UP Dairy: देश के हर 100 लीटर दूध में सबसे बड़ा योगदान उत्तर प्रदेश का, जानिए कैसे बना नंबर-1
Mansi | Aug 06, 2026, 17:44 IST
उत्तर प्रदेश ने दूध उत्पादन में एक महत्वपूर्ण व बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है, जिसमें उसने 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन करके देश में पहले स्थान पर अपनी स्थिति मजबूत की है। यह उपलब्धि डेयरी विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में मनाई गई। इस डेयरी कॉन्क्लेव में किसानों को नई तकनीकों और योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
उत्तर प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य
उत्तर प्रदेश ने दूध उत्पादन के मामले में देश में अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए पहला स्थान हासिल किया है। राज्य का दुग्ध उत्पादन बढ़कर 38.8 मिलियन मीट्रिक टन पहुँच गया है, जो देश के कुल दूध उत्पादन का लगभग 16 % है। यानी देश में उत्पादित हर छह लीटर दूध में लगभग एक लीटर उत्तर प्रदेश से आता है।
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश का दुग्धशाला विकास विभाग अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस अवसर पर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में 'डेयरी कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया गया, जहाँ किसानों और पशुपालकों को आधुनिक डेयरी तकनीक, सरकारी योजनाओं और स्वरोज़गार के नए अवसरों की जानकारी दी गई।
दुग्धशाला विकास विभाग और पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित डेयरी कॉन्क्लेव में दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 16 % है, जो देश में सबसे अधिक है।
गाँवों की अर्थव्यवस्था को मिल रही मज़बूतीदुग्ध आयुक्त के अनुसार, डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने का अहम माध्यम बन चुका है। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी मिल रही है, महिलाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर बढ़ रहे हैं तथा पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय का भरोसेमंद स्रोत बन रहा है।
सरकार के अनुसार, नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत अब तक 17,994 लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल चुका है। डेयरी कॉन्क्लेव के दौरान पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों को चयन पत्र भी वितरित किए गए। इनमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत 2,100, मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत 1,500 से अधिक तथा नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत 450 से अधिक लाभार्थियों को चयन पत्र प्रदान किए गए।
प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के 829 एमओयू किए गए हैं। वहीं 4,951 नई प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जिससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 2.25 लाख लोगों को रोज़गार मिला है। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत राज्य में प्रतिदिन 39 लाख लीटर दूध की अतिरिक्त प्रसंस्करण और चिलिंग क्षमता विकसित की गई है। इससे लगभग 10,000 नए रोज़गार सृजित हुए हैं। साथ ही निवेशकों को डीबीटी के माध्यम से 42 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया है।
प्रदेश के सभी ज़िलों में आयोजित डेयरी कॉन्क्लेव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्रों, दुग्ध संघों, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील पशुपालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक पशुपालन, पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित आहार और आधुनिक डेयरी तकनीकों की जानकारी दी, ताकि दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय में भी वृद्धि हो सके।
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश का दुग्धशाला विकास विभाग अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस अवसर पर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में 'डेयरी कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया गया, जहाँ किसानों और पशुपालकों को आधुनिक डेयरी तकनीक, सरकारी योजनाओं और स्वरोज़गार के नए अवसरों की जानकारी दी गई।
दूध उत्पादन में सबसे आगे उत्तर प्रदेश
गाँवों की अर्थव्यवस्था को मिल रही मज़बूतीदुग्ध आयुक्त के अनुसार, डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने का अहम माध्यम बन चुका है। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी मिल रही है, महिलाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर बढ़ रहे हैं तथा पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय का भरोसेमंद स्रोत बन रहा है।