भारत के लिए खतरे की घंटी! खेती के बाद अब AI डेटा सेंटर बढ़ा रहे पानी की खपत, जल प्रबंधन पर मूडीज़ की बड़ी चेतावनी
Umang | Jun 23, 2026, 15:16 IST
मूडीज़ रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि भारत में बिखरी हुई जल प्रबंधन व्यवस्था, कृषि में पानी की भारी खपत, अत्यधिक सब्सिडी वाली जल कीमतें और एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती माँग जल संकट को और गंभीर बना सकती है। रिपोर्ट के अनुसार जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव आर्थिक गतिविधियों, सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी वित्तीय स्थिति पर असर डाल सकता है।
भारत में पानी पर बढ़ती निर्भरता बनी चिंता
भारत में पानी की उपलब्धता और उसके प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता बन सकती हैं। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज़ रेटिंग्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि देश में जल प्रबंधन की बिखरी हुई व्यवस्था, पानी की अत्यधिक सब्सिडी वाली कीमतें और विभिन्न क्षेत्रों के बीच जल आवंटन की धीमी प्रक्रिया जल संकट को और गहरा सकती है। इसका असर न केवल आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है, बल्कि सरकारी वित्तीय दबाव और ऋण जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र को जल उपयोग का सबसे बड़ा उपभोक्ता बताया गया है। मूडीज़ के अनुसार भारत के कुल मीठे पानी का लगभग 80 प्रतिशत उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है। ऐसे में जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, भूजल के अत्यधिक दोहन और जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ कृषि उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। एजेंसी का कहना है कि पानी की उपलब्धता, उसका आवंटन और उपयोग आने वाले समय में आर्थिक मजबूती तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल होंगे।
मूडीज़ के अनुसार जल आवंटन ढाँचा यह तय करता है कि घरों, उद्योगों और कृषि क्षेत्रों के बीच पानी की आपूर्ति किस प्रकार प्राथमिकता के आधार पर बाँटी जाए, उसकी कीमत कैसे तय हो और उसका वितरण कैसे किया जाए। जल संकट से जूझ रही व्यवस्थाओं में यही ढाँचा यह निर्धारित करता है कि कमी का प्रभाव कितना होगा और उसका आर्थिक दबाव कितनी तेज़ी से सामने आएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों में जल प्रबंधन और आवंटन व्यवस्था कमज़ोर या लचीली नहीं होती, वहाँ पानी की कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। इससे लागत बढ़ती है और उद्योगों तथा सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान की आशंका भी बढ़ जाती है।
मूडीज़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि क्लाउड कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेज़ विस्तार के कारण डेटा सेंटरों की संख्या बढ़ रही है। इसके चलते पानी की माँग भी बढ़ रही है। एजेंसी के अनुसार डेटा सेंटर एक जल-गहन औद्योगिक गतिविधि हैं और भविष्य में सरकारों तथा जल आपूर्ति एजेंसियों को इस बढ़ती माँग को भी ध्यान में रखना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार भारत का जल प्रबंधन ढाँचा "बिखरा हुआ या कम लचीला" है। देश में जल प्रबंधन और नीतियों की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों के पास है और 28 से अधिक राज्यों में इसकी अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं। मूडीज़ का कहना है कि ऐसी स्थिति में जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। एजेंसी के मुताबिक कृषि क्षेत्र में पानी की कीमतें अत्यधिक सब्सिडी वाली हैं, विभिन्न क्षेत्रों के बीच जल पुनः आवंटन की प्रक्रिया धीमी है और कई क्षेत्रों के पास आवश्यक जल अवसंरचना में निवेश करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
मूडीज़ ने विश्व संसाधन संस्थान (World Resources Institute) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में अत्यधिक गर्मी, बाढ़ और मानसून की अनिश्चितता से जुड़ा जोखिम पहले से ही ऊँचा है। वहीं जल प्रबंधन से जुड़ा जोखिम बहुत अधिक है, जिसका प्रमुख कारण पुरानी जल अवसंरचना और भूजल का अत्यधिक दोहन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जल प्रबंधन और आवंटन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया, तो जल संकट का असर आर्थिक गतिविधियों, सार्वजनिक सेवाओं और वित्तीय स्थिरता पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र को जल उपयोग का सबसे बड़ा उपभोक्ता बताया गया है। मूडीज़ के अनुसार भारत के कुल मीठे पानी का लगभग 80 प्रतिशत उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है। ऐसे में जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, भूजल के अत्यधिक दोहन और जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ कृषि उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। एजेंसी का कहना है कि पानी की उपलब्धता, उसका आवंटन और उपयोग आने वाले समय में आर्थिक मजबूती तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल होंगे।
जल आवंटन व्यवस्था पर बढ़ रही चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों में जल प्रबंधन और आवंटन व्यवस्था कमज़ोर या लचीली नहीं होती, वहाँ पानी की कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। इससे लागत बढ़ती है और उद्योगों तथा सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान की आशंका भी बढ़ जाती है।