VB-G RAM G: गाँव के विकास के फैसलों में बढ़ेगी पंचायतों की भूमिका, 5.26 लाख से ज्यादा प्रतिनिधि जुड़े
Mansi | Sept 01, 2026, 13:00 IST
देशभर में पंच सम्मेलनों का आयोजन कर VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है। इन सम्मेलनों में लाखों पंचायती राज प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में बताया जा रहा है। अधिनियम ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास योजनाओं को बनाने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका देता है।
1,338 सम्मेलनों में 5.26 लाख से ज्यादा प्रतिनिधि जुड़े, VB-G RAM G पर दी जा रही जानकारी
गाँवों में विकास से जुड़े काम किस तरह हों, योजनाएँ सही लोगों तक कैसे पहुँचें और पंचायतें अपनी जिम्मेदारी बेहतर तरीके से कैसे निभाएँ, इसे लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 को लेकर पंच सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
इन सम्मेलनों में अब तक 5.26 लाख से ज्यादा पंचायती राज प्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो चुके हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देशभर में अब तक 1,338 पंच सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इनका मकसद पंचायतों से जुड़े लोगों को नए अधिनियम, उनकी जिम्मेदारियों और ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका को आसान तरीके से समझाना है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला स्तर पर पंच सम्मेलनों के आयोजन का अनुरोध किया था। इसके बाद अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन सम्मेलनों में पंचायतों के तीनों स्तरों से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं, स्थानीय विकास और बेहतर प्रशासन को लेकर जानकारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तय पंच सम्मेलन पूरे हो चुके हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में भी पंच सम्मेलनों का आयोजन पूरा किया गया है।
कुछ राज्यों ने अलग-अलग स्तर पर किए आयोजन गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में सिर्फ़ जिला स्तर तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहे। यहाँ दूसरे प्रशासनिक स्तरों पर भी पंच सम्मेलनों का आयोजन किया गया।
इससे पंचायतों से जुड़े ज्यादा प्रतिनिधियों और कर्मचारियों तक अधिनियम की जानकारी पहुँचाने में मदद मिली। कार्यक्रमों के दौरान उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझने और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों को बेहतर तरीके से करने की जानकारी भी दी गई।
VB-G RAM G अधिनियम में ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से योजनाएँ बनाने, उन्हें लागू करने और उनके कामकाज की निगरानी करने में भूमिका निभानी होगी। इसके साथ ही योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और लोगों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना भी पंचायतों की जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसका सीधा मतलब है कि गाँव के विकास से जुड़े फैसलों और कामों में स्थानीय स्तर पर पंचायतों की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी।
पंच सम्मेलनों में प्रतिनिधियों को अधिनियम से जुड़े कई जरूरी विषयों के बारे में बताया जा रहा है। इनमें विकसित ग्राम पंचायत योजना यानी VGPP, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड, परिसंपत्तियों का निर्माण, अलग-अलग योजनाओं के बीच तालमेल, सोशल ऑडिट और शिकायतों के समाधान जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं। इन विषयों की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि योजनाओं का बड़ा हिस्सा आखिरकार गाँव के स्तर पर ही लागू होता है।
स्थानीय जरूरत के हिसाब से योजना बनाने पर जोर सम्मेलनों के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि गाँव की जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से स्थानीय लोग ही समझ सकते हैं। ऐसे में पंचायतों की भागीदारी के साथ योजनाएँ तैयार करने से विकास कार्यों को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बनाया जा सकता है। इसके साथ ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पहुँचे और गाँव के विकास में लोगों की भी भूमिका रहे।
सरकार के अनुसार, पंच सम्मेलन सिर्फ़ जानकारी देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को नई व्यवस्था के लिए तैयार करने की कोशिश भी हैं। अधिनियम की जानकारी होने से पंचायतों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें सही तरीके से लागू करना आसान हो सकता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे इन सम्मेलनों के जरिए ग्रामीण विकास, बेहतर प्रशासन और सहभागी योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से गाँवों में विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मि
इन सम्मेलनों में अब तक 5.26 लाख से ज्यादा पंचायती राज प्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हो चुके हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देशभर में अब तक 1,338 पंच सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इनका मकसद पंचायतों से जुड़े लोगों को नए अधिनियम, उनकी जिम्मेदारियों और ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका को आसान तरीके से समझाना है।
1,338 पंच सम्मेलनों में लाखों लोगों की भागीदारी
23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सम्मेलन पूरे
कुछ राज्यों ने अलग-अलग स्तर पर किए आयोजन गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में सिर्फ़ जिला स्तर तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहे। यहाँ दूसरे प्रशासनिक स्तरों पर भी पंच सम्मेलनों का आयोजन किया गया।
इससे पंचायतों से जुड़े ज्यादा प्रतिनिधियों और कर्मचारियों तक अधिनियम की जानकारी पहुँचाने में मदद मिली। कार्यक्रमों के दौरान उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझने और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों को बेहतर तरीके से करने की जानकारी भी दी गई।
ग्राम पंचायतों की भूमिका होगी अहम
योजना से लेकर सोशल ऑडिट तक की जानकारी
स्थानीय जरूरत के हिसाब से योजना बनाने पर जोर सम्मेलनों के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि गाँव की जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से स्थानीय लोग ही समझ सकते हैं। ऐसे में पंचायतों की भागीदारी के साथ योजनाएँ तैयार करने से विकास कार्यों को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बनाया जा सकता है। इसके साथ ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि योजनाओं का फायदा सही लोगों तक पहुँचे और गाँव के विकास में लोगों की भी भूमिका रहे।