रेंचाइज़ी की माँग भी सामने आई है।
विदुर हर्बल टी पूरी तरह प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है। इसके निर्माण में ऑर्गेनिक लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन, कच्ची हल्दी, अमरूद की पत्ती, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ का उपयोग किया जाता है। इसे दो प्रकार से तैयार किया जाता है। पहली पारंपरिक ऑर्गेनिक हर्बल टी है, जबकि दूसरी ‘अर्जुना हृदय शक्ति’ नामक हर्बल टी है, जिसे दूध और पानी दोनों के साथ बनाया जा सकता है।
इस उद्यम की विशेषता यह भी है कि उत्पाद निर्माण से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी ज़िम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ ही निभाती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्ध कराने की पहल ने इन महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर सफल उद्यम स्थापित करने का अवसर दिया है। ‘विदुर हर्बल टी’ की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि सही सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएँ अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक भी पहुँचा सकती हैं।
जड़ी-बूटियों से तैयार की जाने वाली इस ऑर्गेनिक हर्बल टी की माँग जहाँ दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लगातार बढ़ रही है, वहीं इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस में इसकी फ्रेंचाइज़ी शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आय के नए अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।
एक लाख रुपये के लोन से शुरू हुआ कारोबार, अब देश-विदेश तक पहुँची पहचान
तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बिजनौर एवं वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने इन महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, आज ये महिलाएँ अपने परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारियाँ स्वयं निभाने में सक्षम हैं। विदुर हर्बल टी का कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है। बिजनौर में इसके 35 आउटलेट और कैफे संचालित हो रहे हैं। मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो विदुर हर्बल टी केंद्र चलाए जा रहे हैं। हाल ही में सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास नया केंद्र शुरू किया गया है और शहर में पाँच नए कैफे खोलने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस से फ्रेंचाइज़ी की माँग भी सामने आई है।
जड़ी-बूटियों से तैयार होती है हर्बल टी, उत्पादन से मार्केटिंग तक महिलाओं की जिम्मेदारी
इस उद्यम की विशेषता यह भी है कि उत्पाद निर्माण से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी ज़िम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ ही निभाती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्ध कराने की पहल ने इन महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के आधार पर सफल उद्यम स्थापित करने का अवसर दिया है। ‘विदुर हर्बल टी’ की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि सही सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएँ अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक भी पहुँचा सकती हैं।