USDA की रिपोर्ट में 2025-26 में भारत में अनाज उत्पादन बढ़ने की उम्मीद, जानें गेहूं और मक्के की कितनी बढ़ेगी पैदावार
Gaon Connection | Apr 10, 2026, 16:31 IST
वर्ष 2025-26 में भारत का कृषि क्षेत्र मजबूत रहेगा। गेहूं, मक्का और मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ेगा। खेती के रकबे में विस्तार और बेहतर तकनीकों से यह संभव होगा। दुनिया के अन्य देशों में मौसम के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारत की फसलें वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगी।
भारत में बढ़ेगा गेहूं-मक्का उत्पादन
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की World Agricultural Production Report April 2026 के अनुसार वर्ष 2025-26 (मार्केटिंग ईयर) में भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भी संतुलित और मजबूत बना हुआ है। जहां दुनिया के कई हिस्सों में मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित हुआ है, वहीं भारत में प्रमुख फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। इस वृद्धि के पीछे खेती के रकबे में विस्तार, बेहतर तकनीकों का इस्तेमाल और बाजार में बढ़ती मांग जैसे कारक अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन 11.79 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले एक मजबूत स्थिति को दर्शाता है। गेहूं की बुवाई का क्षेत्र बढ़कर 328 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिससे उत्पादन में सीधा इजाफा हुआ है। इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर उपज भी बढ़कर 3.60 टन तक पहुंच गई है, जो यह संकेत देता है कि किसान अब उन्नत बीज और बेहतर फसल प्रबंधन तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। इन दोनों कारकों के संयोजन ने गेहूं उत्पादन को स्थिर और मजबूत बनाया है।
मक्का के मामले में भी भारत की तस्वीर सकारात्मक नजर आती है। वर्ष 2025-26 में इसका उत्पादन 430 लाख टन रहने का अनुमान है। हालांकि, प्रति हेक्टेयर उपज में हल्की गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 3.55 टन प्रति हेक्टेयर पर आ गई है, लेकिन इसके बावजूद कुल उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह मक्का की खेती के रकबे का बढ़कर 130 लाख हेक्टेयर तक पहुंचना है। दरअसल, पशु आहार, एथेनॉल उत्पादन और औद्योगिक उपयोग में बढ़ती मांग के कारण किसानों का रुझान तेजी से मक्का की ओर बढ़ा है, जिससे यह फसल अब पारंपरिक विकल्पों का मजबूत विकल्प बनती जा रही है।
भारत में ज्वार, बाजरा और जौ जैसे मोटे अनाज का महत्व लगातार बढ़ रहा है। USDA रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में इनका कुल उत्पादन 621.2 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। इन फसलों का रकबा बढ़कर 263.3 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि उत्पादकता भी सुधरकर 2.47 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। मोटे अनाज की खासियत यह है कि ये कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकते हैं और प्रतिकूल मौसम को बेहतर तरीके से सहन करते हैं। यही कारण है कि बदलते जलवायु परिदृश्य में इन्हें भविष्य की खेती का मजबूत आधार माना जा रहा है।
रिपोर्ट से यह भी साफ होता है कि भारत में धीरे-धीरे फसल पैटर्न बदल रहा है। किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि बाजार की मांग, लागत और मुनाफे को ध्यान में रखते हुए अपनी फसल का चयन कर रहे हैं। मक्का और मोटे अनाज की ओर बढ़ता रुझान इसी बदलाव का संकेत है। यह ट्रेंड आने वाले समय में कृषि क्षेत्र को अधिक विविध और टिकाऊ बना सकता है।
गेहूं: रकबा और उत्पादकता दोनों ने दी मजबूती
मक्का: बढ़ती मांग ने बदला खेती का रुख
मोटे अनाज: जलवायु के दौर में सबसे भरोसेमंद फसल
बदलता फसल पैटर्न और कृषि का नया ट्रेंड
दुनिया के अन्य बड़े कृषि देशों का हाल
- रिपोर्ट के अनुसार, ब्राज़ील में समय पर बुवाई और अनुकूल मौसम के चलते मक्का और सोयाबीन दोनों के उत्पादन में मजबूत बढ़त बनी हुई है।
- वहीं दक्षिण अफ्रीका में ला-नीना से जुड़ी अच्छी बारिश ने मक्का उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा दिया है।
- इसके उलट, उरुग्वे में लंबे समय से जारी सूखे ने मक्का और सोयाबीन दोनों फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उत्पादन में तेज गिरावट आई है।
- मैक्सिको में भी ज्वार का उत्पादन घटकर पिछले तीन दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जिसका कारण कम रकबा और प्रतिकूल मौसम बताया गया है।
- इंडोनेशिया में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित है, जहां अनुकूल वर्षा के चलते मक्का उत्पादन में हल्की बढ़त दर्ज की गई है। यह वैश्विक तस्वीर साफ तौर पर दिखाती है कि मौसम अभी भी कृषि उत्पादन का सबसे बड़ा निर्धारक बना हुआ है।