Global Market: विदेश में उत्पाद बेचने का सुनहरा मौक़ा, ब्रांडिंग खर्च पर 75% तक मदद; जानिए किसे मिलेगा फ़ायदा
Mansi | Aug 08, 2026, 17:25 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्यातकों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। यह वित्तीय सहायता उत्पादों की ब्रांडिंग एवं व्यापार प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक निर्यात में 50 अरब डॉलर की वृद्धि करना है, जिससे विशेषकर छोटे और मध्यम निर्यातक लाभान्वित होंगे। इससे उत्तर प्रदेश के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगे।
उत्तर प्रदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की ब्रांडिंग पर 75% तक की मदद से कारोबारियों को नई बाज़ार पहुँच की उम्मीद
उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश से निर्यात बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने के लिए निर्यातकों को आर्थिक सहायता देने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत उत्पादों की ब्रांडिंग से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी तक के अलग-अलग खर्चों में मदद दी जाएगी। सरकार का मक़सद निर्यातकों का आर्थिक बोझ कम करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर मज़बूत पहचान दिलाना है।
सरकार की इस पहल से ख़ास तौर पर छोटे और मध्यम निर्यातकों को फ़ायदा मिलने की उम्मीद है। ऐसे कारोबारियों के लिए विदेशों में अपने उत्पादों का प्रचार करना, नए ख़रीदारों तक पहुँच बनाना और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना अक्सर महँगा पड़ता है। आर्थिक सहायता मिलने से वे इन गतिविधियों में ज़्यादा सक्रियता से हिस्सा ले सकेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश से करीब 21 अरब डॉलर के उत्पादों का निर्यात हुआ। सरकार अब वर्ष 2030 तक प्रदेश के निर्यात को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के साथ उनकी ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स, हस्तशिल्प, चमड़ा, कृषि एवं खाद्य सामग्री, रासायनिक और औद्योगिक उत्पाद समेत कई तरह के सामान का निर्यात होता है। इन उत्पादों को अलग-अलग देशों में पहचान दिलाने के लिए ब्रांडिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत निर्यातकों को उत्पादों की ब्रांडिंग पर होने वाले खर्च में 75 % तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। ब्रांडिंग किसी उत्पाद को विदेशी बाज़ार में अलग पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। बेहतर पैकेजिंग, प्रचार और ब्रांड पहचान के ज़रिये कारोबारी विदेशी ग्राहकों के बीच अपने उत्पाद को आसानी से पहुँचा सकते हैं। इस सहायता से उन निर्यातकों को सबसे ज़्यादा राहत मिल सकती है, जो सीमित बजट के कारण अपने उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग नहीं कर पाते हैं।
सरकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने वाले निर्यातकों को भी सहायता देगी। रिपोर्ट के अनुसार, स्टॉल लगाने और हवाई यात्रा जैसे खर्चों का 75 प्रतिशत तक सरकार की ओर से वहन किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ निर्यातकों के लिए नए ख़रीदारों और कारोबारी साझेदारों से संपर्क बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं। यहाँ कारोबारी अपने उत्पादों को सीधे विदेशी ख़रीदारों के सामने पेश कर सकते हैं। सरकार की सहायता से छोटे निर्यातकों के लिए ऐसे मंचों तक पहुँच बनाना आसान हो सकता है।
विदेशी बाज़ारों में नए अवसर तलाशना भी निर्यात कारोबार का अहम हिस्सा है। किसी नए देश में उत्पाद भेजने से पहले वहाँ की माँग, ख़रीदारों की पसंद और कारोबार की संभावनाओं को समझना पड़ता है। इसके लिए होने वाले खर्च में भी सरकार सहायता देने की योजना बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए बाज़ारों की तलाश के लिए निर्यातकों को दो लाख रुपये तक की मदद दी जा सकती है। इससे कारोबारी नए देशों में अपने उत्पादों की संभावनाएँ तलाश सकेंगे और निर्यात के लिए नए रास्ते बना सकेंगे।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विदेशों में प्रचार-प्रसार और कारोबारी आयोजनों का महत्व बढ़ गया है। सरकार की प्रस्तावित सहायता में ऐसे आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों के प्रचार से जुड़े खर्च को भी शामिल किया गया है।
निर्यातकों को विभिन्न प्रचार गतिविधियों में खर्च की गई राशि पर 75 प्रतिशत तक या निर्धारित सीमा के अनुसार आर्थिक सहायता मिलने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे उत्तर प्रदेश के कारोबारियों को विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश के कई छोटे कारोबारी स्थानीय स्तर पर बेहतरीन उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन उनके पास अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और बाज़ार तलाशने में मिलने वाली सहायता ऐसे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश के उत्पाद केवल घरेलू बाज़ार तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें विदेशी बाज़ारों में भी स्थायी पहचान मिले। इसके लिए निर्यातकों को आर्थिक सहायता के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसरों से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार का 50 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य बड़ा है। इसे हासिल करने के लिए निर्यातकों को नए बाज़ार, नए ख़रीदार और बेहतर ब्रांडिंग की ज़रूरत होगी। ऐसे में ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों, विदेश यात्रा और नए बाज़ारों की तलाश पर मिलने वाली सरकारी मदद निर्यात कारोबार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। अगर इस सहायता का लाभ ज़्यादा से ज़्यादा निर्यातकों तक पहुँचता है, तो प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने के साथ छोटे कारोबारियों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
सरकार की इस पहल से ख़ास तौर पर छोटे और मध्यम निर्यातकों को फ़ायदा मिलने की उम्मीद है। ऐसे कारोबारियों के लिए विदेशों में अपने उत्पादों का प्रचार करना, नए ख़रीदारों तक पहुँच बनाना और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में हिस्सा लेना अक्सर महँगा पड़ता है। आर्थिक सहायता मिलने से वे इन गतिविधियों में ज़्यादा सक्रियता से हिस्सा ले सकेंगे।
यूपी के निर्यात को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
ब्रांडिंग खर्च का बड़ा हिस्सा उठाएगी सरकार
प्रदर्शनियों और विदेश यात्रा के खर्च में भी मदद
नए बाज़ार तलाशने के लिए भी सहायता
अंतरराष्ट्रीय प्रचार और आयोजनों पर भी राहत
निर्यातकों को विभिन्न प्रचार गतिविधियों में खर्च की गई राशि पर 75 प्रतिशत तक या निर्धारित सीमा के अनुसार आर्थिक सहायता मिलने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे उत्तर प्रदेश के कारोबारियों को विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाने में मदद मिलेगी।