किसानों की राह होगी आसान! ₹18907 करोड़ से बदलेगी गांवों की तस्वीर, एक साल में बनेंगी 26474 किमी ग्रामीण सड़कें
Gaon Connection | Jun 18, 2026, 17:55 IST
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के तहत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाने के लिए 18,907 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता, रखरखाव और समय पर निर्माण पर ज़ोर दिया है। साथ ही दूरदराज़, जनजातीय और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने तथा ई-मार्ग प्लेटफ़ॉर्म से निगरानी की योजना बनाई गई है।
दूरदराज़ गांवों तक पहुंचेगी पक्की सड़क
केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और अन्य ग्रामीण कनेक्टिविटी पहलों के तहत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह बात सामने आई। इस बैठक का उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और वामपंथी उग्रवाद (नक्सल) प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना के तहत राज्यवार भौतिक और वित्तीय प्रगति का जायज़ा लेना था।
कंसल ने साल 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और काम की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें छूटे हुए इलाक़ों में ग्रामीण सड़क संपर्क (कनेक्टिविटी) को पूरी तरह संतृप्त (सैचुरेट) करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
इस समीक्षा बैठक का मुख्य फ़ोकस ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और उन्हें लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने पर था। सचिव रोहित कंसल ने कहा कि भरोसेमंद ग्रामीण कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता मानकों का सख़्ती से पालन करना और उनका सही रख-रखाव (मेंटेनेंस) बेहद ज़रूरी है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िलों में सड़क बुनियादी ढाँचे के रणनीतिक महत्व को समझते हुए, सचिव ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे काम पूरा करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें और तय समय पर काम पूरा करना सुनिश्चित करें।
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-I (PMGSY-I) और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत बचे हुए सभी असंबद्ध (जहाँ सड़कें नहीं हैं) गाँवों और बस्तियों में काम को तेज़ी से पूरा करें। इसमें विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups - PVTG) की बस्तियों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
हर मौसम में काम आने वाली (ऑल-वेदर) सार्वभौमिक सड़कों की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए, सचिव ने राज्यों से कहा कि वे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के काम में तेज़ी लाएं, काम के बीच आने वाली रुकावटों को दूर करें और लंबित सड़क परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। साथ ही, राज्यों से ज़मीनी स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली को मज़बूत करने और पूरी परियोजना के दौरान कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
बैठक में 'ई-मार्ग' (Electronic Maintenance of Rural Roads under PMGSY) प्लेटफ़ॉर्म को हर जगह पूरी तरह लागू करने पर भी ज़ोर दिया गया। इसके ज़रिए सड़कों के रख-रखाव की गतिविधियों की लाइव (रियल-टाइम) निगरानी, प्रदर्शन का मूल्यांकन और भुगतान पर नज़र रखी जा सकेगी। इस प्लेटफ़ॉर्म के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से ग्रामीण सड़कों के रख-रखाव में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता में सुधार होने की उम्मीद है।
समीक्षा के अंत में, सचिव ने काम के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण (land acquisition) और वन मंज़ूरी (forest clearance) के प्रस्तावों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए राज्य-विशिष्ट निर्देश जारी किए। बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। राज्यों ने अपने लक्षित एक्शन प्लान पेश किए और मंत्रालय को भरोसा दिलाया कि सभी लंबित काम और वार्षिक लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे।
कंसल ने साल 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और काम की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें छूटे हुए इलाक़ों में ग्रामीण सड़क संपर्क (कनेक्टिविटी) को पूरी तरह संतृप्त (सैचुरेट) करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
सड़कों की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर विशेष ज़ोर
इन इलाक़ों में तेज़ी से काम पूरा करने के निर्देश
हर मौसम में काम आने वाली (ऑल-वेदर) सार्वभौमिक सड़कों की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए, सचिव ने राज्यों से कहा कि वे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के काम में तेज़ी लाएं, काम के बीच आने वाली रुकावटों को दूर करें और लंबित सड़क परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। साथ ही, राज्यों से ज़मीनी स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली को मज़बूत करने और पूरी परियोजना के दौरान कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफ़ॉर्म से होगी लाइव निगरानी
समीक्षा के अंत में, सचिव ने काम के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण (land acquisition) और वन मंज़ूरी (forest clearance) के प्रस्तावों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए राज्य-विशिष्ट निर्देश जारी किए। बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। राज्यों ने अपने लक्षित एक्शन प्लान पेश किए और मंत्रालय को भरोसा दिलाया कि सभी लंबित काम और वार्षिक लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे।